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Danik Bhaskar | Nov 24, 2017, 03:25 PM IST

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि दहेज और बाल विवाह को जड़ से मिटाना जरूरी है। महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में बिहार का देश में 26वां स्थान है, लेकिन दहेज संबंधी अपराध में हमारा राज्य उत्तर प्रदेश के बाद दूसरे स्थान पर है। अगर दहेज प्रथा और बाल विवाह को खत्म कर दिया जाए तो हालात में कितना बड़ा परिवर्तन आएगा।

मुख्यमंत्री सचिवालय के संवाद भवन में दहेज प्रथा के खिलाफ आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सामाजिक विषयों पर कोई राजनीति ना हो। चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष में शराबबंदी, नशामुक्ति, दहेज और बाल विवाह विरोधी अभियान को चलाया है। हम सबको राजनीति से हटकर एकजुट रहना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल विवाह की शिकार महिलाओं के बच्चे बौनेपन के शिकार होते हैं। दुनिया में लोगों की लंबाई बढ़ रही है, हमारे यहां कम हो रही है। दहेज प्रथा और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए एक सशक्त अभियान चलाया गया है। इसके साथ ही बिहार अब पूर्ण शराबबंदी से नशामुक्ति की ओर कदम बढ़ा चुका है। इस कार्य में मीडिया का सहयोग मिल रहा है, जिससे इन सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की रफ्तार और तेज हुई है। सामाजिक परिवर्तन की दिशा में शुरु हुई यह पहल कारगर साबित हो रही है। शराबबंदी से समाज में अमन, चैन कायम हुआ है और अब लोगों की आर्थिक स्थिति भी सुधरी है, जिसके कारण गरीबों के घर-आंगन में भी खुशहाली लौटी है, वह चाहे गांव हो या फिर शहर।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ण शराबबंदी से महिलाओं के जीवन स्तर में काफी बदलाव आया है और महिला सशक्तिकरण की दिशा में यह एक प्रभावी पहल साबित हो रहा है। पूर्ण शराबबंदी को लेकर सरकार और प्रशासन पूरी तरह सजग है लेकिन यह आम लोगों की सजगता और सहयोग से ही स्थायी और प्रभावी रुप से अपने मकसद में कामयाब हो पाएगा। शराबबंदी को लोगों का भरपूर समर्थन मिला। इस वर्ष 21 जनवरी को मानव श्रृंखला में चार करोड़ से अधिक लोगों ने अपनी भागीदारी दर्ज कराकर इतिहास कायम किया। अब बिहार दहेज प्रथा और बाल विवाह के खिलाफ उठ खड़ा हुआ है, जिसको देखते हुए 21 जनवरी 2018 को एक बार फिर मानव श्रृंखला पूरे बिहार में बनायी जाएगी। इसको सफल बनाने के लिए सभी लोगों का सहयोग जरूरी है।

सामाजिक कुरीतियों का खात्मा करने के लिए हर किसी को संकल्प लेने की आवश्यकता है।

अगर हम इसमें कामयाब होते हैं तो समाज में बड़ा परिवर्तन आएगा। बिना दहेज के शादी करने वालों को हम खुद ही फोन से बधाई देते हैं और मौका मिलने पर उनके घर पर भी जाते हैं। दहेज नहीं लेकर शादी करने वालों के प्रति यह सम्मान है। बिहार से बाहर के लोग हमारे इस तरह के अभियान को जानने के लिए बिहार आ रहे हैं। हाल ही में कर्नाटक से प्रतिनिधिमंडल शराबबंदी के संबंध में यहां अध्ययन करने के लिए आये थे। इन सब गतिविधियों से बिहार की प्रतिष्ठा बढ़ी है।