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नीतीश ने बदले दोस्त, लालू को जाना पड़ा जेल कुछ ऐसे बीता वर्ष 2017

Dainik Bhaskar.com | Last Modified - Dec 30, 2017, 02:36 PM IST

बिहार में वर्ष 2017 बदलते राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से बेहद नाटकीय रहा। दो दिनों के बाद 2017 खत्म हो जायेगा।
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    पटना. बिहार में वर्ष 2017 बदलते राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से बेहद नाटकीय रहा। दो दिनों के बाद 2017 खत्म हो जायेगा। आरजेडी प्रमुख लालू यादव के लिए तो ये ठीक नहीं रहा। साल की शुरुआत में ही उन्हें जमीन पर बैठना पड़ा और अनंत में जेल जाना पड़ा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद की राजद और कांग्रेस को छोड़कर अपने पुराने साथी भाजपा के साथ मिलकर सरकार बना लिया।लालू प्रसाद पर आयेगा 03 जनवरी को फैसला...

    - राजद प्रमुख लालू प्रसाद पर रांची की एक विशेष अदालत ने 23 दिसंबर को 21 साल पुराने चारा घोटाले में दोषी माना। इस मामले में कोर्ट 3 जनवरी को अपनी सजा सुनायेगी। 69 वर्षीय राजद नेता फिलहाल रांची की बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं।

    - इससे पहले नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद और कांग्रेस से अपना नाता तोड़कर अपने पुराने साथी के साथ मिलकर सरकार बना ली।

    - इससे पहले नीतीश कुमार ने नरेंद्र मोदी को भाजपा नीत राजग का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने के विरोध में चार वर्ष पहले ही भाजपा का 17 वर्ष का साथ छोड़ कर कांग्रेस तथा राजद के साथ महागठबंधन बनाया था।
    - लेकिन, जनवरी 2017 आते आते समीकरण एक बार फिर बदल गया। पीएम नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के तल्ख संबंधों में गर्मजोशी आ गए थे।
    - इसकी बानगी गुरू गोविंद सिंह की 350वी जयंती वर्ष समारोहों की शुरूआत में देखने को मिला। नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार ने एक साथ मंच साझा किया और एक दूसरे की तारीफों के पुल बांधे।

    एक नया घोटाले हुआ उजागर
    - भाजपा और जदयू की नई सरकार के गठन के कुछ ही समय बाद सृजन घोटाला सामने आया जो राजकोष से एक गैर सरकारी संगठन को सैकड़ों करोड़ रूपये धोखे से हस्तांतरित करने से जुड़ा था। इस मामले में राज्य सरकार ने सीबीआई जांच के आदेश दिए।
    -नोटबंदी के मोदी के फैसले के समर्थन में खुलकर सामने आकर नीतीश ने अपने गठबंधन सहयोगियों को नाराज कर दिया था।


    रामनाथ कोविंद का नीतीश ने किया समर्थन
    -महागठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है, इसके स्पष्ट संकेत तब मिले जब नीतीश ने राष्ट्रपति चुनाव में रामनाथ कोविंद को समर्थन देने का फैसला किया।
    -घटनाक्रम तेजी से बदला जब सीबीआई ने होटल घोटाले में लालू प्रसाद, उनके छोटे बेटे तथा महागठबंधन सरकार में उप मुख्यमंत्री रहे तेजस्वी यादव समेत उनके परिजनों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
    - नीतीश कुमार ने तब कहा कि लालू इस बारे में सार्वजनिक तौर पर स्पष्टीकरण दें। इस मांग को राजद ने ठुकरा दिया और इसके बाद उन्होंने अपने गठबंधन सहयोगी के साथ मतभेदों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

    नीतीश के फैसले के खिलाफ खड़े हुए शरद
    -जदयू के भीतर भी उथल पुथल मच गई। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव और कभी नीतीश के करीबी रहे राज्यसभा सांसद अली अनवर ने कुमार के खिलाफ विद्रोह कर दिया।
    -पार्टी के आदेश को नजरअंदाज करते हुए शरद यादव और अली अनवर राजद के कार्यक्रमों में शामिल होते रहे और उन्होंने नीतीश कुमार पर 2015 के विधानसभा चुनाव के जनादेश के साथ विश्वासघात का आरोप लगाया।
    -नीतीश कुमार जो जदयू अध्यक्ष भी हैं, उन्होंने पार्टी से शरद के सभी करीबियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया । उन्होंने चुनाव आयोग के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखा जिससे पार्टी के चिह्न पर विरोधी धड़े का दावा खारिज हो गया।
    -शरद यादव और अली अनवर को राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य करार दे दिया गया।

    कांग्रेस में दिखा दरार
    -महागठबंधन टूटने का असर कांग्रेस पर दिखा। कांग्रेस दो धड़ों में बंट गई। एक पक्ष नीतीश का करीबी था और दूसरा जो राजद के पक्ष में था।
    - विवाद बढ़ने पर बिहार प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष पद से अशोक चौधरी को हटा दिया गया।
    -लेकिन, राजद की परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं थी। लालू प्रसाद को चारा घोटाला से जुड़े मामलों में झारखंड की सीबीआई अदालत में नियमित रूप से पेश होने को कहा गया।
    -राज्यसभा सदस्य मीसा भारती और उनके पति शैलेष तथा तेजस्वी से एक मामले में ईडी ने पूछताछ की।


    ईडी ने राबड़ी से की पूछताछ

    -नीतीश सरकार ने आउटसोर्स सेवाओं में आरक्षण का अहम फैसला किया, जिसे आलोचकों ने पिछले दरवाजे से निजी क्षेत्र में कोटा प्रणाली लाने का प्रयास बताया।

    बाढ़ के कारण 500 लोगों की मौत
    - प्राकृतिक आपदा ने भी इस वर्ष बिहार में भारी तबाही मचाई। बिहार के 19 जिलों में बाढ़ के कारण करीब 10 लाख लोग बेघर हो गए। इसके साथ ही 500 से अधिक लोगों की जान चली गई।
    - राज्य में शराबबंदी के जमीनी क्रियान्वयन पर जहरीली शराब के कारण होने वाली मौत की घटनाओं ने सवालिया निशान लगाए।

    -जहरीली शराब के कारण मौत की घटना रोहतास और वैशाली जिलों में हुई। समस्तीपुर में शराब तस्करों ने एक पुलिसकर्मी की हत्या कर दी। इसके अलावा राज्यभर से बड़े पैमाने पर शराब की बरामदगी हुई।

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Web Title: Political Journey Of Bihar Year 2017
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