बिहार / फरक्का बराज और बाढ़ व सिल्टेशन की समस्या का अध्ययन करेगी केन्द्रीय कमेटी

फरक्का बराज बांध, फाइल फोटो। फरक्का बराज बांध, फाइल फोटो।
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फरक्का बराज बांध, फाइल फोटो।फरक्का बराज बांध, फाइल फोटो।

  • केन्द्र ने बनायी छह सदस्यीय कमेटी, जल संसाधन विभाग करेगा राज्य का प्रतिनिधित्व

दैनिक भास्कर

Jan 28, 2020, 07:22 PM IST

पटना. केन्द्र सरकार ने फरक्का बराज और बिहार में बाढ़ व गाद की समस्या के अध्ययन के लिए केन्द्रीय टीम गठित की है। इस टीम में सूबे का जल संसाधन विभाग बिहार का प्रतिनिधित्व करेगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्रीय जल संसाधन मंत्री से हुई मुलाकात में फरक्का बराज से होने वाली समस्याओं के निदान की जरूरत को दोहराया था। जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने भी कई अवसरों पर गंगा की अविरलता और उसे गाद मुक्त करने के लिए केन्द्र का दरवाजा खटखटाया है। केन्द्र ने समुचित कार्रवाई का आश्वासन दिया था।

मंगलवार को केंद्रीय जल आयोग, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग, जल शक्ति मंत्रालय द्वारा छह सदस्यीय अध्ययन कमेटी गठन की घोषणा की गयी। इस कमेटी में बिहार के जल संसाधन विभाग से भी एक अधिकारी प्रतिनिधि के रूप में रहेंगे। जल संसाधन मंत्री संजय झा ने पिछले वर्ष जून और फिर सितम्बर में व्यक्तिगत तौर पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से मिल कर बाढ़ के दौरान गंगा नदी में गाद की समस्या के स्थायी निदान और फरक्का बराज के मुद्दे को उनके द्वारा पुनः उठाया। केंद्रीय मंत्री ने 31 अक्टूबर को पत्र लिखकर समुचित कार्रवाई का विश्वास दिलाया था।


बिहार के हितों को ध्यान में रखकर लिया फैसला: मंत्री
संजय झा ने कहा कि केंद्र ने बिहार के हितों को ध्यान में रख कर फरक्का बराज के अध्ययन के लिए कमेटी गठित करने का फैसला लिया है। फरक्का बराज के कारण बिहार में जल समस्या के निदान की दिशा में यह एक कारगर कदम होगा। फरक्का बराज पर गंगा का पानी अवरुद्ध होने के कारण बिहार के हिस्सों में गाद जमा होने की प्रक्रिया और जटिल होती जा रही है। इसके बावजूद फरक्का बराज के ऑपरेशन में बिहार की कोई साझेदारी नहीं थी। कमिटी में बिहार के प्रतिनिधि होने से सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है।


बांग्लादेश समझौते की जिम्मेवारी बिहार पर
गंगाजल में बिहार को मनोनुकूल हिस्सेदारी नहीं मिलने के बावजूद, बांग्लादेश-भारत के समझौते के अनुसार, बांग्लादेश के लिए आवश्यक जल की उपलब्धता की पूरी जिम्मेवारी बिहार पर रहता है। उत्तराखंड के टिहरी डैम और यूपी के भिन्गोरा, बिजनौर, नरोरा, कानपुर में गंगा पर कई बराज बन गए। इससे लीन पीरियड में बिहार को बक्सर में मात्र 400 क्यूसेक पानी प्राप्त होता है, जबकि फरक्का बराज पर बिहार को स्वीकृत 1500 क्यूसेक जलस्राव कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, महानंदा आदि नदियों के जल से पूरा करना पड़ता है।

नीतीश उठाते रहे हैं गंगा की अविरलता का मामला
गंगा की अविरलता का मुद्दा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राष्ट्रीय मंचों पर कई वर्षों से उठाते आ रहे हैं। वर्ष 2017 में उनकी पहल पर जल संसाधन विभाग ने फरक्का बराज और गंगा की अविरलता पर दो राष्ट्रीय सम्मेलेन आयोजित किया। इसके माध्यम से एकमत बनाने की कोशिश भी की थी। इन सम्मेलनों द्वारा जारी पटना डिक्लेरेशन और दिल्ली डिक्लेरेशन में गाद की समस्या के समुचित अध्ययन की बात प्रमुख है जिसे राज्य सरकार अब दृढ़ता से केन्द्र के समक्ष उठा रही है।

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