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बताया कि

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Danik Bhaskar | Jan 22, 2018, 11:23 AM IST
गांव के बच्चों के साथ सिंहवाहि गांव के बच्चों के साथ सिंहवाहि

पटना. पति और अपने बच्चों को छोड़ रितू जायसवाल अपने पंचायत के विकास में जुटी हैं। वह गांव के बच्चों को पढ़ाई को लेकर जागरूक कर रही हैं। जहां गांव में लोग भेदभाव करते हैं। वही, रितू बच्चों के साथ समय गुजारती है। गांव और पंचायत में बिजी रहने के कारण रितू अपने बच्चों को समय कम दे पाती हैं। रितू के पति आईएएस अधिकारी हैं। साल में मात्र तीन बार मिल पाती है अपने बच्चों से...

- dainikbhaskar.com से बातचीत में सीतामढ़ी जिले के सिंहवाहिनी पंचायत की मुखिया रितू जायसवाल ने बताया कि पंचायत के विकास को लेकर बहुत समय देना पड़ा है। जिसके कारण अपने परिवार के लिए समय नहीं मिल पाता है।

- अपने बच्चों से साल में मात्र तीन बार ही मिल पाती हूं। जब वह छुट्टी पर आते हैं। बच्चे बेंगलुरू में पढ़ते हैं, लेकिन उसने मिलने नहीं जा पाती हूं। बच्चे भी जानते हैं कि मां एक बड़ा मिशन लेकर काम कर रही है। रितू एक बेटा और एक बेटी की मां हैं।

- रितू ने बताया कि 1996 में मेरी अरेंज मैरेज 1995 बैच के आइएएस अरुण कुमार से हुई थी। शादी के 15 साल तक जहां पति की पोस्टिंग होती थी। उनके साथ रहती थी। एक बार मैंने पति से कहा कि शादी के इतने साल हो गए है। आज तक ससुराल नहीं गई हूं। एक बार चला जाए। सब लोग नरकटिया गांव जाने को तैयार हो गए।

- गांव पहुंचने से कुछ दूर पहले ही कार फंस गई। कार निकालने की हर कोशिश फेल हो गई। फिर बैलगाड़ी से हमलोग चले। आगे जाकर वह भी कीचड़ में फंस गई। इसके बाद मैं इस क्षेत्र की विकास के बारे में सोचने लगी।

- 2016 में सिंहवाहिनी पंचायत से चुनाव के लिए खड़ी हुई। मेरे खिलाफ 32 उम्मीदवार थे। लोगों ने कहा कि तुम हार जाओगी। तुम्हारे जाति के मात्र पांच परिवार के लोग हैं। वोट जाति के आधार पर मिलता है। फिर भी मैं नहीं मानी और मैं जीत गई। तब से लेकर अब तक पंचायत में विकास का काम जारी है।


जिस पंचायत में सिर्फ पगडंडी था वहां बनी पक्की सड़क
- रितू ने बताया कि मेरा पंचायत सुदूर एरिया में पड़ता है। जब मुखिया बनी तो पंचायत में कच्ची सड़क और पगडंडी थी। कई बार कोशिश करने के बाद पीसीसी सड़क बनी। कई जगह पुल का निर्माण कराया, जिससे लोगों की परेशानी दूर हुई। बाढ़ के कारण इस पंचायत में भारी नुकसान हुआ। कई लोग गांव छोड़कर सुरक्षित जगह चले गए, लेकिन मैं अपने पंचायत के लोगों के साथ खड़ी रही।

-मेरे पंचायत के कई लोगों का इंदिरा आवास और वृद्धा पेंशन का पैसा दलाल अंगूठा लगवाकर निकाला लेते थे। अब यह पैसा सिर्फ लाभुकों के खाते में जाता है। इसको लेकर बैंक वालों से कई बार मेरी बहस भी हो गई। बता दें कि बेहतर कार्य के लिए रितू को कई अवार्ड मिल चुका है।