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Dainik Bhaskar

Jan 05, 2018, 02:20 PM IST
लालू और नीतीश कुमार लालू और नीतीश कुमार

पटना. सीबीआई कोर्ट ने लालू प्रसाद को साढ़े तीन साल की सजा सुनायी है। चारा घोटाले में लालू प्रसाद को इस हाल तक पहुंचाने वालों में सबसे बड़ी भूमिका सरयू राय, शिवानंद तिवारी, ललन सिंह और सुशील कुमार मोदी की रही। ये वही ललन सिंह हैं जिन्हें लालू प्रसाद ने कभी अपने कमरे से धक्का देकर बाहर निकाल दिया था। ऐसा सीनियर जर्नलिस्ट संकर्षण ठाकुर की किताब Single Man:The Life And Times Of Nitish Kumar Of Bihar में लिखा है। नीतीश कुमार के सामने हुआ था ऐसा...

- सीनियर जर्नलिस्ट संकर्षण ठाकुर ने अपनी किताब Single Man:The Life And Times Of Nitish Kumar Of Bihar में वर्ष 1992 की चर्चा करते हुए लिखा है कि लालू प्रसाद के सीएम बने हुए अभी दो वर्ष ही गुजरा था।

-केंद्र में वीपी सिंह की सरकार का पतन हो चुका था। नीतीश कुमार भी अब केंद्र सरकार में मंत्री नहीं थे। इधर, लालू प्रसाद एक मजबूत नेता के रुप में उभर रहे थे। लेकिन, नीतीश उनके काम करने की तौर तरीके से नाराज थे। लेकिन वे अपनी इस भावना को सार्वजनिक रूप से व्यक्त नहीं कर रहे थे। हां लालू प्रसाद के चाल-ढ़ाल से नीतीश कुमार का मन विद्रोही बन गया था।

- इसी बीच लालू प्रसाद वर्ष 1992 के अन्तिम महीने में कुछ काम से दिल्ली आये हुए थे। सीएम के हैसियत से वे दिल्ली स्थित बिहार भवन में वे ठहरे हुए थे। नीतीश कुमार भी इनसे मिलने बिहार भवन पहुंचे। वहां पहले से शिवानंद तिवारी, वृष्णि पटेल मौजूद थे। भाजपा नेता सरयू राय भी लालू से मिलने के लिए दूसरे कमरे में इंतजार कर रहे थे।

-सरयू राय तब नालंदा और सोन क्षेत्र के किसानों के सिंचाई तथा बिजली मुद्दे को तेजी से उठा रहे थे। इन मुद्दों पर बिहार में किसान महीनों से शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे थे, पर कोई नतीजा नहीं निकल रहा था। नीतीश कुमार भी इसका समाधान लालू प्रसाद से चाहते थे।

- सीनियर जर्नलिस्ट संकर्षण ठाकुर अपनी किताब में आगे लिखते हैं कि सरयू राय भी मुख्‍य मंत्री लालू प्रसाद से मिलने के लिए दूसरे कमरे में इंतजार कर रहे थे। वे नीतीश कुमार तथा अन्‍य लोगों का मीटिंग से लौटने का इंतजार कर रहे थे.

निकल बाहर, बाहर निकल
-सीनियर जर्नलिस्ट संकर्षण ठाकुर अपनी किताब में लिखते हैं कि किसी को यह ठीक से याद नहीं कि मीटिंग में हुआ क्या कि अचानक लालू प्रसाद बिहार भवन में नीतीश कुमार के साथ चल रही बैठक में कुछ मिनटों के भीतर ही सब कुछ गालीगलौज में बदल गया। मुक्केबाजी होने लगी। लालू प्रसाद की चीख-चिल्‍लाहट सबसे ऊपर थी।

-उनका सारा गुस्‍सा ललन सिंह पर था , जिसे उन्‍होंने बड़े आक्रोश के साथ इशारा करते हुए कह रहे थे निकल बाहर, बाहर निकल। हल्ला –हंगामा बिहार भवन के ग्राउंड फ्लोर पर वीवीआईपी गलियारे तक साफ सुनायी दे रही थी। हल्ला हंगामा किसी विस्फोट की तरह गूंजने लगा। हल्ला हंगामा का ये सीन गालियां गोलियों की माफिक छूट रही थी।

- ललन सिंह को भी गुस्‍सा बहुत आता है। वे जवाब देने से नहीं चूकते हैं। वे भी कुछ पलटवार कर रहे थे, तब आक्रोशित लालू प्रसाद अपने गार्ड को आवाज देते हुए कहा कि पकड़ के फेंक दो बाहर, ले जाओ घसीट के! मुख्‍य मंत्री लालू प्रसाद शायद ललन सिंह को ही बाहर ले जाने के लिए चीख रहे थे।

-लेकिन इससे पहले कि लालू प्रसाद किसी को भी जि़स्मानी रुप से बाहर उठवाकर फेंकवा पाते, नीतीश कुमार अपने साथ आए लोगों को लेकर वहां से हट गए। लोग कहते हैं कि नीतीश ने तब ही ये कहा था कि अब साथ चल पाना मुश्किल है। इसके बाद वे ललन सिंह के साथ बिहार भवन से बाहर हो गए।


सरयू राय ने देखा था ये सब
- लालू के कमरे से आ रही तेज आवाज का माजरा देखने सरयू राय अपने कमरे से बाहर निकल गए थे। सरयू राय नीतीश कुमार की वापसी का इंतजार कर रहे थे। कहा जाता है कि वे वीवीआईपी दरवाजे पर धक्‍का-मुक्‍की होती देखा था। लालू प्रसाद अपने सिक्‍योरिटी को आवाज दे रहे थे। जो कॉरिडोर के आगे कहीं सो रहे थे।

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