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Danik Bhaskar | Dec 12, 2017, 05:43 PM IST

पटना. बिहार में फिश सीड सर्टिफिकेशन अनिवार्य होगा। बिना प्रमाणीकरण (सर्टिफायड) मछली बीज की राज्य में खरीद-बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगेगा। पशु व मत्स्य संसाधन विभाग फिश सीड सर्टिफिकेशन एक्ट बना रहा है। एक्ट तैयार होने के बाद इसे राज्य में लागू कर दिया जाएगा। इस प्रावधान से राज्य में गुणवत्तापूर्ण मछली बीज की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे राज्य में मछली उत्पादन अधिक होगा। मछली पालकों को ज्यादा मुनाफा होगा।

सर्टिफिकेशन मछली बीज के ग्रेडिंग के हिसाब से होगा। हैचरी को सबसे अधिक गुणवत्तापूर्ण मछली बीज उत्पादन के लिए ए प्लस ग्रेड मिलेगा। इसी प्रकार इससे थोड़ा कम वाले को ए, इससे कम को बी प्लस, बी, सी प्लस और सी दिया जाएगा। गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन नहीं होने पर बिक्री पर भी रोक लगायी जा सकती है। इसके लिए मत्स्य निदेशालय अधिनियम बनाएगा।

राज्य में आवश्यक मछली बीज में अधिकांश पश्चिम बंगाल और आंध्रप्रदेश से मंगाया जाता है। राज्य में उत्पादित मछली बीज की गुणवत्ता जांच की व्यापक व्यवस्था नहीं है। दूसरे राज्यों से आने वाले मछली बीज में वृद्धि दर कम होता है। इसका मूल कारण गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन नहीं होना है।

राज्य में लगभग 140 करोड़ मत्स्य बीज की आवश्यकता है, जबकि उत्पादन 70 करोड़ ही हो रहा हे। मछली बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर होने के लिए 260 हैचरी की जरूरत है, जबकि अभी 142 हैचरी है, इसमें 105 चालू है। गुणवत्तापूर्ण मछली बीज उत्पादन के लिए हैचरी संचालकों को प्रशिक्षण के साथ प्रोत्साहन दिया जाएगा। बेहतर तकनीक से गुणवत्तापूर्ण मछली बीज उत्पादन नहीं होने से मछली की बढ़ोतरी कम होती है। इससे मछली पालकों को नुकसान होता है। इस नुकसान से बचाने के लिए ही नए प्रावधान किए जाएंगे। सीड सर्टिफिकेशन के प्रावधानों से हैचरी संचालकों में गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन की प्रतिस्पर्धा होगी। इससे मछली उत्पादन में मदद मिलेगी। पश्चिम बंगाल और असम में सीड उत्पादन के लिए मानक तय कर दिए गए हैं।

राज्य में सालाना 5.10 लाख टन मछली में 90 प्रतिशत से अधिक कतला, रोहू, मृगल, सिल्वर कार्प व ग्रास कार्प मछलियों का उत्पादन होता है। कार्प मछलियां नदियों में जहां निरंतर जल का प्रवाह होता वहां प्रजनन करती है, लेकिन तालाब और झील में इसका प्रजनन नहीं होता है।