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Danik Bhaskar | Jan 23, 2018, 10:02 AM IST

पटना. रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि आरक्षित वर्ग में जातियों की संख्या बढ़ायी जा रही है, तो आरक्षण का कोटा भी बढ़ना चाहिए। आरक्षित वर्ग में जातियों की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन कोटा नहीं बढ़ा। न्यायपालिका में दलित, पिछड़े और अतिपिछड़े वर्ग को आरक्षण मिलना चाहिए। राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाया। कहा- शिक्षा की स्थिति आज भी खराब है। नकल कराये जा रहे हैं।

पिछले दिनों इंटरमीडिएट की परीक्षा में शामिल एक लड़की ने फोन कर बताया कि सभी परीक्षाथिर्यो को प्रैक्टिकल के दौरान प्रश्न की जगह आंसरसीट देकर इसे उतारने के लिए कहा गया। कुछ अभिभावक और छात्र भी कॉपी के साथ रुपए दे रहे थे। ऐसे में प्रतिभा का गला घोंटा जा रहा है। नारा जितना भी लगा लें, लेकिन शिक्षा से ही बाल विवाह ओर दहेजप्रथा जैसी कुरीति को समाज से दूर किया जा सकता है। बुधवार को वे रवींद्र भवन में रालोसपा अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित कर्पूरी ठाकुर की जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि कर्पूरी जी दो बार सीएम बने, लेकिन कभी भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगे। उन्होंने बात से नहीं आचरण से लोगों को सादगी का संदेश दिया। समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुचाने का कर्पूरी जी का सपना आज भी अधूरा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार धन्यवाद के पात्र हैं, जिन्होंने राजनीति के साथ सामाजिक दहेजप्रथा और बाल विवाह जैसे सामाजिक मुद्दों को उठाया है। लेकिन सिर्फ नारा से काम नहीं चलेगा। शिक्षा सुधार पर ध्यान देना होगा। सरकारी स्कूलों की स्थिति ठीक नहीं है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा में सुधार के लिए बुद्धिजीवियों के साथ ही सभी राजनीतिक दलों को 30 तारीख को स्कूलों के बाहर शिक्षा सुधार मानव कतार में शामिल होना चाहिए। शिक्षा में सुधार के लिए पार्टी लगातार अभियान चला रही है।

अध्यक्षता प्रकोष्ठ के अध्यक्ष रामेश्वर कुमार महतो पप्पू ने की। समारोह को राष्ट्रीय महासचिव नचिकेता मंडल, प्रदेश प्रधान महासचिव सत्यानंद दांगी, रामचंद्र ठाकुर व प्रदेश अध्यक्ष भूदेव चौधरी ने भी संबोधित किया। मौके पर सांसद रामकुमार शर्मा, दशई चौधरी, प्रो. जगन्नाथ प्रसाद गुप्ता, अनिलय यादव, अभिषेक झा, कुंदन प्रकाश, प्रमोद मंडल, योगेंद्र चौहान, मंजीत सहनी, रामाशीष ठाकुर आदि मौजूद थे।

मंच के नीचे बैठे वरिष्ठ नेता : राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश पर मंच पर अतिपिछड़ा समुदाय के नेताओं को जगह दी गई। सांसद, प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व केंद्रीय मंत्री मंच के नीचे जगह दी गई।