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गए थे।

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Danik Bhaskar | Nov 24, 2017, 03:24 PM IST

पटना. समान काम के लिए समान वेतन देने के उच्च न्यायालय के फैसले से शिक्षक नियुक्ति फिलहाल नहीं होगी। इस वर्ष टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के नियोजन पर प्रश्नचिह्न लग गया है। इस फैसले ने शिक्षकों के सेवा शर्त को भी लटका दिया है। दिसंबर तक नियोजित शिक्षकों के लिए सेवा शर्त जारी कर दिया जाना था, लेकिन अब सेवा शर्त लागू अभी नहीं हो सकेगी।

इस मामले को लेकर प्रधान सचिव आरके महाजन ने विभाग के संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार विमर्श कर रहे हैं। इसके पहले शिक्षा मंत्री ने कहा था कि विधि विशेषज्ञों से विमर्श के बाद सर्वोच्च न्यायालय जाएगी। फैसले के खिलाफ सरकार का सुप्रीम कोर्ट जाना तय है। सरकार ने साफ कर दिया है कि इतनी राशि नहीं है कि शिक्षकों को न्यायालय के आदेशानुरूप वेतन दिया जा सके। प्राथमिक और मध्य विद्यालय में शिक्षकों के नियोजन पात्रता के लिए पिछले दिनों टीईटी रिजल्ट दिया गया था, जिसमें लगभग 35 हजार अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए थे। दिसंबर में टीईटी का और संशोधित रिजल्ट जारी होना है।

उच्च न्यायालय के फैसले के आधार पर साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों को वेतन देने में 11 से 14 हजार करोड़ सालाना खर्च होंगे। 2009 से एरियर देने की स्थिति में 35 से 50 हजार करोड़ और बढ़ जाएंगे। 2006 से राज्य में शिक्षक नियोजन के लिए नई नियमावली बनाकर नियोजन शुरू किया गया था। इसमें कई संशोधन हुए। इसके पहले शिक्षा मित्र के रूप में बहाल 1.15 लाख को भी नियोजित शिक्षक की तरह ही मानदेय तय किया गया। प्राथमिक के अन ट्रेड शिक्षकों को 4 हजार और ट्रेंड को साढ़े चार हजार रुपए मानदेय दिया गया। बाद में 2009 में दो बार एक-एक हजार रुपए की बढ़ोतरी हुई थी। 2013 में एकमुश्त तीन-तीन हजार रुपए बढ़ोतरी की गई थी। 2015 से जुलाई से वेतनमान दिया गया है। अब सातवें वेतन का भी लाभ मिलना है।

नियोजित शिक्षकों के सेवा शर्त का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। दिसंबर के अंत तक इसे लागू भी कर दिया जाता, लेकिन अब सेवा शर्त सरकार लागू नहीं करेगी। पांचवें चरण के तरह उच्च और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों का नियोजन भी चल रहा है। मधेपुरा, सुपौल सहित 11 जिलों में शिक्षकों के नियोजन के लिए इस माह ही नई तिथि मिलने वाली थी।