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पटना. बाढ़ से बचाव के लिए राज्य सरकार ने सारे संवेदनशील स्थलों को दुरुस्त करने का फैसला किया है। इसी के तहत जल संसाधन विभाग ने 120 संवेदनशीन स्थानों की पहचान कर उनकी मरम्मत पर काम शुरु किया है। विभाग ने इसके लिए 606 करोड़ की मंजूरी दी है। इसमें तटबंधों को सुदृढ़ बनाने, उन्हें ऊंचा करने और पिछले साल हुए कटाव को दुरुस्त करना है। इसके अलावा तटबंधों में रिसाव पर भी नजर रखा है।
जल संसाधन विभाग ने पिछले वर्ष के बाढ़ को देखते हुए ही इस साल संवेदनशील स्थानों की पहचान की है। गत वर्ष नदियों ने इस स्थानों पर खूब तबाही मचायी थी। कई स्थानों पर तटबंध में कटाव हुआ था। इन्हीं को ध्यान में रखकर इस साल की योजना को मंजूरी दी गयी है। इसमें नेपाल प्रक्षेत्र में भी कोसी और गंटक नदी पर कराए जाने वाले 21 योजनाएं भी शामिल की गयी है। विभाग ने अन्य संवेदनशील स्थलों की पहचान की जिम्मेवारी संबंधित इंजीनियरों को सौंपी है। इन स्थानों को 15 मई तक दुरुस्त कर लेना है।
इन योजनाओं के साथ ही विभाग ने तटबंधों के मेन्टेनेंस के लिए अलग से कार्ययोजना बनायी है। इसके लिए 202.6 करोड़ स्वीकृत किये गये हैं। इसमें बाढ़ संघर्षात्मक कार्य, सामग्री का भंडारण, स्लूईस गेटों की मरम्मत शामिल करना है। इस साल विभाग तटबंधों की निगरानी में होमगार्ड के साथ-साथ दैनिक मजदूरों की भी मदद लेगा। इस क्रम में कटाव निरोधक कार्यों का पर्यवेक्षण के लिए विशेष जांच दल बनाए जाएंगे।
‘बाढ़ के पूर्व सारे संवेदनशील स्थलों को दुरुस्त कर लिया जाएगा। हमारा प्रयास होगा कि बाढ़ के दौरान कहीं इन स्थलों पर तटबंधों में रिसाव न हो। बाढ़ अवधि में भी इंजीनियर इन स्थानों पर सतर्क रहेंगे। तटबंधों की 24 घंटे मानिटरिंग होगी।’
- संजय कुमार झा, जल संसाधन मंत्री
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