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पैसा पैसा

पैसा पैसा

Dainik Bhaskar

Mar 09, 2018, 10:33 AM IST
The widow of the martyr has not got a single penny as compensation

हाजीपुर. बीते साल अप्रैल में छत्तीसगढ़ के सुकमा में सीआरपीएफ के 26 जवान शहीद हुए थे। इसमें वैशाली के अभय कुमार भी शामिल थे। बिहार सरकार ने उस वक्त 5 लाख मुआवज देने की घोषणा की थी। लेकिन, एक साल बीत जाने के बाद भी अभी तक शहीद की विधवा को मुआवजे के रूप में एक पैसा भी नहीं मिला है। हैरानी की बात तो यह है कि सरकारी फाइलों में शहीद की विधवा को मुआवजा दे दिए जाने का दावा किया गया है। मामला तब खुला जब सैनिक कल्याण निदेशालय, बिहार की ओर से एक पत्र स्थानीय सांसद को भेजा गया। उस पत्र में जिला प्रशासन का हवाला देते हुए कहा गया कि शहीद के परिजनों को सरकार से दिया गया मुआवजा मिल गया है।

स्थानीय सांसद ने पूछा तो सैनिक कल्याण समिति ने लिखकर बताया कि दे दिया पैसा
हाजीपुर के सांसद सह केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने शहीद के परिजनों से मुलाकात की थी। इस दौरान परिजनों और गांव के लोगों ने सांसद से गांव में शहीद भवन, उचित मुआवजा और शहीद की पत्नी को सरकारी नौकरी देने की मांग रखी थी। इस पर सांसद की ओर से एक पत्र बिहार सरकार को लिखा गया था जिसमें उक्त मांगों के साथ 11 लाख का मुआवजा देने की मांग की गई थी। पत्र के जवाब में 21 जून को सैनिक कल्याण निदेशालय ने मुख्यमंत्री सचिवालय के संयुक्त सचिव को पत्र भेजा। प्रतिलिपि पासवान को भी भेजी गई। पत्र में साफ लिखा था कि 5 लाख की राशि दे दी गई है।

अफसर चेक लेकर आए थे पर लोगों ने कम बता लौटाया, फिर कोई नहीं आया
जब शहीद का शव पहुंचा तो उसके एक-दो दिन बाद ही जंदाहा के बीडीओ मुकेश कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन के प्रतिनिधि के तौर पर हम और महुआ एसडीओ 5 लाख रुपए का चेक लेकर लोमा गांव पहुंचे थे। लेकिन परिवार के लोगों ने चेक लेने से इनकार कर दिया था। इसकी सूचना हमलोगों ने जिला प्रशासन को दे दी थी। बाद में परिजनों को मुआवजा मिला या नहीं इसकी जानकारी हमारे पास नहीं है। जबकि हकीकत यह है कि ग्रामीणों ने कम राशि बताकर चेक लेने से मना किया और अधिकारियों को लौटा दिया था।

हमसे अफसर मिले ही नहीं, ग्रामीणों से मिल चले गए
शहीद की पत्नी ने कहा कि मुआवजे की राशि हमें अब तक नहीं मिली है। पिछले वर्ष 24 अप्रैल को उनकी डेथ हुई थी। 25 या 26 को मुआवजा राशि लेकर अफसर आए थे जिसका बाद में मुझे पता चला। उस वक्त गांववालों ने वापस कर दिया था। दोबारा आज तक कोई मुआवजा देने नहीं आया। शहीद के चाचा ने बीते वर्ष 8 दिसंबर को सीओ जंदाहा को मुआवजा देने के लिए आवेदन दिया था। कोई कार्रवाई नहीं हुई। अंत में हारकर 26 फरवरी को डीडीसी सर्व नारायण यादव से मिले।

प्रभारी डीएम को भी नहीं पता कि मुआवजा मिला है या नहीं
उप विकास आयुक्त सह प्रभारी डीएम सर्व नारायण यादव ने कहा कि, फिलहाल कुछ बता नहीं सकते। अगर नहीं मिला है तो इसकी जांच की जाएगी।
दूसरी ओर शहीद के ग्रामीण एवं रिटायर्ड पुलिस अधिकारी अरविन्द चौधरी ने कहा कि एक शहीद की पत्नी जिसकी उम्र मात्र 19 साल है, पति की मौत के तुरंत बाद वह क्या बोल सकती थी। मुआवजा लौट गया तो दोबारा बाद में किसी अधिकारी को आकर देना चाहिए था।

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