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जेडी वीमेंस कॉलेज में छात्राओं के बुर्का पहनकर आने पर लगी पाबंदी हटी, विरोध के बाद 24 घंटे में फैसला बदला

9 महीने पहले
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कॉलेज प्रशासन द्वारा पहले जारी किया गया नोटिस।
  • नए नियमों के मुताबिक, कॉलेज प्रशासन ने ड्रेस कोड तय किया था, इसमें छात्राओं के बुर्का पहनने पर प्रतिबंध लगाया गया था
  • छात्राओं को सोमवार से शुक्रवार ड्रेस कोड फॉलो करना था, शनिवार को अलग ड्रेस पहनने की छूट थी, मगर बुर्का पहनना तब भी मना था

पटना. बिहार के पटना स्थित जेडी वीमेंस कॉलेज में छात्राओं के बुर्का पहनकर आने पर पाबंदी लगा दी थी। बवाल मचने के बाद 24 घंटे में ही कॉलेज प्रशासन ने अपने आदेश को वापस ले लिया। शनिवार को प्राचार्या श्यामा राय ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा- कॉलेज ने ड्रेस कोड संबंधी उस आदेश को वापस ले लिया है, जिसमें छात्राओं के बुर्का पहनकर आने पर पाबंदी लगाई गई थी।


इससे पहले, कॉलेज प्रशासन ने ड्रेस कोड को लेकर नए नियम लागू किए थे। इसके मुताबिक, सभी छात्राओं को तय ड्रेस में ही कॉलेज आना था। केवल शनिवार को ही छात्राओं को अलग ड्रेस पहनने की अनुमति थी। हालांकि, इस दिन भी वे बुर्का नहीं पहन सकती थीं। इन नियमों के उल्लंघन पर 250 रुपए के जुर्माने का प्रावधान रखा गया था। 


कॉलेज के नए नियमों पर छात्राओं ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि बुर्के से कॉलेज को क्या दिक्कत हो सकती है। ये नियम थोपने वाली बात है। वहीं, प्राचार्या डॉ. श्यामा राय का कहना था कि हमने ये नियम छात्राओं में एकरूपता लाने के लिए बनाया था। शनिवार को छात्राएं अन्य ड्रेस पहन सकती थीं जबकि शुक्रवार तक उन्हें ड्रेस कोड में आना था।

लड़कियां बुर्का पहनकर पढ़ने जाएं, यह इस्लाम में नहीं: डीजी
वर्ल्ड इंस्टीट्यूट ऑफ इस्लामिक स्टडीज फॉर डायलॉग की डीजी डॉ. जीनत शौकत अली कहती हैं कि बुर्का शब्द कहीं पर भी कुरान में नहीं आया है। कॉलेज अगर किसी के विशेष पहनावे पर रोक लगाता है तो यह व्यक्ति के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो सकता है। इस्लाम में कहीं नहीं कहा गया है कि बच्चियां बुर्का पहनकर पढ़ने जाएं। बस महिलाओं को सम्मानजनक तरीके से कपड़े पहनने को कहा गया है। छोटी-छोटी बातों को तूल देने के बजाए बच्चियों को पढ़ाने पर जोर देना चाहिए।

कॉलेज में ड्रेस कोड का पालन करना चाहिए: वकील
पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रभाकर टेकरीवाल का कहना है कि अगर कॉलेज में ड्रेस कोड तय है, तो उसका पालन जरूरी है। वकील तक कोर्ट के लिए तय ड्रेस कोड का पालन करते हैं। कोर्ट में कोई बुर्का पहन कर नहीं आता। लिहाजा, कॉलेज के मामले में भी आपत्ति का औचित्य नहीं है। कानूनन भी इसे अवैध नहीं ठहराया जा सकता।

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