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टेरेस पर लगे हैं बोनसाई बरगद पीपल और एयर प्यूरिफायर पौधे

एक वर्ष पहले
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भागदौड़ भरी इस जिंदगी से अलग हटकर आज कल हर कोई थोड़े देर के लिए ही सही, लेकिन प्रकृति के बीच रहना चाहता है। वहां बैठकर कुछ देर क्वालिटी टाइम बिताना चाहता है। लेकिन, शहरवासियों के साथ यह दिक्कत है कि उनके पास पार्क के अलावा कोई और ज्यादा विकल्प ही नहीं बचता। ऐसे में आप अपने बोनसाई को ही ‘मिनी पार्क\\\' का लुक दे सकते हैं। इसपर आप वैसे पेड़ भी लगा सकते हैं, जो अधिक एरिया लेता हो। लेकिन, उसके लिए एक क्राइटेरिया है। आप उन पेड़ों को बोनसाई फॉर्म में ही लगा पाएंगे। बोनसाई का मतलब होता है ‘बौना\\\'। यानी आप अपने टेरेस पर बरगद, पीपल, पाकर, नीम, अशोक जैसे बड़े आकार वाले पेड़ का भी आनंद उठा सकते हैं। ये कहते हैं पटना के लोहानीपुर के रहने वाले 62 वर्षीय मनोरंजन सहाय और 79 वर्षीय डॉ. आर आर सहाय। दोनों पिछले 40 साल से टेरेस गार्डेनिंग कर रहे हैं। मनोरंजन के यहां बोनसाई फॉर्म में तीस साल पुराना बरगद, पीपल, पाकर और अशोक का पेड़ है। वहीं, डॉ. आर आर सहाय के यहां बिना बोनसाई फॉर्म वाले फल, फूल और सब्जी हैं। इसके अलावा दोनों के टेरेस पर कई एयर प्यूरिफायर और मेडिसिनल प्लांट्स भी हैं। मनोरंजन के पास बोनसाई केला भी है, खूब केला होता है। मनोरंजन ग्रामीण बैंक के सीनियर मैनेजर पद से रिटायर हुए हैं। वे पांच-छह साल के उम्र से ही गार्डेनिंग कर रहे हैं। वे कहते हैं, उन्हें यह शौक उनके पिताजी को देखकर जगा।

रात की रानी, चंपा, बेली की खुशबू से दिल हो जाता है खुश

यह होता है बोनसाई

वे बताते हैं, बोनसाई आर्ट में पेड़ को पौधे की तरह ही स्वरूप दिया जाता है। इसमें पौधे को पेड़ की तरह आकार में बढ़ने नहीं दिया जाता है। लेकिन, पौधे का विकास पेड़ की तरह ही किया जाता है। आसान शब्दों में इसे हम बौना या पेड़ का छोटा रूपांतरण भी कहते हैं। बोनसाई फॉर्म में वे अपने टेरेस पर ब्लैक बैंबू, गोल्डन बैंबू, ग्रीन बैंबू, नीम, साइकस आदि के पेड़ लगाए हुए हैं।

जेड प्लांट


उनके यहां जेड प्लांट भी है। इसे क्रासुला भी कहा जाता है। वे कहते हैं, इस पौधे को घर में लगाने से संपत्ति की बढ़ोतरी होती है। इसके अलावा उनके पास रोज के 10 वेरायटी हैं। इसमें ब्लैक रोज, पिंक रोज, रेड रोज, येलो रोज आदि शामिल है। उनके पास एडेनियम के भी पौधे हैं, जिसे समर रोज कहा जाता है। वहीं, उन्होंने गंगटोक से लाए रेन लिली और पीस लिली को भी अपने टेरेस पर लगाया है।

एयर प्यूरिफायर : मनोरंजन के टेरेस पर मेडिसिनल प्लांट्स में मिंट, आजवाइन, सदाबहार, गिलोय, जामून, सहजन आदि के पौधे हैं। एयर प्यूरिफायर में क्लोरोफाइटम, स्नेक प्लांट, पीस लिली, एरिका पाम आदि हैं। इन सब पौधों के बीच वे अपने टेरेस पर पक्षियों के पानी पानी के लिए बर्ड फीड भी लगाए हुए हैं।

ऑर्गेनिक फल-सब्जी का स्वाद ही और

आजकल हर कोई खाद्य-पदार्थ वाले फल-सब्जी से दूरी बनाना चाह रहा है। सभी को अब ऑर्गेनिक फल-सब्जी ही चाहिए। वे अपने टेरेस पर उगाए गए ऑर्गेनिक फल-सब्जी ही खाते हैं। कहते हैं, इसका टेस्ट अलग ही आता है।

फूल के खुशबू से दिल हो जाता है खुश : वे अपनी पूरी फैमिली के साथ शाम और रात के वक्त अपने टेरेस पर समय व्यतीत करते हैं। इस दौरान वहां लगाए गए कई प्रकार के फूल से ऐसी खुशबू आती है, जिससे सभी का दिल खुश हो जाता है। साथ ही उन्हें फ्रेश एयर भी मिलता है। इसमें वे चमेली, बेबी, रात की रानी, जूही, चंपा आदि फूल के पौधे लगाए हुए हैं।
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