65 साल तक बिहार ने क्रिकेट में नाम कमाया, दो दशक से यहां न खेल न खिलाड़ी, हुई सिर्फ राजनीति

4 वर्ष पहले
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पटना. बिहार में क्रिकेट  पिछले 18 वर्षों से ऐसे-एेसे झंझटों में फंसा रहा कि पूरी क्रिकेट की पौध ही सूख गई। असली-नकली, क्रिकेट संघ के नाम पर खूब पॉलिटिकल ड्रामा हुआ। टुकदुम-टुकदुम खेल तो चलता रहा लेकिन खिलाड़ी दूसरे राज्यों की पनाह में चले गये। झारखंड पसंदीदा ठिकाना बना। कॅरियर की तलाश में सौरभ तिवारी, ईशान किशन जैसे खिलाड़ी, हैं तो बिहारी लेकिन खेलते हैं झारखंड से। अब उम्मीद जगी है लेकिन हालात ऐसे हैं कि मामला पूरी तरह पटरी पर आने में,आधारभूत संरचना सुधरने से लेकर खिलाड़ियों की प्रतिभा निखरने में अभी वक्त लगेगा। वैसे, 4 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संभावना है क्योंकि बिहार की टीम को रणजी ट्रॉफी खेलने की अनुमति मिल गई है।
 
क्यों पैदा हुए ऐसे हालात?:  राज्य विभाजन के साथ क्रिकेट संघ भी बंटा। झारखंड क्रिकेट एसोसिएशन (जेसीए) और बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए)। दोनों का अलग-अलग चुनाव जमशेदपुर में हुआ। लालू प्रसाद अध्यक्ष चुने गए। 2003 में ही छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड को बीसीसीआई से मान्यता मिली। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश-जिनसे विभाजित होकर उत्तराखंड और झारखंड बने थे की पूर्ण सदस्यता कायम रही लेकिन 1935 में गठित बिहार क्रिकेट बोर्ड का मामला अटक गया।
  • तब वर्ल्डकप मैच हुए अब 18 साल से रणजी भी नहीं खेला
 
जेसीए बन गया बीसीए: बीसीए के संविधान में एक प्रावधान था कि बिहार क्रिकेट संघ का नाम दो-तिहाई बहुमत से बदला जा सकता है। 2001 में जब झारखंड और बिहार क्रिकेट संघों का बंटवारा हुआ तब इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। 15 अगस्त 2003 को झारखंड क्रिकेट एसोसिएशन ने एजीएम बुलाई और दो-तिहाई बहुमत से बीसीए का नाम बदलकर जेसीए करने का प्रस्ताव पारित कर दिया और बीसीए की जगह जेसीए को बीसीसीआई की पूर्ण सदस्यता मिल गई। बीसीए ने मामले को अदालत में चुनौती दी। इसी बीच कीर्ति झा आजाद की एसोसिएशन ऑफ बिहार क्रिकेट (एबीसी) और आदित्य वर्मा की क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार (सीएबी) भी अस्तित्व में आई। सभी ने बीसीसीआई के समक्ष दावेदारी पेश की। 
 
लालू गए तो सिद्दीकी आए: 2010 में लालू प्रसाद बीसीए के अध्यक्ष पद से हटा दिए गए। भारी विवाद हुआ। मुकदमा हुआ जो हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गया। 2015 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य के क्रिकेट संघों में तालमेल हुआ और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही जस्टिस धर्मपाल सिन्हा (अब स्वर्गीय) की निगरानी में चुनाव हुआ। अब्दुल बारी सिद्दीकी (अध्यक्ष), रविशंकर प्रसाद सिंह (सचिव) और पांच उपाध्यक्ष- नवीन जमुआर, गोपाल वोहरा, सुनील सिंह, आनंद कुमार और मो. मुमताजुद्दीन चुने गए।  एलपी वर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष और रामकुमार कोषाध्यक्ष बने। 
 
2008 में बीसीए को मिली मेंबरी: बीसीसीआई क्रिकेट संघों को तीन प्रकार की-एफिलिएट, एसोसिएट और पूर्ण सदस्यता देता है। 2008 में बीसीसीआई ने बीसीए को एसोसिएट मेंबर की मान्यता दी।  बिहार- नागालैण्ड, मणीपुर, शिलांग, अरुणाचल, मेघालय और छत्तीसगढ़ के साथ इस क्लब में जुड़ा। एसोसिएट सदस्य की मान्यता मिलने के बाद बीसीसीआई की ओर से बीसीए को 50 लाख रुपए और 1 करोड़ के इक्विपमेंट आदि भी मिले। 1935 से नवंबर 2000 तक बिहार लगातार रणजी खेलता रहा। इसके बाद से बिहार किसी भी रणजी टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सका है। वहीं बिहार में पहला अर्तरराष्ट्रीय मैच 1993 में श्रीलंका और जिम्बाब्वे के बीच हुआ और दूसरा मैच केन्या और जिम्बाब्वे की बीच 1996 में खेला गया।
 
6 टूर्नामेंट कराता है बीसीए: श्यामल सिन्हा, अंडर 16 टूर्नामेंट, रणधीर वर्मा, अंडर 19 टूर्नामेंट, हेमन ट्रॉफी (ए, बी) सीनियर्स, अंडर 14 ब्वॉज जोनल मैच, अंडर 19 वीमेन्स टूर्नामेंट, सीनियर्स जोनल मैच
 
लोढ़ा कमेटी रिपोर्ट से फिर झटका: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनी जस्टिस आरएम लोढ़ा कमेटी की अनुशंसा के आलोक में बीसीए के कई निर्वाचित सदस्यों की छुट्‌टी हो गई। कमेटी की अनुशंसाओं को जब क्रिकेट संघों ने नहीं माना तो 3 जनवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने ही उन्हें हटा दिया। मंत्री होने पर अध्यक्ष अब्दुल बारी सिद्दीकी, 70 वर्ष के कार्यकारी अध्यक्ष एलपी वर्मा, प्रो-वीसी उपाध्यक्ष मो. मुमताजुद्दीन और एसबीआई का ब्रांच मैनेजर कोषाध्यक्ष रामकुमार को पद छोड़ना पड़ा। यानी नौ में से बीसीए के पांच सदस्य ही बचे। 22 जनवरी 2017 को बीसीसीआई की सहमति से वरीय उपाध्यक्ष गोपाल वोहरा बीसीए के अध्यक्ष, रविशंकर प्रसाद सिंह सचिव, नवीन जमुआर उपाध्यक्ष, सुनील कुमार सिंह संयुक्त सचिव और आनंद कुमार कोषाध्यक्ष बने। 
 
16 साल बाद बिहार को फिर मिला मौका : बीसीसीआई का सेट-अप बदलने के बाद क्रिकेट सीजन 2017-18 में बिहार को पहली बार अंडर-23 ब्वॉयज, अंडर-19-गर्ल्स और अंडर-16 ब्वॉयज का टूर्नामेंट खेलने का मौका मिला। इस टूर्नामेंट में बिहार अपने जोन (नार्थ-ईस्ट व बिहार) में अंडर-23 ब्वॉयज में रनर और अंडर-16 ब्वॉयज व अंडर-19 गर्ल्स में विनर रहा। इन मैचों से खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ा है।
 
अब जगी रणजी खेलने की उम्मीद: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 20 अप्रैल को सौरभ गांगुली की अध्यक्षता में हुई बैठक में बिहार को रणजी की अनुमति भी मिल गई है। कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स के संभावित फिक्सचर से उम्मीद है कि सितंबर में बिहार रणजी खेलेगा। बीसीए सचिव रविशंकर प्रसाद ने बताया कि मोइनुल हक स्टेडियम में  25-25 के चार ग्रुप की ट्रेनिंग चल रही है। इनका चयन घरेलू टूर्नामेंट के प्रदर्शन पर किया गया है।

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