पटना

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पूजा

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Danik Bhaskar

Dec 23, 2017, 12:19 PM IST

पटना. चारा घोटाला मामले में सीबीआई कोर्ट ने आरजेडी प्रमुख लालू यादव को दोषी करार दिया है। तीन जनवरी को कोर्ट उन्हें सजा सुनाएगी। 900 करोड़ रुपए के इस घोटाले का असर बिहार और झारखंड में आज भी देखा जा सकता है। 70-80 के दशक में कृषि प्रधान राज्य होने के चलते बिहार का पशुपालन विभाग काफी समृद्ध था। पूरे बिहार में जगह-जगह विभाग के फॉर्म हाउस थे। इन फॉर्म हाउस में गाय, भैंस, सूअर और मुर्गियों को पाला जाता था। राज्य सरकार द्वारा पाले गए पशुओं के लिए चारे और दवाओं का प्रबंध सरकारी खजाने से किया जाता था। घोटालेबाजों ने पशुपालन विभाग का इस्तेमाल कर सरकार से खजाने को खाली कर दिया था।

कैसे होता था घोटाला
- घोटालेबाजों के रैकेट से पशुपालन विभाग के अधिकारी व ट्रेजरी ऑफिसर से लेकर सरकार के मंत्री और मुख्यमंत्री तक जुड़े थे।
- पशु के लिए खरीदे गए चारा का फर्जी बिल बनाकर ट्रेजरी को भेजा जाता था। ट्रेजरी के अधिकारी बिना यह जांच किए कि बिल सही है या नहीं या सच में चारा की खरीद हुई है या नहीं पैसे जारी कर देते थे।
- ट्रेजरी से निकलने वाले पैसे में सभी का हिस्सा पहले से तय होता था। घोटालेबाजों ने चारा के अलावा पशुओं को ढोने से लेकर दवा खरीद तक हर काम के

फर्जी बिल बनाए और उससे पैसे निकाल लिए।
- पशुपालन विभाग में हो रहे घोटाले का मामला जब तूल पकड़ा तो इसकी जांच सीबीआई से कराई गई।
- सीबीआई ने बिल चेक किया तो कई गड़बड़ियां निकलीं। एजेंसी ने पाया कि बिल में बैल और चारा को ट्रक से ढोने का जिक्र किया गया था, लेकिन जब गाड़ी के नंबर की जांच की गई तो वह स्कूटर का निकला।

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