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जनसुनवाई / राज्य में 5139 मेगावाट बिजली की खपत, 19333 मेगावाट खरीदने का कर लिया एग्रीमेंट, इसके ट्रांसमिशन का बोझ उपभाेक्ता क्यों झेले

जनसुनवाई में पक्ष सुनते आयोग के अध्यक्ष और सदस्य। जनसुनवाई में पक्ष सुनते आयोग के अध्यक्ष और सदस्य।
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जनसुनवाई में पक्ष सुनते आयोग के अध्यक्ष और सदस्य।जनसुनवाई में पक्ष सुनते आयोग के अध्यक्ष और सदस्य।

  • बीआईए ने उठाया सवाल- यूपी में 18 पैसा ताे बिहार में 2 रुपए प्रति यूनिट ट्रांसमिशन शुल्क क्यों
  • आयाेग के अध्यक्ष ने पूछा- क्या आने वाली पीढ़ी काे सस्ती बिजली उपलब्ध कराएंगी कंपनियां

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2020, 06:03 AM IST

पटना. राज्य में 1 अप्रैल से बिजली की दर बढ़ेगी या घटेगी, यह पांच कंपनियों के खर्च और आमदनी पर निर्भर है। गुरुवार को बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी, स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर और बिहार ग्रिड कंपनी के प्रस्ताव पर जनसुनवाई की। इस दौरान बीआर्इए के उपाध्यक्ष संजय भरतिया ने सवाल उठाया कि उत्तरप्रदेश में 18 पैसा प्रति यूनिट ट्रांसमिशन शुल्क है, तो बिहार में 2 रुपए प्रति यूनिट क्याें? उन्हाेंने कहा कि इसका कारण यह है कि आपने बगैर प्लानिंग 20 हजार मेगावाट का इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित कर दिया है। इसके हिसाब से डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों ने 19,333 मेगावाट बिजली खरीदने का एग्रीमेंट कर लिया है। जबकि, राज्य की पीक आवर डिमांड 5139 मेगावाट अाैर एवरेज डिमांड 3212 मेगावाट है। ऐसी स्थिति में 20 हजार मेगावाट बिजली सप्लाई देने पर आने वाले ट्रांसमिशन चार्ज का बोझ 5139 मेगावाट बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है। 

इसपर आयोग के अध्यक्ष एसके नेगी ने कहा-क्या आने वाली पीढ़ी को सस्ती दर पर बिजली कंपनियां उपलब्ध कराएंगी? उनकी टिप्पणी के बाद ट्रांसमिशन कंपनी के प्रस्ताव के बचाव में परामर्शी तकनीकी भास्कर शर्मा और परियोजना निदेशक हरेराम पांडेय ने कहा कि भविष्य में होने वाली बिजली की खपत, क्वालिटी बिजली, निर्बाध बिजली और पीक लोड की डिमांड को ध्यान में रखकर इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया गया है।

आयोग से 3 फीसदी लॉस मानकर प्रस्ताव पर विचार का अनुरोध

तीन घंटे की बहस के बाद ट्रांसमिशन कंपनी के भास्कर शर्मा ने आयोग से 3 फीसदी लॉस मानकर प्रस्ताव पर विचार करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि हमारा लॉस 2 से 2.5 फीसदी हो चुका है। इसका आकलन हमलोग लगातार कर रहे हैं। जबकि, प्रस्ताव में ट्रांसमिशन कंपनी ने 3.92 फीसदी लॉस होने का जिक्र किया है। मौके पर आयोग के सदस्य आरके चौधरी, राजीव अमित, सचिव रामेश्वर प्रसाद दास, परामर्शी लक्ष्मण भगत, बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व उपाध्यक्ष सुभाष पटवारी, बिहार स्टील मैन्युफेक्चर एसोसिएशन केबी शर्राफ, बीजीसीएल, बीएसपीटीसीएल, एसबीपीडीसीएल, एनबीपीडीसीएल, एलएलडीसी के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

कंपनी से पूछा-पैसा क्यों ले रही बीजीसीएल 
आयोग के सदस्य राजीव अमित ने बिहार ग्रिड कंपनी से पूछा-आप किस नियम के तहत साउथ और नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी से पैसा ले रहे हैं? इस पर कंपनी के अधिकारियों ने कहा कि मौखिक आदेश पर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों से हमें राशि मिल रही है। इससे पहले बीआईए के उपाध्यक्ष संजय भरतिया ने कहा कि बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी के कांट्रेक्टर के रूप में बिहार ग्रिड कंपनी काम कर रही है। इसका अपना ग्रिड नहीं है। कंपनी ने लॉस का जिक्र भी नहीं किया है। जबकि, ट्रांसमिशन कंपनी ने बताया है कि हमारे पास 142 ग्रिड उपकेंद्र और 20450 ट्रांसफॉर्मर है।

डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी को लगाई फटकार
आयोग के अध्यक्ष और दोनों सदस्यों ने ट्रांसमिशन कंपनियों के प्रस्ताव पर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों द्वारा पक्ष नहीं रखे जाने पर नाराजगी जताते हुए फटकार लगाई। आयोग ने कहा कि ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा दिए जाने वाले प्रस्ताव से डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों का प्रस्ताव प्रभावित होता है। इस पर ट्रांसमिशन कंपनियों काे अपना पक्ष रखना चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि ट्रांसमिशन कंपनियों के प्रस्‍ताव पर कुछ बोलना नहीं है। इस दौरान ट्रांसमिशन कंपनियों का लोन का ब्याज नहीं चुकाने, इनकम टैक्स देने, कर्मियों की संख्या में बढ़ोतरी करने आदि खर्च पर एक-एक कर जिक्र किया गया।

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