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पटना. उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि लालू प्रसाद ने अपने काले कारोबार के हमराज प्रेमचंद गुप्ता को छठी बार बिहार से राज्यसभा में भेजा है, जबकि वे हरियाणा के रहने वाले हैं और उनका बिहार और यहां के लोगों से कभी कोई सीधा संबंध नहीं रहा है। राजद के दूसरे उम्मीदवार ए. डी. सिंह भी राजद के राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं बल्कि 2.38 अरब की संपत्ति वाले धनकुबेर हैं। एम-वाई समीकरण से कायांतरित हो कर ए टू जेड का दावा करने वाली पार्टी का सवर्ण रघुवंश बाबू या कोई समर्पित राजनीतिक कार्यकर्ता को नहीं, बल्कि प्रेमचंद गुप्ता और ए. डी. सिंह जैसे धनकुबेर को टिकट देने का आखिर राज क्या है?
मोदी ने कहा कि रेलवे के रांची व पुरी के दो होटल कोचर बंधुओं को लीज पर देने के एवज में प्रेमचंद गुप्ता की पत्नी सरला गुप्ता की कम्पनी ‘डिलाइट मार्केटिंग प्रा. लि. के नाम 3.5 एकड़ जमीन लिखवाने और बाद में पूरी कम्पनी हथिया कर पटना के सगुना मोड़ स्थित उसी जमीन पर तेजस्वी यादव का 750 करोड़ की लागत से 7.66 लाख वर्ग फीट में बनने वाले बिहार के सबसे बड़ा 12 मंजिले मॉल के भ्रष्टाचार के मामले में तेजस्वी के साथ प्रेमचंद गुप्ता पर भी चार्जशीट दाखिल हो चुका है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि लालू प्रसाद ने विधायक, पार्षद, सांसद और मंत्री बनाने के एवज में जहां रघुनाथ झा, कांति सिंह जैसे अनेक नेताओं से जमीन-मकान दान में लिखवा लिया, बीपीएल श्रेणी के ललन चौधरी, रेलवे के खलासी हृदयानंद चौधरी व भूमिहीन प्रभुनाथ यादव, चंद्रकांता देवी, सुभाष चौधरी तक से नौकरी, ठेका या अन्य लाभ पहुंचाने के बदले कीमती जमीन-मकान दान के जरिए हासिल कर लिया, वे राज्यसभा में भेजने की क्या कीमत वसूले होंगे, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
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