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महाबोधि मंदिर में बम मिलने के मामले की जांच करने आई NIA, कहा- पहले हुआ था धमका

बिहार के बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर में शुक्रवार की रात विस्फोटक मिलने के बाद शनिवार को एनआईए की टीम जांच करने पहुंची।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 20, 2018, 04:16 PM IST

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    कालचक्र मैदान से मिले विस्फोटक के पास बैठा स्निफर डॉग।

    गया.बिहार के बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर में शुक्रवार की रात विस्फोटक मिलने के बाद शनिवार को एनआईए की टीम जांच करने पहुंची। एनआईए की टीम ने अपनी जांच में खुलासा किया है कि कालचक्र मैदान में जहां बम मिले थे उसी क्षेत्र के एक रेस्टोरेंट के पास विस्फोट भी हुआ था। हालांकि यह विस्फोट कम ताकत का था। इससे किसी को चोट नहीं आई। ऐसी सूचना मिल रही है कि यह धमाका जेनरेटर के फ्लास्क में विस्फोटक रखकर किया गया था।

    शुक्रवार शाम करीब 4:45 बजे यह धमाका हुआ था। मौके पर जांच करने पुलिस पहुंची तो लोगों ने विस्फोट की आवाज आने की बात कही थी। इसके बाद पुलिस के जवान एक्टिव हुए थे और कालचक्र मैदान से विस्फोटक मिले थे। शनिवार को कालचक्र मैदान से मिले विस्फोटक को डिफ्यूज करने के लिए कोबरा बटालियन की टीम को बुलाया गया है।

    एनआईए के अधिकारी महाबोधि मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज चेक कर रहे हैं। मंदिर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। विस्फोटक मिलने के बाद भी श्रद्धालुओं की संख्या कम नहीं हुई है। शनिवार को पहले की तरह मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।


    कालचक्र पूजा के लिए यहां ठहरे हैं दलाई लामा
    इन दिनों धर्मगुरु दलाई लामा बोधगया में हैं। मंदिर के पास से बम मिलना सुरक्षा में बड़ी सेंध मानी जा रही है। शुक्रवार को राज्यपाल भी बोधिमंदिर पहुंचे थे। गुरुवार को निगमा पूजा का दलाई लामा ने उद्घाटन किया था। बता दें कि 7 जुलाई 2013 को लगातार 8 बम विस्फोटों में दो भिक्षुओं समेत पांच लोग घायल हुए थे।

    बोधगया में चल रही है कालचक्र पूजा
    तीन जनवरी से यहां कालचक्र पूजा की शुरुआत हुई है। पूजा में हिस्सा लेने लगभग 60 हजार श्रद्धालु बोधगया पहुंचे हैं। आयोजन समिति के मुताबिक, भारत के अलावा रूस, फ्रांस, जर्मनी, ताइवान, अमेरिका और मंगोलिया के मीडियाकर्मी यहां पहुंचे हैं।


    बता दें कि 7 जनवरी को सीएम नीतीश कुमार बोधगया के कालचक्र मैदान में दलाई लामा से मिलकर उनका आशीर्वाद लिया था। दलाई लामा 50 दिन के प्रवास पर बोधगया में हैं।

    तांत्रिक साधना है कालचक्र
    कालचक्र पूजा एक तांत्रिक साधना है, जिसमें मंडल का निर्माण कर कालचक्र और विश्वात्मा को स्थापित किया जाता है। कालचक्र व विश्वात्मा को शिव-शक्ति का रूप माना जाता है। इसकी साधना से साधक अपने मन को बोधि (ज्ञान) की ओर ले जाने की कोशिश करता है। इस तंत्र साधना द्वारा आध्यात्मिक स्थितियों को पार कर पूर्ण ज्ञान प्राप्त करता है।

    7 जुलाई 2013 को हुए थे सीरियल ब्लास्ट
    इससे पहले 7 जुलाई 2013 को महाबोधि मंदिर कैंपस में नौ सिलसिलेवार ब्लास्ट हुए थे, जिसमें दो बौद्ध भिक्षु घायल हो गए। चार बम मंदिर परिसर में, तीन पास के ही एक मठ में, एक भगवान बुद्ध की प्रतिमा के नजदीक और एक अन्य बम पर्यटक बस के नजदीक फटा था। इसके अलावा मंदिर परिसर से दो जिंदा बम भी बरामद किए गए थे, जिन्हें डिफ्यूज कर दिया गया था।

    बता दें कि महाबोधि मंदिर का निर्माण बोधगया में उस स्थान पर किया गया है, जहां भगवान बुद्ध को करीब 2,500 साल पहले ज्ञान प्राप्त हुआ। यूनेस्को ने 2002 में इसे विश्व धरोहर घोषित किया था।

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    कालचक्र मैदान में एक पेड़ के पास मिला विस्फोटक।
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Web Title: NIA Team Reached Mahabodhi Temple For Investigate
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