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सभी पार्टियों के साइड इफेक्ट्स; भाजपा से भड़के कायस्थ, राजद से शरद कैंप और कांग्रेस में नाराजगी

एक वर्ष पहले
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नामांकन दाखिल करने के दौरान राजद नेता प्रेमचंद गुप्ता और एडी सिंह। - Dainik Bhaskar
नामांकन दाखिल करने के दौरान राजद नेता प्रेमचंद गुप्ता और एडी सिंह।
  • आरके सिन्हा या उनके पुत्र ऋतुराज को टिकट नहीं मिलने से नाराज अखिल भारतीय कायस्थ महासभा भाजपा पर भड़क गई
  • शरद यादव का कैंप राजद से नाराज हुआ, सभी सीटों पर विधानसभा चुनाव लड़ने की बात कही

पटना. राज्यसभा की उम्मीदवारी से कमोबेश सभी पार्टियों के साइड इफेक्ट्स सामने आए। आरके सिन्हा या उनके पुत्र ऋतुराज को टिकट नहीं मिलने से नाराज अखिल भारतीय कायस्थ महासभा भाजपा पर भड़क गई; भाजपा को कायस्थ विरोधी बताया। शरद यादव का कैंप राजद से नाराज हुआ, सभी सीटों पर विधानसभा चुनाव लड़ने की बात कही। बेचारी कांग्रेस कसमसा कर रह गई। उसे राजद से एक सीट नहीं मिलने का बहुत मलाल है। लेकिन कुछ बोल नहीं पा रही।  

कायस्थ महासंसद तय करेगा भाजपा के खिलाफ आगे के लिए चुनावी लाइन
अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के अध्यक्ष रविनंदन सहाय ने कहा कि ‘आर.के.सिन्हा या उनके बेटे ऋतुराज को टिकट नहीं देकर भाजपा ने अपने कायस्थ विरोधी राजनीति व चेहरे को उजागर कर दिया है। यह कायस्थ समाज की अस्मिता पर हमला है। कायस्थों में गहरा रोष है। भाजपा ने अत्यंत निंदनीय काम किया; सबका साथ- सबका विकास-सबका विश्वास पर खुद प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया। आरके सिन्हा ने भाजपा की नींव मजबूत की है। भाजपा ने कायस्थ समाज को हमेशा दोयम दर्जे का माना, इसे राजनीति में हाशिए पर भेजने का काम किया। जल्द कायस्थ महासंसद होगी। इसमें भाजपा की कायस्थ विरोधी नीति पर चिंतन करते हुए विधानसभा चुनाव के लिए लाइन-रणनीति तय होगी।’ वह गुरुवार को संवाददाताओं से बात कर रहे थे। इस दौरान डॉ. निर्मल कुमार श्रीवास्तव, सुजीत कुमार वर्मा, कुमार अनुपम, सुदामा सिन्हा, शालिनी सिन्हा, अमिताभ, मनोज कुमार मनोज आदि मौजूद रहे। सूरज सिन्हा ने कहा कि आज कायस्थ समाज खुद को ठगा हुआ और अपमानित महसूस कर रहा है। हम एकजुट होकर भाजपा को करारा जवाब देंगे। 

तेजस्वी बोले-पुरानी बातों को भूलकर साथ आएं, नया बिहार बनाना है
तेजस्वी यादव ने कहा कि साथ चलेंगे, साथ बढ़ेंगे, मिलकर नया बिहार गढ़ेंगे। जाति धर्म से उपर उठकर हम सबों को मिलकर नए दौर में नया बिहार बनाना है। राजद ए टू जेड समीकरण वाली पार्टी है। हम सभी तबको को साथ लेकर चलने में भरोसा करते हैं। यही कारण है कि राजद सभी जातियों को प्रतिनिधित्व दे रही है। इसके पहले वाले राज्यसभा चुनाव में मैथिल ब्राह्मण मनोज झा और अब भूमिहार जाति के नेता को राज्यसभा भेजकर पार्टी संदेश भी दे रही है। राजद सभी जातियों को साथ लेकर चलने में विश्वास करता है। सीटों के बंटवारे पर लालू प्रसाद और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में बात हो चुकी है, इसलिए कहीं कोई परेशानी वाली बात नहीं है। दोनों नेताओं का निर्विरोध निर्वाचन होगा। कांग्रेस के साथ राज्यसभा की सीट को लेकर कहीं कोई टकराव की स्थिति नहीं है। कांग्रेस समेत महागठबंधन में टूट की आशंकाओं को निराधार बताते हुए तेजस्वी ने कहा कि दावा करने वालों को परेड करानी चाहिए।

बोला शरद कैंप- लालू प्रसाद ने धोखा दिया
लोकतांत्रिक जनता दल के संरक्षक शरद यादव को टिकट मिलने का पूरा भरोसा था। नहीं मिला, तो उनके लोग नाराज हो गए। शरद की पार्टी के प्रदेश (बिहार) उपाध्यक्ष बीनू यादव ने कहा कि हम विधानसभा की सभी सीटों पर लड़ेंगे। लालू प्रसाद ने शरद यादव जैसे बड़े नेता के साथ धोखेबाजी की, जबकि शरद ने हर स्तर पर लालू प्रसाद का साथ दिया। नीतीश कुमार के फैसले से अलग जाते हुए लालू प्रसाद का साथ दिया, लेकिन लालू उन्हें केवल झूठा आश्वासन देते रहे। असल में वह रुपये को ही तरजीह देते हैं। हमलोग ये सारी बातें जनता को बताएंगे; जनता की अदालत में लालू प्रसाद को एक्सपोज करेंगे।

कांग्रेसी चाहकर भी कुछ नहीं बोल पा रहे
कांग्रेसियों को पूरा भरोसा था कि राजद उसे एक सीट जरूर देगी। ऐसा नहीं हुआ। कांग्रेसी उबले हुए हैं। लेकिन इसलिए चुप हैं कि इस मसले पर उनके आलाकमान का राजद नेतृत्व से बात हुई और इसके बाद ही राजद ने दोनों सीटें अपने पास रख लीं। दबी जुबान से कांग्रेसी यह कहने से नहीं चूक रहे कि बीते लोकसभा चुनाव में राजद ने कांग्रेस को राज्यसभा की एक सीट देने का वायदा किया था। इसके वास्ते कुछ दिन पहले कांग्रेस के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल की एक चिट्‌ठी भी खुलेआम हुई। इसमें राजद को उसका यह वायदा याद कराया गया था। हालांकि, राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद ने इस चिट्‌ठी को फर्जी बताया।

दो सीटों पर राजद की जीत तय 
बिहार से राज्यसभा में 16 सीटें हैं। इनमें जदयू के 6, भाजपा के 4, राजद के 3 जबकि लोजपा और कांग्रेस के 1-1 सदस्य हैं। एक सीट खाली है। राज्यसभा की एक सीट के लिए 41 विधायकों के समर्थन की दरकार है। रिक्त होने वाली पांच सीटों में दो-दो जदयू व राजद को जबकि एक सीट पर भाजपा की जीत तय है। 
 

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