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श्वास मार्ग बाधित होने से होती है खर्राटे लेने की बीमारी

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2018, 04:35 AM IST

Patna News - स्लीप एपनिया एक बीमारी है, जो सोते समय सांस रुकने के कारण होती है। यह बीमारी तब होती है, जब सोते समय सांस कुछ सेकेंड,...

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स्लीप एपनिया एक बीमारी है, जो सोते समय सांस रुकने के कारण होती है। यह बीमारी तब होती है, जब सोते समय सांस कुछ सेकेंड, कभी-कभी मिनट भर के लिए रुक जाती है। ऐसा एक घंटे में 30 या ज्यादा बार भी हो सकता है। स्लीप एपनिया का सबसे आम रूप प्रतिरोधक स्लीप एपनिया(ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया) है, जो नींद के दौरान श्वास मार्ग बंद होने के कारण होता है। इसमें सोने के कुछ देर बाद सामान्य सांसों में खर्राटे मारते हैं, हालांकि हर किसी को खर्राटे मारने की समस्या नहीं होती।

डॉ. सुनील कु.अग्रवाल

पीएमसीएच, पटना

स्लीप एपनिया का सबसे आम रूप प्रतिरोधक स्लीप एपनिया(ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया) है, जो नींद के दौरान श्वास मार्ग बंद से होता है


तीन तरह की होती है स्लीप एपनिया : सेंट्रल स्लीप एपनिया, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया, मिक्स्ड स्लीप एपनिया, लक्षण : तेज खर्राटे लेना प्रमुख पहचान है, नींद में कुछ समय के लिए सांसें रुक जाना, सांस में कमी के कारण नींद खुल जाना, सिर में दर्द महसूस होना।

इन्हें हो सकती है स्लीप एपनिया: सामान्य से ज्यादा वजन होना, पारिवारिक या वंशानुगत दोष, छोटा श्वास मार्ग, गर्दन की मोटाई 16-17 इंच से ज्यादा होना, टॉन्सिल या एडिनायड का बढ़ना।

इन कारणों से भी वायु मार्ग में रुकावट :
पोलीसोमनोग्राफी के जरिये होता है टेस्ट

संकेत एवं लक्षण के आधार पर स्लीप एपनिया का निदान किया जा सकता है। इसके अलावा नॉक्टूमल पोलीसोमनोग्राफी टेस्ट किया जाता है। इस टेस्ट में मरीज को सोने के दौरान एक उपकरण लगाया जाता है। यह उपकरण हृदय, मस्तिष्क, फेफड़े, हाथों, पैरों की गतिविधि, सांस के पैटर्न और खून में ऑक्सीजन के स्तर पर निगरानी रखता है।

स्लीप एपनिया से बचाव : अतिरिक्त वजन कम करना, व्यायाम, शराब एवं नींद की दवाइयों से परहेज, पीठ के बल सोने के बजाय एक तरफ मुंह करके सोएं, धूम्रपान छोड़ें

क्या है उपचार : स्लीप एपनिया में दंत उपकरण और माउथपीस, सीपीएपी (निरंतर सकारात्मक वायुमार्ग दबाव), दवाएं

सीपीएपी क्या है? : ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के किसी भी स्तर पर सबसे बेहतर नॉन सर्जिकल उपचार है। इस बीमारी में पहला और मुख्य लक्ष्य वायु मार्गों को खुला रखना होता है, ताकि नींद के दौरान ये बंद होकर एपनिया का कारण न बन जाए।

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