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माइंडसेट बदलने को हमें मेहनत करनी पड़ रही है

2 वर्ष पहले
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अभी भी 10 साल का भाई 16 साल की बहन के साथ बाहर जाता है। इसे बदलिए। - डॉ. एन. विजयालक्ष्मी

प्रणय प्रियंवद। पटना

डॉ. एन. विजयालक्ष्मी सीनियर आईएस हैं। वह दक्षिण भारत की रहने वाली हैं। अभी वह पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की प्रधान सचिव हैं और साथ ही महिला विकास निगम में मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर हैं। काम को प्राथमिकता देना और चैलेंजेज स्वीकार कर उनसे दो-दो हाथ करना इनकी फितरत में शुमार है। नवादा की डीएम के रूप में विजयालक्ष्मी ने उन दिनों काम किया जब सरकार चाइल्ड मैरेज को लेकर इतनी जागरूक नहीं थी। इन्होंने महिला अपराध नियंत्रण कोषांग सह परामर्श केन्द्र पहली बार शुरू किया। नवादा के हिसुआ ब्लॉक को पहला चाइल्ड लेबर 2फ्री ब्लॉक घोषित किया गया। उनके इन्हीं प्रयासों को देखते हुए महिला विकास निगम की भी जिम्मेवारी उन्हें दी गई। दक्षिण भारत के परिवेश से आकर बिहार के मन मिजाज को समझना और फिर यहां सकारात्मक बदलाव लाना चुनौती थी लेकिन उन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से इसे कर दिखाया।

उनके हसबैंड डॉ. एस. सिद्धार्थ भी आईएएस हैं। घर से लेकर बाहर तक कई जिम्मेदारियां विजयालक्ष्मी पर हैं पर वह कहती हैं उनके लिए तो यह डेली रूटीन की तरह है। बेटी जब छोटी थी तब थोड़ी मुश्किल थी लेकिन अब कोई मुश्किल नहीं। हम दोनों हसबेंड-वाइफ की प्राथमिकता में वर्क सबसे ऊपर रहा। बेटी ने भी शायद समझ लिया कि मम्मी ऐसी ही होती हैं। बच्चों को आप चिपकू बनाएंगे तो वे चिपकू बनेंगे ही।

वर्षों से बिहार में रहते हुए यहां के कई पर्व त्योहार इन्होंने अपना लिए हैं। ये छठ भी करती हैं और बाकी त्योहारों में भी उसी उत्साह से शिरकत करती हैं। ये मिडिल क्लास फैमिली से आती हैं लेकिन घर में खुलापन वाला माहौल था और वह अकेले कॉलेज गईं। जब आईएएस की परीक्षा पास की तो एकेडमी भी वह अकेले गईं। वहां देखा कि कई लड़कियां अपने पिता के साथ आईं थीं। विजयालक्ष्मी पिछले 24 साल से आईएएस रहते हुए कई पदों पर रह चुकी हैं। वह कहती हैं कि वीमेन इंपावरमेंट का मतलब है अवसर। अवसर बराबर मिले और इसका इस्तेमाल महिलाएं करें तभी स्थितियां बदल सकती हैं। जेंडर, कास्ट बीच में नहीं आना चाहिए। समाज अभी भी अपनी जिम्मेदारी नहीं समझता। क्या वजह है कि ट्रेनें सुरक्षित नहीं हैं। महिला को बाहर भेजने में रात होते ही क्यों डर जाता है परिवार? पुरुष की छाया क्यों महिला के साथ हमेशा रहती है? 10 साल का कोई भाई 16 साल की बहन को लेकर बाहर क्यों जाता है? इसके लिए पूरा परिवार जिम्मेवार है। सभी अपना काम बिना डर के क्यों नहीं कर सकते? अपने ही देश में जहां हम आजाद हैं ऐसा क्यों है? एनिमल वर्ल्ड हो गया यह तो? पुरुष को देख रात में महिला क्यों भागेगी?

प्रणय प्रियंवद। पटना

डॉ. एन. विजयालक्ष्मी सीनियर आईएस हैं। वह दक्षिण भारत की रहने वाली हैं। अभी वह पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की प्रधान सचिव हैं और साथ ही महिला विकास निगम में मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर हैं। काम को प्राथमिकता देना और चैलेंजेज स्वीकार कर उनसे दो-दो हाथ करना इनकी फितरत में शुमार है। नवादा की डीएम के रूप में विजयालक्ष्मी ने उन दिनों काम किया जब सरकार चाइल्ड मैरेज को लेकर इतनी जागरूक नहीं थी। इन्होंने महिला अपराध नियंत्रण कोषांग सह परामर्श केन्द्र पहली बार शुरू किया। नवादा के हिसुआ ब्लॉक को पहला चाइल्ड लेबर 2फ्री ब्लॉक घोषित किया गया। उनके इन्हीं प्रयासों को देखते हुए महिला विकास निगम की भी जिम्मेवारी उन्हें दी गई। दक्षिण भारत के परिवेश से आकर बिहार के मन मिजाज को समझना और फिर यहां सकारात्मक बदलाव लाना चुनौती थी लेकिन उन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से इसे कर दिखाया।

उनके हसबैंड डॉ. एस. सिद्धार्थ भी आईएएस हैं। घर से लेकर बाहर तक कई जिम्मेदारियां विजयालक्ष्मी पर हैं पर वह कहती हैं उनके लिए तो यह डेली रूटीन की तरह है। बेटी जब छोटी थी तब थोड़ी मुश्किल थी लेकिन अब कोई मुश्किल नहीं। हम दोनों हसबेंड-वाइफ की प्राथमिकता में वर्क सबसे ऊपर रहा। बेटी ने भी शायद समझ लिया कि मम्मी ऐसी ही होती हैं। बच्चों को आप चिपकू बनाएंगे तो वे चिपकू बनेंगे ही।

वर्षों से बिहार में रहते हुए यहां के कई पर्व त्योहार इन्होंने अपना लिए हैं। ये छठ भी करती हैं और बाकी त्योहारों में भी उसी उत्साह से शिरकत करती हैं। ये मिडिल क्लास फैमिली से आती हैं लेकिन घर में खुलापन वाला माहौल था और वह अकेले कॉलेज गईं। जब आईएएस की परीक्षा पास की तो एकेडमी भी वह अकेले गईं। वहां देखा कि कई लड़कियां अपने पिता के साथ आईं थीं। विजयालक्ष्मी पिछले 24 साल से आईएएस रहते हुए कई पदों पर रह चुकी हैं। वह कहती हैं कि वीमेन इंपावरमेंट का मतलब है अवसर। अवसर बराबर मिले और इसका इस्तेमाल महिलाएं करें तभी स्थितियां बदल सकती हैं। जेंडर, कास्ट बीच में नहीं आना चाहिए। समाज अभी भी अपनी जिम्मेदारी नहीं समझता। क्या वजह है कि ट्रेनें सुरक्षित नहीं हैं। महिला को बाहर भेजने में रात होते ही क्यों डर जाता है परिवार? पुरुष की छाया क्यों महिला के साथ हमेशा रहती है? 10 साल का कोई भाई 16 साल की बहन को लेकर बाहर क्यों जाता है? इसके लिए पूरा परिवार जिम्मेवार है। सभी अपना काम बिना डर के क्यों नहीं कर सकते? अपने ही देश में जहां हम आजाद हैं ऐसा क्यों है? एनिमल वर्ल्ड हो गया यह तो? पुरुष को देख रात में महिला क्यों भागेगी?

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