बजट सत्र / विधानसभा के बाहर राजद विधायकों का हंगामा, सीएम नीतीश से मांगा इस्तीफा

Dainik Bhaskar

Feb 12, 2019, 01:19 PM IST


तेजप्रताप ने सदन के बाहर पोस्टर-बैनर के साथ प्रदर्शन किया। तेजप्रताप ने सदन के बाहर पोस्टर-बैनर के साथ प्रदर्शन किया।
सदन के बाहर प्रदर्शन करती राबड़ी देवी, प्रेमचंद मिश्रा और अन्य विधायक। सदन के बाहर प्रदर्शन करती राबड़ी देवी, प्रेमचंद मिश्रा और अन्य विधायक।
राजद विधायकों ने सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन। राजद विधायकों ने सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन।
bihar news budget 2019 RJD mla ruckus outside assembly asked cm nitish resignation
वामंथी विधायकों ने रसोइयों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की। वामंथी विधायकों ने रसोइयों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की।
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तेजप्रताप ने सदन के बाहर पोस्टर-बैनर के साथ प्रदर्शन किया।तेजप्रताप ने सदन के बाहर पोस्टर-बैनर के साथ प्रदर्शन किया।
सदन के बाहर प्रदर्शन करती राबड़ी देवी, प्रेमचंद मिश्रा और अन्य विधायक।सदन के बाहर प्रदर्शन करती राबड़ी देवी, प्रेमचंद मिश्रा और अन्य विधायक।
राजद विधायकों ने सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन।राजद विधायकों ने सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन।
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वामंथी विधायकों ने रसोइयों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की।वामंथी विधायकों ने रसोइयों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की।
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  • तेजप्रताप का सरकार पर आरोप-देश में धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश

पटना. बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के दूसरे दिन राजद और वामपंथी विधायकों ने सदन के बाहर जमकर हंगामा किया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार सूबे में अपराध पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है। हर रोज हत्या और लूट की वारदात हो रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इसकी जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए।

 

तेजप्रताप ने कहा-धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रही सरकार
राजद नेता तेज प्रताप यादव भी बजट सत्र में हिस्सा लेने पहुंचे। उन्होंने कहा कि हर रोज धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश हो रही है। सरकार धर्म को मुद्दा बनाने की पुरजोर कोशिश कर रही है, लेकिन इस बार फासीवादी ताकतें कमजोर पड़ जाएगी। तेजप्रताप ने कहा कि बिहार में अपराध बेलगाम है और सरकार लाचार है। सीएम मुंह मियां मिट्ठु बन रही है और बेशर्मी का ढिंढोरा पीट रही है। 

 

रसोइयों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग
वामपंथी विधायकों ने सरकार से रसोइयों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा और 18 हजार रुपए मानदेय देने की मांग की है। सीपीआई का कहना है कि सरकार न्यूनतम मजदूरी कानून का उल्लंघन करना बंद करे। सरकार रसोइयों का हड़ताल जल्द खत्म कराए। वामपंथी विधायकों ने सरकार से सवाल किया कि रसोइयों को 12 महीने की बजाय सिर्फ 10 महीने का मानदेय क्यों दिया जा रहा है?

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