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उपनिदेशक

उपनिदेशक

Danik Bhaskar | Nov 20, 2017, 01:00 PM IST

पटना. जनगणना, पशुगणना से लेकर चुनावी कार्यों तक की जिम्मेदारी दिए जाने वाले शिक्षकों को अब खुले में शौच से मुक्त अभियान से जोड़ा गया है। दो जिलों के प्रखंड विकास पदाधिकारियों ने यह आदेश जारी किया है। शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। मंत्री, कृष्णनंदन वर्मा ने भी इस आदेश को गलत करार दिया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि खुले में शौच से मुक्त करने के लिए स्थानीय स्तर पर लोगों को जागरूक किए जाने की जरूरत है। लोटा पार्टी के साथ सेल्फी लेंगे मास्टर जी...

- जारी आदेश के तहत मास्टर जी, सुबह अपने क्षेत्र के खुले स्थान, यानि नदी, नाले या खेत की ओर जाएंगे। वहां अगर कोई लोटा पार्टी उन्हें दिखती है तो उसे खुले में शौच करने की सलाह देंगे। उसके साथ सेल्फी लेंगे और इसकी रिपोर्ट प्रखंड विकास पदाधिकारी को देंगे।
- व्हाट्सएप्प के माध्यम से इस पूरे अभियान की रिपोर्ट लेने की बात है। शिक्षकों को जैसे ही यह आदेश मिला, वे भड़क गए।
- बोले-आदेश अपमानजनक है। यह केवल हमारा अपमान नहीं, बल्कि देश की भावी पीढ़ी का अपमान है। उनके सामने एक शिक्षक की छवि किस प्रकार की बनेगी? इस पर अधिकारियों को सोचना चाहिए। अति उत्साह में ऐसे आदेश जारी नहीं होने चाहिए।

प्रचार-प्रसार तक तो ठीक, लेकिन खुले में शौच की निगरानी दिए जाने से शिक्षकों में नाराजगी
- कुढ़नी देव बीडीओ की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत पंचायतों को खुले में शौच मुक्त किए जाने की योजना है।
- इसके तहत शिक्षकों की एक टीम बनाई जाएगी, जो सुबह पांच बजे से अपने क्षेत्र के खुले में शौच करने वालों की निगरानी करेगी।
- शिक्षक, जो लोग खुले में शौच करने आएंगे, उनके साथ सेल्फी लेकर रिपोर्ट भेजेंगे। अगर कोई व्यक्ति खुले में शौच नहीं करने रहा है, तो संबंधित क्षेत्र की सेल्फी के साथ तस्वीर उपलब्ध कराएंगे।
- इसके लिए नोडल पदाधिकारी से लेकर वार्ड स्तरीय कमेटी तक गठित की गई है। इस कमेटी में शिक्षकों को शामिल किया गया है। प्रचार-प्रसार तक तो ठीक, लेकिन खुले में शौच की निगरानी दिए जाने से शिक्षकों में नाराजगी है।

शैक्षणिक व्यवस्था होगी प्रभावित, समाज की निगाह में खराब होगी शिक्षकों की छवि
- बिहार राज्य माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने इसे जल्दबाजी में लिया गया निर्णय करार दिया है।
- कहा कि पूरे प्रदेश में इंटर स्तर की जांच परीक्षा चल रही है। फिर मैट्रिक की जांच परीक्षा शुरू होगी। बिहार बोर्ड के रजिस्ट्रेशन परीक्षा फॉर्म के ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में दिक्कत के कारण हुई गड़बड़ी को सुधरवाने में भी शिक्षक जुटे हैं।
- संघ खुले में शौच से मुक्ति अभियान का समर्थन करता है। एक दर्जन से अधिक गैर शैक्षणिक कार्यों में जुटे शिक्षक मानसिक शारीरिक दबाव के बावजूद इस अभियान में साथ देने को तैयार हैं, लेकिन इसकी शुरुआत पंचायत स्तर से होनी चाहिए। शिक्षक अपने स्कूल क्षेत्र में रहते नहीं हैं।
- स्वच्छता की सफलता निरंतरता के लिए मानसिकता के निर्माण के लिए सीधा संवाद करना चाहिए। माध्यमिक उच्च माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों का आवास स्कूल स्तर पर नहीं होता है। ऐसे में सुबह स्वच्छता की जांच कैसे संभव होगी? यह फरमान अपमानजनक, पीड़ादायक शोषणकारी है।

निर्धारित कक्षाओं पर पड़ता है असर
- राज्य के प्रारंभिक माध्यमिक स्तर पर 200 से 220 दिन की कक्षाएं अनिवार्य हैं। माध्यमिक स्तर पर 160 से 180 दिन की कक्षाएं ही हो पाती हैं।
- उच्च माध्यमिक स्तर पर इतने दिन भी कक्षाओं का आयोजन इंटरस्तरीय संस्थानों में नहीं हो पाता है। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षक संघ का कहना है कि शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने के कारण यह स्थिति उत्पन्न होती है।

शिक्षा विभाग ने नहीं किया है कोई आदेश जारी
- शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षकों को खुले में शौच मुक्त करने के लिए जांच अभियान में लगाए जाने का कोई आदेश नहीं जारी किया गया है।
- प्राथमिक शिक्षा निदेशालय माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के अधिकारियों ने बताया कि डीईओ या डीपीओ के स्तर पर आदेश नहीं जारी किया गया है।
- शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने कहा कि शिक्षकों को इस प्रकार के कार्य में नहीं लगाया जाना चाहिए।
- उन्होंने कहा कि खुले में शौच से मुक्ति का अभियान आवश्यक है। इसके लिए कार्यक्रम तैयार किए गए हैं। जागरूकता फैलाने का अभियान चल रहा है। लेकिन, शिक्षकों को जांच का जिम्मा नहीं दिया जाना चाहिए।