सीबीआई ने नेताओं को बचाने की हड़बड़ी में तर्कों को ताक पर रखा

Patna News - समाचारों पत्रों में खबर छपने के बाद बॉबी कांड की सीबीआई जांच की तरह-तरह से चर्चा होने लगी। इसमें एसएसपी किशोर...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 08:35 AM IST
Patna News - cbi keeps logic in the rush to save politicians
समाचारों पत्रों में खबर छपने के बाद बॉबी कांड की सीबीआई जांच की तरह-तरह से चर्चा होने लगी। इसमें एसएसपी किशोर कुणाल के नेतृत्व पर उठाई गई उंगली की चर्चा भी शामिल थी। इस कांड में सीबीआई की फाइनल रिपोर्ट की सुनवाई और निर्णय सुनाने के बाद माननीय न्यायिक दंडाधिकारी एचपी चक्रवर्ती ने आलोचनात्मक टिप्पणी की थी। उन्होंने यह लिखा था, ‘मुझे अफसोस है कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक किशोर कुणाल द्वारा जांच-पड़ताल के दौरान दिए गए निर्देश सही दिशा में नहीं थे। इससे जांच-पड़ताल गलत दिशा में होती रही जैसा कि सीबीआई ने बताया है। ऐसी आशा उनके समान उच्च पदस्थ व्यक्ति से नहीं की जा सकती कि वह जांच को गलत दिशा देंगे।’

दूसरी ओर, उच्च न्यायालय में दायर की गई याचिका में इस बात पर अश्चर्य व्यक्त किया गया कि माननीय न्यायिक दंडाधिकारी ने सीबीआई की फाइनल रिपोर्ट की खामियों पर ध्यान दिए बिना उसे मंजूर कर लिया। वह याचिका स्थानीय देवेंद्र प्रसाद सिंह, बिपिन बिहारी सिन्हा, एसएच रजी, ज्ञानू सिंह और किरण शाही ने संयुक्त रूप से दर्ज कराई थी। इनके वकील ब्रजकिशोर प्रसाद ने इस फैसले को लेकर कुछ ऐसी प्रतिक्रिया दी, ‘दो डॉक्टरों पर गलत मृत्यु प्रमाणपत्र देने, राजेश्वरी सरोज दास पर हत्या का सबूत नष्ट करने और छुपाने तथा रघुवर झा और विनोद कुमार पर हत्या का स्पष्ट आरोप है। ऐसे मामले को रफ-दफा करना कुछ नेताओं के हित में भले हो, किंतु ‘कानून के शासन’ के खिलाफ है।’ वहीं एक समाजशास्त्री की प्रतिक्रिया आई, ‘बॉबी की हत्या की घटना से औरतों का शोषण, अपने पद और प्रतिष्ठा के लिए लड़की का इस्तेमाल और राजनीति से सेक्स के बढ़ते रिश्ते की समस्याएं भी जुड़ी हुई हैं। बॉबी कांड के अभियुक्तों के बेनकाब होने से इन समस्याओं के समाधान में भी मदद मिलती। लेकिन सीबीआई यह मौका क्यों देने लगी?’

इस तरह से सीबीआई पर सवाल खड़े होने लगे क्योंकि उसकी रिपोर्ट के कई तथ्य परस्पर विरोधाभाषी थे। उसका झूठ सच नहीं लग रहा था। वैसे भी झूठ तो झूठ ही होता है। लाख कोशिश के बावजूद उसे कभी सच नहीं बनाया जा सकता और सच को झुठलाया भी नहीं जा सकता। हां, उसे दबाया जरूर जा सकता है। लेकिन, एक-न-एक दिन वह सामने आ ही जाता है। सीबीआई ने तो कहानी गढ़ कर आरोपियों व संलिप्तों को बचा लिया, मगर एक दिन वह झूठी कहानी भी लोगों के बीच आ गई। सचकित लोग दांतों तले उंगली दबाने लगे। देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी के प्रति लोगों के विश्वास को ठेस पहुंची। क्योंकि कुछ सत्ताधारी नेताओं को बचाने की हड़बड़ी में सीबीआई ने सभी तर्कों को ताक पर रख दिया।

-सुजीत कुमार ‘पप्पू’

पटना का बहुचर्चित बॉबी कांड

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बॉबी कांड को बंद करते समय सीबीआई की फाइनल रिपोर्ट के आधार पर एसजेएम ने एसएसपी की कार्यशैली पर टिप्पणी की। दूसरी ओर, इस कांड में याचिकाकर्ताओं के वकील ने फैसले को नेताओं के हित में करार देते हुए उसे ‘कानून के शासन’ के खिलाफ बताया।

किस्त 13

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