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गांव गांव

गांव गांव

Danik Bhaskar | Mar 07, 2018, 06:53 PM IST

पटना. गंगा किनारे के गांवों के साथ-साथ दनियावां से बिहारशरीफ के बीच के नेशनल हाईवे के किनारे पड़ने वाले गांवों को जैविक कोरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। यही नहीं यहां जैविक खेती होगा। शुरुआत जैविक सब्जी से होगी। बुधवार को विधानसभा में कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने यह जानकारी दी। वे कृषि विभाग के बजट पर सरकार का पक्ष रख रहे थे।

उन्होंने बताया कि इस साल यह योजना पटना, नालंदा, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, भागलपुर, लखीसराय, खगड़िया और मुंगेर में कार्यान्वित की जा रही है। अगले वर्ष गया, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर, बक्सर और भोजपुर जिलों को भी योजना में शामिल किया जाएगा।

कृषि मंत्री ने बताया कि सभी प्रखंडस्तर पर टेलीमेट्रिक वेदर स्टेशन और पंचायत स्तर पर वर्षा मापक यंत्र स्थापित किया जाएगा। इस वर्ष पायलट प्रोजेक्ट के रुप में पांच जिलों पूर्वी चंपारण, सुपौल, नालंदा, गया और अरवल जिले में इसे स्थापित किया जाएगा। अगले चरण में सभी जिलों में इसकी स्थापना की जाएगी। सभी पंचायतों में कृषि कार्यालय खोले जाएंगे, जहां नियमित रुप से कृषि समन्वयक व किसान सलाहकार किसानों को सभी आवश्यक जानकारी देंगे और उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे। अप्रैल के बाद खरीफस रबी और गरमा मौसम के पूर्व सभी पंचायतों में किसान चौपाल का आयोजन किया जाएगा।

मंत्री ने कहा कि चयनित गांवों में कृषि यंत्र बैंक और हाईटेक हब खुलेगा। किसानों में सामूहिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए पंचायतस्तर पर एक-एक फार्मर प्रोड्यूसर आर्गनाइजेशन (एफपीओ) कंपनी बनाया जाएगा। पहले चरण में 534 प्रखंडों में एक-एक एफपीओ की स्थापना की जा रहा है। किसान सामूहिक खेती करेंगे तो बाजार खुद उनतक आएगा और उनके उत्पाद को बढ़िया कीमत मिल सकेगी। किसानों की मिट्‌टी की जांच को सर्वोच्च प्रतामिकता दी गयी है। सभी प्रमंडलों में एक-एक चलंत मिट्‌टी जांच प्रयोगशाला स्थापित किया गया है।