पटना

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नेपाल से आइस बॉक्स में लाते हैं शराब, ट्रेन से कोसी में सप्लाई, बार्डर से स्टेशन तक कोई पूछता भी नहीं

नेपाल से आइस बॉक्स में शराब की बोतलें भरकर तस्कर लाते हैं और वहां से ट्रेन की मदद से कई जिलों में सप्लाई करते हैं।

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 08:28 AM IST
bhaskar Ground Report of liquor in Bihar

पटना। बिहार के जोगबनी से सटे भारत-नेपाल सीमा तस्करों के लिए सेफ जोन बन गया है। बॉर्डर पर चेकिंग की सुचारु व्यवस्था नहीं होना, इसकी बड़ी वजह है। सीमा में प्रवेश के मुख्य द्वार पर सख्ती बढ़ती है तो लोग टूटी दीवार के रास्ते से प्रतिबंधित सामानों की तस्करी करते हैं। यह टूटी हुई दीवार बॉर्डर से महज 20 मीटर की दूरी पर है। सीमा के मुख्य द्वार अौर इस टूटी दीवार के रास्ते से आने-जाने में न कोई रोक-टोक है और न ही काेई जांच। लोग आराम से आते-जाते हैं। इससे होकर किसी भी तरह का सामान लेकर जाना आम बात है। इसका खुलासा तब हुआ जब भास्कर की टीम ने भारत-नेपाल की इस सीमा में दिन-रात 24 घंटे तक पड़ताल की। रविवार की सुबह से सोमवार की सुबह तक टीम वहां रही। इस दौरान शराब तस्करी के चौंकानेवाले तरीके सामने आए। ऐसे होती है तस्करी...


- नेपाल से आइस बॉक्स में शराब की बोतलें भरकर तस्कर लाते हैं और वहां से जोगबनी-कटिहार ईएमयू ट्रेन की मदद से कोसी के विभिन्न जिलों में सप्लाई करते हैं। इस ट्रेन की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे हैं।

- इसलिए जोगबनी के रास्ते बॉर्डर पार से आने वाली शराब, प्रतिबंधित दवाएं, सुपाड़ी, कोरेक्स आदि सामानों को बिहार के अन्य जिले में भेजने के लिए सबसे सुरक्षित रास्ता यह ट्रेन है।

- पूर्णिया स्टेशन पर भी जब ट्रेन पहुंचती है तो यहां भी किसी प्रकार की जांच नहीं होती है

होटल संचालकों व शराब माफियाओं का नेटवर्क मजबूत

बिहार के अलग-अलग जिलों से शराब माफिया इस बॉर्डर से नेपाल के रानीपुर पहुंचते हैं। यहां एक छोर से लेकर दूसरे छोर तक अनगिनत शराब की दुकानें हैं। बिहार में शराबबंदी के बाद बिहार के कोसी इलाके के शराब माफियाओं ने नेपाल के रानीपुर के होटल संचालकों से यारी की। ये लोग पहले वहां जाकर होटलों में ठहरते हैं, फिर दोनों के बीच डील होती है। होटल के संचालक बॉर्डर पार करने की तरकीब बताते हैं। साथ ही अपना आदमी भी साथ में लगा देते हैं। इसके बाद जब बिहार (जोगबनी) में सामान पहुंचता है तो उसे ट्रेन पर चढ़ाने तक की जवाबदेही उनकी ही होती है। एक होटल के संचालक ने बताया कि बिहार में शराबबंदी के बाद यहां से बिहार शराब ले जानेवाले की संख्या काफी बढ़ गई है। इससे शराब की डिमांड भी बढ़ी है। इसका मुनाफा हमलोगों को भी होता है। चूंकि रानीपुर बॉर्डर से सटा हुआ है, इसलिए यहां ज्यादा दुकानें खुल गई हैं। ट्रेन में किसी तरह की धड़-पकड़ न हो, इसके लिए रेल पुलिस को मिलाकर रखा जाता है। केवल जब रेल के बड़े अधिकारी का दबाव होता है तो औचक छापेमारी में एकाध बार सामान पकड़ाता है।

ऐसे होती है तस्करी


ट्रेन में सामान रख दूसरी जगह चले जाते हैं तस्कर
ट्रेन के अंदर सामान रखने के बाद तस्कर अपनी जगह बदल कर दूसरी जगह पर आराम से बैठ जाते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस ट्रेन में सवार होने वाले यात्रियों की कोई जांच नहीं की जाती है। रविवार की सुबह जब टीम रेलवे स्टेशन पहुंची तो रेल पुलिस के छह जवान आए। पहले ये सभी महिला बोगी में सवार हो गए, जिसमें एक भी महिला नहीं थी। फिर उनलोगों पेसैंजर की तरफ की बोगी के शटर से बंद कर आराम फरमाने लगे। जब रात का अंधेरा छंटने लगा और सुबह की रोशनी फैलने लगी तो दो जवान आए और अनमने ढंग से कुछ सामानों पर लाठी ठोककर फिर उसी महिला बोगी में वापस चले गए।

मछली के डिब्बे का तस्करी के लिए इस्तेमाल
व्यापारी अमूमन आइस बॉक्स में मछली रखकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाते हैं। अब तस्कर शराब समेत अन्य नशीले सामानों की तस्करी करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। तस्कर मछली के डिब्बे यानी आइस बॉक्स में शराब, प्रतिबंधित ड्रग्स, सुपाड़ी इत्यादि सामान को लेकर बड़े आराम से रेलमार्ग के माध्यम से पूर्णिया के बड़े बाजार में पहुंच जाते हैं। रेल पुलिस की हालत यह है कि यहां के जंक्शन पर भी इन अाइस बॉक्स की जांच नहीं की जाती है। इसके साथ अररिया, फारबिसगंज, बथनाहा समेत अन्य जगहों पर भी इस डिब्बे को उतारते जाते हैं।


बेरोकटोक बॉर्डर के आर-पार आते-जाते हैं लोग

बॉर्डर पर नहीं दिखते कस्टम अधिकारी और एसएसबी
देर रात भारत-नेपाल का जोगबनी बॉर्डर भगवान भरोसे है। तस्करी के इस खेल को जानने के लिए बीते रविवार को भास्कर की टीम ने देर रात तक जोगबनी और नेपाल के बॉर्डर पर पड़ताल की। रात दो बजे कई लोग बगैर रोक-टोक के बॉर्डर पार कर रहे थे। इस दौरान न सीमा सुरक्षा बल और न ही कस्टम के अधिकारी नजर आए, जबकि बॉर्डर पार करने वाले लोगों के हाथों में कई तरह के सामान थे। इनमें से किसी की जांच नहीं की गई। ये लोग भी इसी ट्रेन में आकर सवार हो गए।


थाइलैंड की सुपाड़ी को नेपाल का बताकर बचाते हैं टैक्स
डेढ़ माह पहले कस्टम ने एक ट्रक थाइलैंड उत्पादित सुपाड़ी को जब्त किया था। इसके बाद एक बड़े तस्करों के रैकेट का खुलासा हुआ था, जो थाइलैंड के निर्मित व उत्पादित सामान को नेपाल मार्का देकर सरकार को टैक्स की चपत लगाने की फिराक में थे। नेपाल में उत्पादित सामान को भारत सरकार को कम टैक्स इंट्री मिल जाती है। बरामद सुपाड़ी को तस्कर नेपाल में उत्पादित बताकर भारत सरकार को करोड़ों का चूना लगाने की फिराक में थे। कस्टम की सतर्कता के कारण इसको जब्त कर लिया गया।

ऐसे होती है तस्करी...

- ट्रेन में सवार होने के बाद शराब से भर आइस बॉक्स को को बोगी में रखकर खुद दूसरी बोगी में चले जाते हैं। पुलिस देखने पर भी इसे जब्त नहीं करती है।

टूटी हुई दीवार
- जब जोगबनी बॉर्डर पर सख्ती बढ़ जाती है तो तस्कर बॉर्डर से महज 20 मीटर की दूरी पर इस टूटी दीवार का इस्तेमाल भारत आने-जाने के लिए करते हैं।

अलग विंग नियमित रूप से करती है छापेमारी

पिछले माह में कई सामानों को जब्त किया गया था। इसके लिए कस्टम में अलग से एक विंग है, जो नियमित रूप से छापेमारी करती है। साथ ही बॉर्डर पर भी 24 घंटे कर्मी तैनात रहते हैं। -जेके इका, कस्टम सुप्रिटेंडेंट

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