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निर्भया के दोषियों को फांसी तक पहुंचाने वाली वकील सीमा ने कहा- देशभर में पोर्न साइट्स पर लगे रोक लगना चाहिए

2 वर्ष पहले
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निर्भया की मां-पिता के साथ सीमा। - Dainik Bhaskar
निर्भया की मां-पिता के साथ सीमा।
  • सीमा ने कहा कि आज नाबालिग लड़कों के हाथों में भी मोबाइल है, कई बार इसका गलत इस्तेमाल होता है
  • सीमा ने कहा हमारा सिस्टम महिलाओं की सुरक्षा पर निष्क्रिय है, न्यायपालिका भी इससे अछूती नहीं है

शशि सागर,पटना. 7 साल 3 महीने की लंबी लड़ाई के बाद निर्भया के चारों गुनहगाराें को फांसी दे दी गई। अपराधियों को फांसी के तख्ते तक पहुंचाने के लिए वकील सीमा समृद्धि कुशवाहा ने दिन-रात एक कर दिया। सीमा मूल रूप से यूपी के इटावा की रहने वाली हैं। लेकिन यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि सीमा बिहार की बहू हैं। सीमा के पति राकेश मुंगेर के संग्रामपुर प्रखंड के पौरिया गांव के रहने वाले हैं। दिल्ली में आईआईटी की तैयारी कराने वाली संस्था में गणित के अध्यापक हैं। सीमा ने कहा कि बहुत मुश्किल थी यह लड़ाई। कई बार मेरी आंखें नम हुई। केस लड़ने के दौरान कई बार बीमार हुई। लेकिन हर वक्त पति राकेश मेरे साथ रहे। हमेशा हौसला बढ़ाया और भरोसा दिया कि जीत सत्य की होगी। 
 

निर्भया का केस फ्री में लड़ीं, यह उनका पहला केस था
कानपुर से एलएलबी और इलाहाबाद से पत्रकारिता की पढ़ाई के बाद सीमा यूपीएससी की तैयारी करने दिल्ली आ गई थीं। 2011 में यूपीएससी के सिलेबस में कुछ बदलाव आया। सीमा मेंस तक पहुंची पर सफल नहीं हो पाईं। तभी 2012 में निर्भया की दरिंदगी का मामला सामने आया। निर्भया को इंसाफ दिलाने के लिए चल रहे धरना प्रदर्शन में सीमा शरीक होने लगीं। इसी दौरान वे निर्भया की माता आशा देवी और पिता बद्रीनाथ सिंह के करीब आईं और उनकी लड़ाई में हमसफर बन गईं। सीमा बताती हैं डिस्ट्रिक्ट कोर्ट और हाईकोर्ट होते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। एक साल से सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग पड़ा था। तभी निर्णय लिया कि वे सुप्रीम कोर्ट में इस केस को लड़ेंगी और निर्भया के माता पिता को न्याय दिलाएंगी। सीमा का यह पहला केस था और इस केस के लिए उन्होंने निर्भया के माता-पिता से कोई फीस नहीं ली।

पिता के निधन के बाद तंगी के बीच सीमा ने की पढ़ाई
सीमा ने गरीबी में दिन बिताए और पढ़ाई पूरी की। पिता का देहांत 2002 में ही हो गया था। परिजन बताते हैं कि सीमा की पढ़ाई अभावों के बीच हुई। शुरुआती शिक्षा के बाद उन्हाेंने इटावा के लखना स्थित स्कूल से इंटर किया फिर अजीतमल कालेज से पीजी किया। पैसे की तंगी के कारण प्रौढ़ शिक्षा विभाग में संविदा पर नौकरी भी की और बाद में दिल्ली चली गईं। 

इस लड़ाई में पूर्वी चंपारण के सर्वेश का भी मिला साथ
पूर्वी चंपारण के पहाड़पुर के समाजसेवी सर्वेश ने भी निर्भया के परिजनों का साथ दिया और साथ खड़े रहे। निर्भया के माता-पिता ने निर्भया ज्योति ट्रस्ट की स्थापना की। सीमा ट्रस्ट की लीगल एडवाइजर हैं। निर्भया की मां कहती हैं-सात साल पहले मैंने अपनी बेटी को खो दिया। लेकिन इस लड़ाई में कई लोग ऐसे मिले जो आज मेरे परिवार के हिस्सा हैं। सर्वेश मेरे भाई जैसे हैं।

सेक्स एजुकेशन जरूरी, इंटरनेट का मिसयूज न हो
सीमा ने कहा कि आज नाबालिग लड़कों के हाथों में भी मोबाइल है। कई बार इसका गलत इस्तेमाल होता है। देशभर में पोर्न साइट पर प्रतिबंध लगना चाहिए। साथ ही बच्चों के लिए सेक्स एजुकेशन अनिवार्य किया जाए। पैरेंट्स बच्चों के साथ फ्रेंडली रहें और हर हाथ में जो इंटरनेट है उसके गलत इस्तेमाल को रोकें। मालूम हो कि निर्भया मामले की जांच में यह बात आई थी कि दोषी पोर्न एडिक्ट थे। सीमा ने कहा हमारा सिस्टम महिलाओं की सुरक्षा पर निष्क्रिय है। न्यायपालिका भी इससे अछूती नहीं है। 

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