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पास पास

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Dainik Bhaskar

Mar 13, 2018, 05:01 PM IST
जदयू प्रत्याशी अभिराम शर्मा जदयू प्रत्याशी अभिराम शर्मा

जहानाबाद. बिहार के एक लोकसभा सीट और विधानसभा के दो सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं। तीनों सीट पर सहानुभूति फैक्टर सबसे महत्वपूर्ण रहा। तीनों सीट पूर्व सांसद और विधायक के निधन के चलते खाली हुए थे। यहां से उनके परिवार के लोगों की जीत हुई। जहानाबाद में भी यही हुआ। यहां से आरजेडी के दिवंगत नेता मुद्रिका सिंह यादव के बेटे कुमार कृष्ण उर्फ सुदय यादव की जीत हुई है। सिमपैथी फैक्टर के इतर जहानाबाद में दारू, बालू और एनडीए में फूट के चलते भी जेडीयू की हार हुई है।

सुदय को मिली जनता की सहानुभूति
सुदय यादव के पिता मुद्रिका सिंह यादव जहानाबाद जिले के कद्दावर नेता थे। अपने विधानसभा क्षेत्र के हर वर्ग के लोगों के बीच मुद्रिका की अच्छी पकड़ थी। मुद्रिका की मौत के बाद उनके बेटे सुदय को जनता की सहानुभूति मिली। इस सीट के लिए आरजेडी और जेडीयू के बीच आमने-सामने की टक्कर थी। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने यहां जदयू के खिलाफ आक्रामक चुनाव प्रचार किया था।

दारू और बालू का दिखा असर
चुनाव प्रचार के दौरान तेजस्वी ने दारू और बालू का मुद्दा जोर शोर से उठाया था। आरजेडी ने लोगों ने जेडीयू पर आरोप लगाया था कि दारू बंदी के नाम पर गरीबों के खिलाफ अत्याचार किया जा रहा है और उन्हें जेलों में बंद किया जा रहा है। जहानाबाद में बालू का मुद्दा काफी अहम था। सरकार द्वारा अवैध बालू खनन रोकने के लिए किए गए इंतजाम के चलते काफी समय तक बालू कारोबार प्रभावित हुआ था। इसका सीधा असर बालू खनन और भवन निर्माण कार्य में लगे मजदूरों पर पड़ा था। तेजस्वी ने इस मुद्दे को खूब उछाला था।

एनडीए में नहीं थी एकजुटता
जहानाबाद सीट के लिए एनडीए के दो घटक दल रालोसपा और हम अपनी दावेदारी पेश कर रहे थे। टिकट न मिलने से नाराज पूर्व सीएम जीतन राम मांझी अपनी पार्टी हम के साथ गठबंधन में शामिल हो गए। इस विधानसभा क्षेत्र में कुशवाहा और दलित वोटरों की संख्या निर्णायक है। हम के महागठबंधन में जाने से दलित वोट आरजेडी के पक्ष में एकजुट हो गया। वहीं, रालोसपा के वोटरों में उत्साह नहीं दिखा।

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जदयू प्रत्याशी अभिराम शर्माजदयू प्रत्याशी अभिराम शर्मा
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