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गांव में

गांव में

Danik Bhaskar | Dec 28, 2017, 10:50 AM IST

पटना. भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि नोटबंदी के बाद अब राशन कार्ड की लाइन में गरीब मर रहे हैं। नए कार्ड जारी करने की प्रक्रिया काफी जटिल बना दी गयी है। यह सीधे-सीधे राशन प्रणाली को खत्म करने की साजिश है। केंद्र की मोदी सरकार की इस नीति निंदनीय है। पहले चार रंगों के कार्ड थे। अब दो को समाप्त कर दो ही कर दिया गया है।

उजले कार्ड के तहत 3 वर्ष या उससे अधिक उम्र के प्रत्येक व्यक्ति को सब्सिडी पर प्रत्येक माह 5 किलो अनाज मिलता था, इसमें संशोधन कर उम्र सीमा 5 वर्ष कर दी गई है। पीले कार्ड के तहत प्रत्येक परिवार को 35 किलो अनाज प्रति महीना सब्सिडी रेट पर मिलता था, इसमें संशोधन करके प्रति माह प्रत्येक व्यक्ति 5 किलो अनाज कर दिया गया है। साथ ही पुराने पीले कार्ड को अवैध करार देकर नया कार्ड बनाने का आदेश दिया है। राशन कार्ड बनवाने के लिए ठंड में चंपारण के गौनाहा के पकरी बिसौली में दुलारी देवी की गोद में उनकी तीन वर्ष की बेटी की ठंड लगने से मौत हो गई।