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हकीकत / थानों में कबाड़ के बीच खड़ी पुलिस को गश्ती के लिए मिलीं साइकिलें



Bicycles in the police stations
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Bicycles in the police stations

  • साइकिल से सायरन, टॉर्च और प्लेट भी हो चुका है गायब, ढाई साल में 20 से 30 बार ही साइकिलों का हुआ है इस्तेमाल
  • उम्रदराज पुलिसकर्मी शारीरिक परेशानी की वजह से, तो वहीं युवा पुलिसकर्मी यूं ही साइकिल चलाना ही नहीं चाहते

Dainik Bhaskar

Dec 07, 2018, 06:51 AM IST

आलोक द्विवेदी, पटना. पटना की गलियों में पेट्रोलिंग अच्छी तरह से हो, इसके लिए पुलिस को साइकिल उपलब्ध कराई गई थी। ढाई साल बीत चुके हैं, इसके बावजूद पटना के कई थानों में पुलिसकर्मियों ने महज 20 से 30 बार ही साइकिल का उपयोग गश्ती के लिए किया है।

 

देखरेख के अभाव में ये साइकिल पटना के विभिन्न थानों में जंग खा रही हैं। पुलिस के मुताबिक इसकी मुख्य वजह उम्रदराज पुलिसकर्मियों को कई तरह की शारीरिक परेशानी का होना है, तो वहीं युवा पुलिसकर्मी साइकिल चलाना नहीं चाहते हैं। साथ ही अपराधियों के पास तेज रफ्तार की बाइक होने से साइकिल से पीछा करना संभव नहीं है।  

 

सर्वे के बाद थानों को दी थी गई थी साइकिल 
पटना में पेट्रोलिंग के लिए हर थाने में 5 से 8 साइकिल दी गई थी। साइकिल देने से पहले उन थाने के लोकेशन और उनसे संबंधित क्षेत्र के बारे में सर्वे किया गया। इसकी वजह से दीघा थाने में जहां 5 साइकिल दी गई थी,  वहीं पर गर्दनीबाग थाने में 4 सेट यानी 8 साइकिल दी गई थी। अप्रैल, 2016 को साइकिल से गश्त करने के पहले चरण में शहर के गर्दनीबाग, कोतवाली, गांधी मैदान, शास्त्रीनगर, राजीवनगर, बुद्धा कॉलोनी और पीरबहोर थानों का ही चुनाव किया गया था। इसके लिए मई में करीब 75 हजार रुपए की लागत से 38 साइकिल खरीदी गई थी। 23 मई, 2016 को एसएसपी मनु महाराज ने हरी झंडी दिखाकर साइकिल गश्ती टीम को रवाना किया था। इसके बाद करीब एक माह तक सभी थानों में पुलिस टीम ने साइकिल से गश्ती की। समय बीतने के साथ साइकिल कबाड़ की तरह थाने के एक कोने में फेंक दी गई। 2017 में फिर से पटना के दूसरे थानों के लिए भी 130 साइकिल खरीदी गई थी। इसके साथ ही 20 मई, 2018 को एक संस्था ने पुलिस को गश्ती के लिए 36 साइकिल दान में दी थी।

 

लंबे समय से नहीं हो रहा इनका उपयोग 
पुलिस को गश्ती के लिए मिलने वाले साइकिल में सभी सुविधाएं थीं, ताकि रात में उनको परेशानी न हो। साइकिल में डंडा रखने के लिए जगह बनाई गई थी। उसमें सायरन और टॉर्च भी था। पुलिस को फ्लोरोसेंट जैकेट और सीटी मिली थी। फ्लोरोसेंट जैकेट पहनने के बाद रात में दूर से ही पुलिसकर्मियों को देखा जा सकता था। कई साइकिल में लगा सायरन और टॉर्च गायब हो गया है तो कई में उपयोग नहीं होने से खराबी आ गई है। साइकिल पर आगे और पीछे पटना पुलिस का प्लेट लगा था, लेकिन आज अधिकतर साइकिल पर वह भी गायब है।  

 

... ताकि फिट रहें पुलिसकर्मी
साइकिल से गश्ती का मुख्य उद्देश्य पुलिसकर्मियों का फिट रखना था। अधिकतर थानों में पुलिसकर्मी की उम्र 48 साल से अधिक है। उनकी तोंद निकली हुई है। घुटना व कमर में दर्द रहता है। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर की शिकायत आम है। साइकिल चलाने से इनका स्वास्थ्य बेहतर रहता।

 

साइकिल पुलिसकर्मियों को थाना क्षेत्र में पड़ने वाले गलियों में गश्त के लिए दिया गया है। ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है कि साइकिल का उपयोग नहीं हो रहा है। गश्ती की यदि कोई शिकायत मिलती भी है तो संबंधित थानों से संपर्क कर विस्तृत रिपोर्ट ली जाती है। -मनु महाराज, एसएसपी

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