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पटरी पर प्रदर्शन किया या ट्रेनें रोकीं तो नहीं लड़ पाएंगे चुनाव

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 04:17 AM IST

Patna News - रेल को रोका तो चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। चौंकिए नहीं। अब ऐसा ही होगा। इसको लेकर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के डीजी अरुण...

Patna - can not fight on tracks or stop trains if not stopped
रेल को रोका तो चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। चौंकिए नहीं। अब ऐसा ही होगा। इसको लेकर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के डीजी अरुण कुमार ने पूर्व-मध्य रेलवे के सभी आला अफसरों को विशेष दिशा-निर्देश दिए हैं। इसके तहत रेलवे एक्ट की धारा 174 के तहत कार्रवाई होगी। बड़ी संख्या में ऐसे केस में कनविक्शन कराने के आदेश दिए गए गए हैं। यानी ट्रेन रोकने या रेल का चक्का जाम करने वालों की खैर नहीं है। नेता, कार्यकर्ता, छात्र हो या कोई आैर...रेल रोकने के बाद सजा के साइड इफेक्ट से बचना मुश्किल होगा।

डीजी ने अफसरों से कहा है कि ट्रेन रोकने या रेल परिचालन बाधित करने वालों के खिलाफ धारा 174 के तहत मामला दर्ज किया जाए। फिर घटनास्थल से जुड़े वीडियो फुटेज, फोटो आदि साक्ष्यों को कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश किया जाए। इससे आसानी से दोषियों को सजा मिल सकेगी। कनविक्शन होने पर दोषी चुनाव नहीं लड़ पाएगा। चुनाव आयोग के नियमों में यह प्रावधान है।’

आरपीएफ बहाली परीक्षा 19 दिसंबर से | पेज 9

फोटो या वीडियो को सबूत बनाकर कोर्ट से दिलाई जाएगी सजा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरपीएफ के डीजी अरुण कुमार। (बाएं)

अभी क्या होता है आैर आगे क्या होगा?

क्या है धारा 174

रेलवे एक्ट 1989 की धारा 174 के तहत यदि कोई व्यक्ति रेल परिचालन में बाधा उत्पन्न करता है तो यह अपराध है। इसको लेकर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज करने के साथ ही जुर्माना से लेकर 2 साल तक की सजा तक हो सकती है।

वर्तमान में रेल रोकने वालों के खिलाफ भी रेलवे एक्ट की धारा 174 के तहत कार्रवाई होती है। पर कनविक्शन का ग्राफ काफी नीचे हैं। आगे अब आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कराने के साथ ही सजा दिलाने की प्रक्रिया तेज की जाएगी।

दूसरे राज्यों में धारा 174 के तहत हो रही कार्रवाई


बिहार में रोज-रोज रोकी जाती हैं ट्रेनें

दरअसल अन्य राज्यों के मुकाबले बिहार में स्थिति थोड़ी अलग है। यहां सड़क हादसे के विरोध में पटरी जाम होता है। ट्रेन हादसा होने पर बोगियों में आग तक लगाने की दुस्साहसिक हरकत होती है। राजनीतिक आंदोलन के दौरान भी ट्रेन से स्टेशन तक को निशाना बनाया जाता है। परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर ट्रेन रोक कर विरोध दर्ज कराया जाता है। विभिन्न कारणों से बराबर रेल परिचालन बाधित करने के साथ ही रेल संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है। आरपीएफ के डीजी भी मानते हैं कि यहां विधि-व्यवस्था की समस्या अधिक हैं। ऐसे हालात में रेलवे एक्ट में दोषियों को सजा मिलने पर दूसरों को भी कड़ा मैसेज मिलेगा।

जेल-जुर्माना दोनों


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