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भद्रा इस बार नहीं बनेगी बाधक, होलिका दहन का मुहूर्त शाम 6:35 से लेकर रात 11:26 बजेे तक

एक वर्ष पहले
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक तस्वीर।
  • ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा के अनुसार अशुभ माना गया भद्रा का योग दोपहर 12:23 तक बजे तक ही रहेगा
  • सोमवार को पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र होने से इस दौरान ध्वज योग रहेगा। इसके साथ ही इस दिन त्रिपुष्कर योग भी बन रहा है

पटना. इस बार अशुभ मानी जानेवाली भद्रा होलिका दहन में बाधक नहीं बनेगी। बल्कि दहन के समय कई शुभ मुहूर्त भी होंगे। ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा के अनुसार अशुभ माना गया भद्रा का योग दोपहर 12:23 तक बजे तक ही रहेगा। यानी होलिका दहन के वक्ता भद्रा नहीं रहेगी। बल्कि प्रदोष काल में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 6:35 से रात 11:26 तक रहेगा।
सोमवार को पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र होने से इस दौरान ध्वज योग रहेगा। इसके साथ ही इस दिन त्रिपुष्कर योग भी बन रहा है। यह यश-कीर्ति एवं विजय प्रदान करने वाला होता है। आज होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शाम के समय भद्रा रहित समय में किया जाएगा। भद्रा का स्वभाव उग्र होने के कारण इसमें होलिका दहन वर्जित होता है। इस दिन पूर्णिमा सूर्योदय से मध्यरात्रि 11:30 बजे तक रहेगी। इसके बाद 10 मार्च को होली मनेगी।

होलिका दहन आज, कल मनेगी होली
होली मंगलवार को उत्तरफाल्गुन नक्षत्र तथा त्रिपुष्कर योग में मनेगी। सोमवार को होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को पूर्व फाल्गुन नक्षत्र में सोमवार को प्रदोष काल से लेकर निशामुख रात्रि 11:26 बजे तक जलाई जाएगी। महिलाएं व्रत रखकर हल्दी का टीका लगाकर सात बार होलिका की परिक्रमा कर परिवार की सुख-शांति की कामना करती हैं।

भस्म का महत्व
पंडित झा के अनुसार होलिका दहन की भस्म को काफी पवित्र माना गया है। इस आग में गेहूं, चना की नई बाली, गन्ना को भुनने से शुभता का वरदान मिलता है। होली के दिन संध्या बेला में इसका टीका लगाने से सुख-समृद्धि और आयु के वृद्धि होती है। इसके साथ ही इस दिन ईश्वर से नई फसल की खुशहाली की कामना भी की जाती है। सेंक कर लाए गए धान्यों को खाने से अपनी काया हमेशा निरोगी रहती है। घर में माता अन्नपूर्णा की कृपा बनी रहती है।

अनिष्टता का होगा नाश होलिका पूजन करें
पंडित झा के अनुसार होलिका दहन का शुभ मुहूर्त मिथिला पंचांग के अनुसार प्रदोष काल से मध्यरात्रि तक है। बनारसी पंचांग के मुताबिक प्रदोष काल से लेकर निशामुख रात्रि 11:26 बजे तक है। होलिका की पूजा करते समय ॐ होलिकायै नम: मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।  मेष राशि के लोग गुड़ की आहुति देकर 9 परिक्रमा करें। वृष राशि वाले चीनी की आहुति देकर 11 परिक्रमा करें।

होलिका दहन मुहूर्त
आज शाम 06:22 बजे से निशा मुख रात्रि 11:26 बजे तक

राशि के अनुसार खेलें होली 
मेष- लाल, पीला या सफेद
वृष- सफेद, हरा या नीला
मिथुन- हरा, नीला या सफेद
कर्क- सफेद, पीला या लाल
सिंह- लाल, गुलाबी, पीला या सफेद
कन्या- हरा, नीला या चमकीला सफेद
तुला- सफेद, हरा या नीला
वृश्चिक- लाल गुलाबी, नारंगिया  पीला
धनु- पीला, गुलाबी या नारंगी  
मकर- नीला, हरा या बैंगनी  
कुंभ- नीला, हरा या सफेद           
मीन- पीला, गुलाबी, लाल या सफेद

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