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Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 10:50 AM IST

पटना. सीएम नीतीश कुमार ने कहा है कि चंपारण आंदोलन की इतिहास में उपेक्षा हुई है। जिस तरह से इस आंदोलन ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को दिशा दी, उस तरह से इसे उचित स्थान नहीं मिला। गांधीजी 1917 में चंपारण आते हैं और 30 वर्षों में देश को आजादी मिल जाती है। इसकी अहमियत इसी से प्रमाणित होता है। पर, इतने बड़े आंदोलन के साथ इतिहास में न्याय नहीं हुआ। जितना बड़ा इसका योगदान था, वैसा स्थान नहीं मिला। यह उपेक्षित रहा। इसकी भूमिका को नजरअंदाज किया गया। चंपारण आंदोलन के महत्व से आने वाली पीढ़ी को भी अवगत कराया जाना चाहिए।

सीएम रविवार को विधानपरिषद में चंपारण एग्रेरियन बिल 1918 के सौवें वर्षगांठ पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर हे थे। उन्होंने कहा कि चंपारण ने देश को नया गांधी दिया। चंपारण आने वाले तो गांधी थे, लेकिन जब वे लौटे तो महात्मा गांधी बनकर। चंपारण ने देश के इतिहास को निर्णायक मोड़ दिया। पहली बार अंग्रेजों के होश उड़े और उन्हें मात खानी पड़ी। यह चंपारण की ही धरती थी जिसने अंग्रेजी हुकूमत को हिलाकर रख दिया।

नीतीश कुमार ने बताया कि सत्याग्रह के क्रम में जब गांधीजी के चंपारण जाने पर रोक लगी और उन्हें एसडीएम कोर्ट में पेश होना पड़ा। जज के सामने गांधी ने कहा कि वे कानून तोड़ने में विश्वास नहीं रखते, लेकिन वे जिस काम के लिए आए हैं, उसमें अंतरात्मा की अहमियत कानून से अधिक है। बाहर भीड़ जमा थी। अंत में कोर्ट ने उन्हें 100 रुपए के मुचलके पर जमानत दी। गांधी ने कहा कि उनके पास पैसे नहीं है। अंत में जज ने अपने पाकेट से 100 रुपए अदा कर जमानत दी।

सीएम ने कहा कि गांधी हर युग में प्रासंगिक हैं। उनका सिद्धांत, उनकी सोच, उनके विचार नया राह दिखाने वाला है। आज यदि 10 से 15 फीसदी युवाओं में भी उनके विचारों का प्रभाव पड़ सका तो पूरा देश बदल जाएगा। फिर नए समाज का निर्माण होगा। ऐसे में हम नयी पीढ़ी को हर हाल में गांधी के विचारों से अवगत कराने के लिए संकल्पित हैं। गांधी के विचार में समस्याओं का समाधान है तो भविष्य की योजनाओं की रुपरेखा भी। गांधी कहते हैं कि पृथ्वी हमारी जरुरत को पूरा करने में सक्षम है लेकिन हमारी लालच को नहीं। सच है, धरती पर जरुरत की हर चीज उपलब्ध है। लेकिन हम प्रकृति से छेड़छाड़ कर रहे हैं और यह प्रलय को आमंत्रण है।