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सीवान

सीवान

Vivek Kumar | Last Modified - Dec 31, 2017, 11:17 AM IST

उदाकिशनगंज. बिहार के मधेपुरा जिले के उदाकिशनगंज पीएचसी में शनिवार को डॉक्टरों स्वास्थ्य कर्मियों का अमानवीय चेहरा सामने आया। अस्पताल परिसर में ही डॉक्टर धूप सेंकने में इस कदर व्यस्त रहे कि भूल गए कि ठंड लगने से बीमार पड़ा एक मरीज तड़प रहा है। आखिरकार एक घंटे तक तड़प-तड़प कर मरीज ने दम तोड़ दिया। उसके बाद परिजनों के रोने की आवाज सुन डॉक्टर आए और मरीज को देख मृत घोषित कर दिया। शव ले जाने के लिए नहीं मिला एंबुलेंस...

लापरवाही की सीमा यहीं खत्म नहीं हुई। परिजनों ने जब शव ले जाने के लिए एंबुलेंस की मांग की तो अस्पताल प्रबंधन ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि शव ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं दी जा सकती। अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मृतक के परिजनों ने काफी देर तक हंगामा भी किया। हालांकि बाद में सभी वापस अपने साधन से शव लेकर गए। परिजनों ने मौत के लिए डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया है। वहीं पीएचसी प्रभारी ने कहा कि मरीज को मृत अवस्था में ही लाया गया था। ऐसे में उनका इलाज नहीं हो सकता था।

भाई ने बताई आपबीती
सुमित झा ने बताया कि मेरे भाई योगेंद्र मिश्र को दो दिन पूर्व ठंड लग गई थी। जिसके बाद उनकी तबियत काफी खराब हो गई थी। परेशानी ज्यादा बढ़ने के बाद उन्हें शुक्रवार को पीएचसी लेकर गया था। उस समय अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉ. डीके सिन्हा खुद मौजूद थे। उन्होंने मेरे भाई को देखा और अस्पताल से एक दवा दे दी। बाकी दवा बाहर से खरीदने को कहा। उन्होंने भाई को घर ले जाने को कहा। मैं भाई को घर लेकर गया था। शनिवार की सुबह फिर से मेरे भाई की तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद फिर उन्हें अस्पताल लेकर आया। उस समय डॉक्टर डीके सिन्हा अस्पताल में धूप सेंक रहे थे। उनसे कहा गया कि मरीज की हालत गंभीर है। जबतक पर्चा बनता है एक बार मरीज को देख लें। मगर वह अपनी जगह से नहीं हिले। एक घंटे बाद मेरे भाई की मौत हो गई।


अस्पताल लाने से पूर्व हो चुकी थी मौत : डॉ. सिन्हा
उधर इस मामले में चिकित्सा प्रभारी डॉ सिन्हा ने कहा कि शुक्रवार को वे ड्यूटी पर नहीं थे। ड्यूटी पर डॉ. इंदु भूषण कुमार थे। शनिवार को भी डॉ. गौतम कुमार की ड्यूटी थी। शनिवार की सुबह मरीज को मृत अवस्था में लाया गया था। देखने पर मौत की पुष्टि की गई। मृतक के परिजनों ने एंबुलेंस की मांग की थी। हमने उन्हें बताया कि शव ढोने के लिए एंबुलेंस नहीं है। उधर डॉ. गौतम का कहना है कि मरीज को जब लाया गया तब वे ओपीडी में इलाज कर रहे थे। सूचना मिलने पर मरीज को देखने गए, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

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