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Dainik Bhaskar

Feb 08, 2018, 10:23 AM IST
three thousand crore rupees send in irrigation project

पटना. पटना और भागलपुर सहित दक्षिण बिहार के पहाड़ी और पठारी इलाकों में जल संचय और सिंचाई के लिए पांच वर्षों में 3 हजार करोड़ रुपए खर्च कर 28 लाख हेक्टेयर में सिंचाई की सुविधा मिलेगी। तालाब, वाटर शेड, चेक डैम सहित पौधारोपण सहित सिंचाई की विभिन्न 449 योजनाएं पांच साल में पूरा की जाएगी। इन योजनाओं को पूरा करने में प्रति वर्ष 600 करोड़ रुपए की राशि खर्च होगी।

केंद्र 120 करोड़, राज्य सरकार 80 करोड़ और नाबार्ड 400 करोड़ रुपए इन योजनाओं के लिए ऋण के रूप में देगी। गुरुवार को कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार की अध्यक्षता में नाबार्ड के अधिकारियों के साथ बैठक में यह निर्णय लिया गया। नाबार्ड के अधिकारियों ने औपचारिक रूप से राशि खर्च करने पर सहमति दी है।

कृषि मंत्री ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा कि जलछाजन से संबंधित 80 योजनाएं नाबार्ड चला रहा है। कुछ योजनाएं वन पर्यावरण विभाग के माध्यम से संचालित है। बक्सर, भोजपुर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, गया, नवादा, जहानाबाद, अरवल, पटना, नालंदा, लखीसराय, शेखपुरा, जमुई, मुंगेर, बांका व भागलपुर में जलछाजन की योजना चल रही है। अभी14 जिलों में 600 करोड़ की 123 योजनाओं पर काम हो रहा है, जिससे 6.13 लाख हेक्टेयर में सिंचाई होगी।

नई 326 योजनाओं शुरू करने पर सहमति बनी, इससे 22 लाख हेक्टेयर यानी 55 लाख एकड़ में सिंचाई होगी। इस योजना पर 2400 करोड़ की राशि खर्च होगी। नई और पुरानी दोनों योजना 3 हजार करोड़ में पूरा होगी।

बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त सुनील कुमार सिंह, प्रधान सचिव सुधीर कुमार, विशेष सचिव रवींद्रनाथ राय, कृषि निदेशक हिमांशु कुमार राय, उद्यान निदेशक अरविंदर सिंह, नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक, भूमि संरक्षण निदेशक गुलाब राय, संयुक्त निदेशक अरविंद शर्मा सहित विभाग और नाबार्ड के वरीय अधिकारी मौजूद थे।

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