बदरीनाथ वर्मा, डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा से सीख लें अाज के नेता

Patna News - अपने समय के महान साहित्यसेवी और बिहार के प्रथम शिक्षा मंत्री आचार्य बदरीनाथ वर्मा का व्यक्तित्व और चरित्र अत्यंत...

Nov 11, 2019, 09:45 AM IST
अपने समय के महान साहित्यसेवी और बिहार के प्रथम शिक्षा मंत्री आचार्य बदरीनाथ वर्मा का व्यक्तित्व और चरित्र अत्यंत प्रेरणास्पद और अनुकरणीय है। साहित्य, पत्रकारिता और राजनीति के आदर्श-पुरुष थे वर्मा जी। दूसरी ओर महान शिक्षाविद डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा तो बिहार के जनक ही थे। बिहार एक अलग राज्य हो इस आंदोलन के सफल प्रणेता थे सच्चिदा बाबू। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि अपने राजनैतिक स्वार्थ में डूबे बिहार के नेतागण उन्हें भूलते जा रहे हैं। आज के राजनीतिज्ञों को उनके उद्दांत और लोक-कल्याणकारी जीवन से शिक्षा लेनी चाहिए। यह बात बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन में इन दोनों विभूतियों की जयंती पर आयोजित समारोह की अध्यक्षता करते हुए सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने कही। सम्मेलन के प्रधान मंत्री डॉ. शिववंश पांडेय ने कहा कि बदरीनाथ वर्मा में आचार्यत्व का विशेष गुण था। वे अंग्रेजी के प्राध्यापक थे, लेकिन हिंदी के लिए जो कार्य उन्होंने किया वह अतुल्य है।

सम्मेलन के उपाध्यक्ष नृपेंद्रनाथ गुप्त, अभय नाथ ठाकुर और सुनील कुमार दूबे ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन की शुरुआत कवि राज कुमार प्रेमी ने वाणी-वंदना से की। वरिष्ठ कवि और सम्मेलन के उपाध्यक्ष डॉ. शंकर प्रसाद ने कहा कि मुझको न कोई साया-ए-दीवार मिलेगा, सहारा है मेरे सामने दीवार नहीं है..., सच्चिदानंद सिन्हा का कहना था सभी नाचते, समय नचाता, कभी किसी का इंतजार न करता..., वरिष्ठ कवयित्री डॉ. सुधा सिन्हा, देवेंद्र लाल दिव्यांशु, डॉ. सुलोचना कुमारी, प्रभात कुमार धवन, डॉ. विनय कुमार विष्णुपुरी, मधुरानी लाल, अभिलाषा कुमारी, छट्ठू ठाकुर, विभा रानी श्रीवास्तव और डॉ. कुंदन कुमार ने भी अपनी रचनाओं का पाठ किया। मंच का संचालन योगेन्द्र प्रसाद मिश्र ने किया।

X

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना