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काजल यादव

काजल यादव

Danik Bhaskar | Jan 23, 2018, 04:04 PM IST

पटना. राज्य के किसानों को अब बिना गारंटी कृषि ऋण तीन लाख रुपए तक मिल सकता है। अभी तक एक लाख रुपए तक अधिकतम सीमा है। राज्य में 1.61 करोड़ किसानों हैं, लेकिन 60 लाख किसानों के पास ही केसीसी है। केसीसी बढ़ाना है, इसके लिए प्रखंड में शिविर लगाया जाएगा। मंगलवार को कृषि योजनाओं में बैंकों से ऋण उपलब्ध कराने के मामले में बैंक प्रतिनिधियों की बैठक के बाद कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार पत्रकारों से बात कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि प्रखंड स्तर पर तिथि तय कर कैंप लगा कर किसान क्रेडिट कार्ड बनाया जाए। कैंप में सभी संबंधित पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। गांवों में आयोजित किसान चौपाल में किसानों के बैंक में खाता है यह नहीं इसकी भी जानकारी लेने की जरूरत है, क्योंकि अब सभी योजनाओं का लाभ किसानों को डीबीटी के माध्यम से दिया जा रहा है।

किसानों के ज्वाइंट लैबिलिटी ग्रुप (जेएलजी) के माध्यम से पिछले वर्षों में बैंकों द्वारा ऋण देने में कमी आयी है। जेएलजी के माध्यम से ज्यादातर बटाईदारों, भूमिहीन किसानों को ऋण की सुविधा मिलती है, लेकिन इसके लिए जब से भूमि से संबंधित खाता, खेसरा की मांग होने लगी है। इससे बटाईदार और भूमिहीन किसानों को ऋण मिलने में परेशानी हो रही है। मंत्री ने बैंक प्रतिनिधियों से कहा- राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत 200 प्रोजेक्ट में मात्र 15 प्रोजेक्ट स्वीकृत होना दुखद है।

समय पर कृषि ऋण लौटाने वाले किसानों को तीन प्रतिशत ही ब्याज देना होगा। 7 प्रतिशत ब्याज दर पर कृषि ऋण बैंक से मिलता है। इसमें समय पर ऋण चुकाने वालों के लिए तीन प्रतिशत केंद्र सरकार देती है। दो वर्ष तक राज्य से एक प्रतिशत किसान का ब्याज भुगतान नहीं हो पाया था, लेकिन 2016-17 के लिए 10 करोड़ की राशि दो माह पूर्व ही नाबार्ड को दे दी गई है। इस वर्ष भी केसीसी का एक प्रतिशत ब्याज भुगतान राज्य सरकार करेगी।

किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य के किसानों के लिए कई योजनाएं चलायी जा रही है। कृषि यांत्रिकीकरण, बागवानी विकास योजनाएं, मशरूम उत्पादन इकाई, मशरूम स्पॉन बनाने की इकाई, नए टिशूकल्चर इकाई की स्थापना, इंटीग्रेटेड पैक हाउस, शीतगृह, रेफर भान के साथ जैविक खेती के लिए किसानों को ऋण देने में बैंकों को कोताही नहीं बरतनी चाहिए। 4500 ग्रामीण युवा कौशल विकास का प्रशिक्षण ले रहे हैं। 21 जिलों में बाढ़ से हुए फसल नुकसान के लिए 894 करोड़ में 80 प्रतिशत राशि किसानों के खाते में चली गई है।

समीक्षा बैठक में एपीसी सुनील कुमार सिंह, प्रधान सचिव सुधीर कुमार, कृषि निदेशक हिमांशु कुमार राय, वित्त विभाग के संयुक्त सचिव उदयन मिश्रा, नाबार्ड के सहायक महाप्रबंधक एम.एम. अशरफ, राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति के संयोजक राजीव कुमार दास एवं सभी व्यावसायिक बैंकों या क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के पदाधिकारी मौजूद थे।