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शुक्रवार

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Danik Bhaskar | Jan 06, 2018, 10:28 AM IST

पटना. राज्य के किसानों को अब गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता आसान होगी। बाजार में बिकने वाली अमानक और खराब बीजों पर अंकुश लगेगा। कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्धता के लिए राज्य में बीज जांच के लिए डीएनए फिंगर प्रिटिंग लैब की स्थापना की गई है।

इस प्रयोगशाला में भौतिक शुद्धता, नमी परीक्षण और अंकुरण की जांच की जाती है। बीजों की आनुवांशिक शुद्धता की जांच खेतों में फसल उगाकर ग्रो आउट टेस्ट द्वारा की जाती है। डीएनए फिंगर प्रिटिंग प्रयोगशाला में डीएनए की बैंड साइज की तुलना कर बीजों की शुद्धता आकलित की जाती है।

मंत्री ने कहा कि बिहार स्टेट सीड एवं आर्गेनिक सर्टिफिकेशन एजेंसी के तहत इस प्रयोगशाला की स्थापना की गई है। अभी धान के 13 प्रभेदों पर मानकीकरण का कार्य हो रहा है। राज्य में बिकने वाले धान और मक्का के संकर प्रभेदों पर मानकीकरण एवं पहचान का कार्य भी किया जा रहा है। वर्ष 2017-18 में विभिन्न प्रतिष्ठानों द्वारा धान और मक्का के कुल 140 पैरेंट मैटेरियल या संकर प्रभेद उपलब्ध कराए गए हैं। इसमें धान के 5और मक्का के 8 प्रभेदों का मानकीकरण किया जा चुका है।

डीएनए फिंगर प्रिटिंग प्रयोगशाला में सबसे पहले प्राप्त कॉर्मिशियल सैंपल का डीएनए आईसोलेट किया जाता है। फिर स्पेसिफिक प्राइमर का उपयोग कर इसे आईसालेट डीएनए का पीसीआर द्वारा एम्प्लिफिकेशन किया जाता है। हाइब्रिड डीएनए को पैरेंट डीएनए से मिलान कर रिपोर्ट को कंफर्म करते हैं, जिससे कॉमर्शियल प्रभेदों का आनुवांशिक पहचान आसानी से किया जा सकता है।

मंत्री ने कहा कि राज्य में डीएनए फिंगर प्रिंटिंग प्रयोगशाला की स्थापना से बाजार में बिकने वाले बीजों की आनुवांशिक शुद्धता में वृद्धि हुई है। सरकार की इस पहल से बाजार में बिकनेवाली अमानक बीजों की पहचान आसानी से की जा सकती है। किसी भी किसान को बीजों की आनुवांशिक शुद्धता पर संदेह हो तो मीठापुर स्थित डीएनए फिंगर प्रिटिंग प्रयोगशाला से संपर्क कर बीजों की जांच करा सकते हैं।