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उसके परिजन

उसके परिजन

Vivek Kumar | Last Modified - Jan 12, 2018, 01:39 PM IST

उसके परिजन

पटना.1990 के दशक में भोजपुरी एलबम (खाइल तिरंगा गोरिया हो फाड़ के...) से फेमस हुए संगीतकार बिपिन बहार एक बार फिर चर्चा में हैं। अश्लील गानों के दम पर वह 19 साल की उम्र में ही फेमस हो गए थे। बाद में उन्होंने अपने गीत में द्विअर्थी शब्दों के इस्तेमाल पर रोक लगानी चाही, लेकिन भोजपुरी इंडस्ट्री के लोग और म्यूजिक कंपनियां इसके लिए तैयार न थी। वे बिपिन पर अश्लील गाने लिखने का दवाब डालते थे। इससे तंग आकर बिपिन ने सन्यास ले लिया। अब वह संत की लाइफ जी रहे हैं। कंपनियां वही चाहती थी जो लोग पसंद करे...

बिपिन ने पांच साल पहले अपना नाम बदल लिया है। अब वह संत श्री स्वर्गानंद जी महाराज के नाम से जाने जाते हैं। Dainikbhaskar.com से बातचीत में स्वर्गानंद ने बताया कि मैंने कई बेहतर गाने लिखे। मेरे भजन जगजीत सिंह और मनोज तिवारी ने गाए। यह सही बात है कि मैंने गुड्डू रंगीला के लिए द्विअर्थी गाना लिखा। कई गाने बहुत हिट हुए। उस दौरान देश की एक बड़ी म्यूजिक कंपनी का कॉल आता था कि बहुत बढ़िया गाना लिखा है। फेमस हो रहा है। लोग भी इसे पसंद कर रहे हैं। कई बार होता था कि गाने में द्विअर्थी शब्द नहीं लिखता था तो कंपनी से कॉल आता था। कैसा गाना लिख दिए कि हिट नहीं हुआ। लोग पसंद नहीं कर रहे हैं।

कई फिल्मों में भी कर चुके हैं काम
स्वर्गानंद ने बताया कि मैंने भोजपुरी की 4500 गाने लिखे हैं। 1990 के दौर में द्विअर्थी गाने खूब चले। इन गीतों के शब्दों के दो अर्थ होते थे। एक अच्छा तो दूसरा गलत होता था। मैं इन सब से अलग होने की सोचने लगा। गाने लिखना बंद करने लगा। इस दौरान मैंने प्रेम लगन, विवाह, मु्न्ना बेरोजगार और भोजपुरिया डॉन समेत कई फिल्में की।

पहले फैमिली को तैयार किया फिर लिया सन्यास
स्वर्गानंद ने बताया कि मेरा बचपन सीवान जिले के लेरूआ गांव में बीता। जैसे-तैसे 12वीं पास की। मुझे धर्म के प्रति लगाव था, जिसके कारण साधु संतों के साथ अधिक रहता था। फिर मैंने सन्यास लेने का फैसला किया। इसके लिए पत्नी को समझाया। वह तैयार नहीं थी। बाद में मान गई। मैंने परिवार चलाने के लिए इनकम का कुछ सोर्स तैयार किया, जिससे पत्नी और पांच बच्चों का गुजारा हो सके। मेरा फैसला पहले माता-पिता को ठीक नहीं लगा, बाद में वह भी तैयार हो गए। बड़ी बेटी आईआईटी की तैयारी करती है। वह ट्यूशन पढ़ाती है। इससे उसे 20 हजार रुपए मिलते हैं। वह खुद पढ़ाई का खर्च निकाल लेती है। पैसा बचता है तो वह मुझे भी गरीबों में कंबल बांटने के लिए देती है।

खुद था गाना लिखकर कन्फ्यूज
स्वर्गानंद ने बताया कि भोजपुरी सिंगर गुड्डू रंगीला के लिए किसी और को गाना लिखना था। उसने नहीं लिखा, जिसके चलते मुझे लिखना पड़ा। वह गाना मार्केट में आया और हिट हो गया। बाद में कंपनी को भी पता चला कि यह मैंने लिखा था। इसके बाद वे मुझसे गाने लिखाने लगे और यह सिलसिला चलता गया।

मैं दिन में द्विअर्थी गाना लिखता था और रात में अरस्तू, सुकरात और कबीर की किताबें पढ़ता। ऐसे में खुद कन्फ्यूज रहता था कि आखिर क्या कर रहा हूं। मेरे संपर्क में शिक्षक और प्रोफेसर थे। जब मिलते तो कहते कि क्या बाबा कैसा-कैसा गाना लिख रहे हैं। यह बहुत खराब लगता था।

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