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चारा घोटाला: फर्जी बिल से निकाले गए थे करोड़ों रुपए, जानें कब क्या हुआ

चारा घोटाले से जुड़े तीसरे केस में बुधवार को लालू प्रसाद को पांच साल की सजा सुनाई गई।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 24, 2018, 04:17 PM IST

    • पटना. चारा घोटाले से जुड़े तीसरे केस में बुधवार को लालू प्रसाद को पांच साल की सजा सुनाई गई। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के जज एसएस प्रसाद ने चाईबासा ट्रेजरी से अवैध तरीके से निकाले गए 33.67 करोड़ रुपए मामले में यह फैसला सुनाया। इससे पहले वे देवघर ट्रेजरी और चाईबासा ट्रेजरी के एक और केस में दोषी करार दिए जा चुके हैं।

      6 जनवरी को हुई थी साढ़े तीन साल की सजा

      - कोर्ट ने बिहार के एक और पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्र को भी दोषी माना है। खास बात ये है कि देवघर ट्रेजरी केस में जगन्नाथ मिश्र भी आरोपी थे, लेकिन तब उन्हें बरी कर दिया गया था।

      मिश्र को भी पांच की सजा दी गई है। देवघर ट्रेजरी से जुड़े केस में लालू को 23 दिसंबर, 2017 को दोषी ठहराया गया था और 6 जनवरी को साढ़े 3 साल की सजा सुनाई गई थी।

      क्या है चारा घोटाला
      - 900 करोड़ रुपए के चारा घोटाला में बिहार सरकार के खजाने से गलत ढंग से पैसे निकाले गए थे।
      - कई वर्षों में ये पैसे पशुपालन विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों ने राजनीतिक मिली-भगत के साथ निकाले थे।
      - मामला एक-दो करोड़ रुपए से शुरू होकर 900 करोड़ रुपए तक जा पहुंचा। हालांकि कोई पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि घोटाला कितने का है, क्योंकि इन वर्षों में हिसाब रखने में भी भारी गड़बड़ियां हुई।
      - चारा घोटाले का खुलासा 1994 में हुआ था तब झारखंड बिहार से अलग नहीं हुआ था।
      - बिहार पुलिस ने 1994 में गुमला, रांची, पटना, डोरंडा और लोहरदगा जैसे कई कोषागारों से फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपए की अवैध निकासी के मामले दर्ज किए थे।
      - सरकारी कोषागार और पशुपालन विभाग के कई सौ कर्मचारी गिरफ्तार किए गए थे। कई ठेकेदारों और सप्लायरों को हिरासत में लिया गया और दर्जन भर केस दर्ज किए गए।
      - विपक्षी दलों की मांग पर घोटाले की जांच सीबीआई से कराई गई। सीबीआई ने कहा था कि चारा घोटाले में शामिल सभी बड़े अभियुक्तों के संबंध राष्ट्रीय जनता दल और अन्य पार्टियों के शीर्ष नेताओं से हैं और काली कमाई का हिस्सा नेताओं की झोली में भी गया।
      - पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने चारे, पशुओं की दवा आदि की सप्लाई के लिए करोड़ों रुपए के फर्जी बिल कोषागारों से वर्षों तक नियमित रूप से भुनाए। सीबीआई के अनुसार तत्कालीन मुख्यमंत्री (लालू यादव) को न सिर्फ इस मामले की जानकारी थी बल्कि उन्होंने कई मौकों पर वित्त मंत्रालय के प्रभारी के रूप में इन निकासियों की अनुमति दी थी।
      - लालू के खिलाफ सीबीआई ने आरोप पत्र दाखिल किया, जिसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और वे कई महीनों तक जेल में रहे।

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    Web Title: Timeline Of Fodder Scam Of Lalu Yadav
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