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साथ पत्नी

साथ पत्नी

Danik Bhaskar | Nov 21, 2017, 03:21 PM IST
सुशील मोदी के बेटे का कार्ड सुशील मोदी के बेटे का कार्ड

पटना. उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी अपने पुत्र की शादी से नया प्रयोग कर रहे हैं। वे इसे नयी शुरुआत भी मान रहे हैं। मोदी अपने बेटे की शादी में किसी प्रकार का कोई गिफ्ट नहीं लेंगे, इसके बाद भी अगर कोई गिफ्ट देना चाहते हैं तो वे अपना अंग दान करें। इसके साथ ही ये शादी दिन की होगी और किसी प्रकार के कोई भोज की व्यवस्था इसमें नहीं होगी। विवाहोत्सव के दौरान प्रसाद मिलेंगे। गिफ्ट में समान नहीं अंग दान लेंगे ...

- शादी में आने वाले आगंतुकों से सुशील मोदी किसी तरह का गिफ्ट नहीं लाने का अनुरोध किया है। वे कहते हैं कि शादी में गिफ्ट कैसा? क्यों? उनके अनुसार बहुत लोग शादी में गिफ्ट की इच्छा रखते हैं। नेताओं के यहां विवाह में बड़े-बड़े गिफ्ट आते हैं। वह इतना होता है कि शादी के खर्च से अधिक हो जाता है। लोग नेता जी को खुश करने के लिए महंगे-महंगे गिफ्ट देते हैं।

- मोदी ने कहा कि मुझे कोई भी गिफ्ट नहीं चाहिए। शादी स्थल पर दधिची देहदान समिति का स्टाल लगा होगा। इस समिति को उपमुख्यमंत्री आजकल प्रमोट कर रहे हैं। इसमें लोगों से मृत्यु के बाद उनका शरीर दान करने का अनुरोध किया जाता है। मोदी कहते हैं शादी के अवसर पर जो लोग उपहार देना चाहते हैं तो वे दधिची देहदान समिति के स्टाल पर जाकर यह काम कर सकते हैं।

- इस शादी की सबसे बड़ी खासियत है कि यह पूरी तरह दिन का विवाह होगा और अतिथियों के लिए किसी तरह का भोज नहीं होगा। उन्हें विवाहोत्सव के दौरान प्रसाद मिलेंगे। सुशील मोदी और जैस्सी मोदी के बड़े बेटे श्रीमंत उत्कर्ष का शुभ विवाह अनिता वर्मा व श्रीनवल की पुत्री यामिनी के साथ 3 दिसंबर को होगा। विवाह राजेन्द्रनगर के शाखा मैदान में होना तय हुआ।

- मोदी ने विवाह के लिए कोई कार्ड नहीं छपवाया है। उन्होंने विवाह में आमंत्रण के लिए ई-कार्ड तैयार करवाया है। इसे वे वाट्सएप और मेल के जरिए अपने लोगों को भेज रहे हैं। अलबत्ता फोन से ई-कार्ड मिलने की पुष्टि अवश्य करवा रहे हैं। फोन के माध्यम से वे सुनिश्चित कर रहे हैं कि कार्ड लोगों को मिल गया हो। मोदी के पुत्र का ई-कार्ड भी अनोखा है। इसमें उन्होंने किसी तरह के दहेज नहीं लेने का ऐलान किया है।

- शादी कार्ड नहीं छपवाने पर मोदी कहते हैं कि यह सब सिर्फ दिखावा है। अब तो गरीब लोग भी कार्ड छपवा रहे हैं और इसके लिए काफी धनराशि खर्च करते हैं। कुछ लोग तो एक-एक कार्ड के लिए 300-500 रुपए तक खर्च कर रहे हैं। यह बर्बादी ही तो है। इसे रोकना चाहिए। मैं आम लोगों से भी अपील करता हूं कि वे कार्ड न छपवाएं और ई-कार्ड का इस्तेमाल करें।