सीवान के प्राइवेट क्लिनिक में लगे हैं ताले, सीमित डॉक्टर ही इमरजेंसी के मरीजों का कर रहे हैं इलाज

Patna News - धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टरों के क्लीनिकों में ताला लटक गया है। डॉक्टर व कर्मियों ने ताला बंद कर ओपीडी...

Mar 29, 2020, 08:40 AM IST

धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टरों के क्लीनिकों में ताला लटक गया है। डॉक्टर व कर्मियों ने ताला बंद कर ओपीडी सेवा बंद कर दी है। इस तरह सीवान शहर के अधिकतर डॉक्टरों के नर्सिंग होम या क्लीनिक में ताला लटका दिया रहा है। अगर कोई मरीज जा रहा है तो गेट के बाहर ही काफी देर तक आवाज लगानी पड़ रही है। फिर भी कई डॉक्टरों के नर्सिंग होम से कोई आवाज नहीं आ रही है। काफी आवाज के बाद कोई कर्मी अंदर से ही जवाब दे रहा है कि डॉक्टर साहब नहीं है। हालांकि कुछ डॉक्टर मानवता की सेवा में भी लगे हुए है। वे इमरजेंसी मरीजों का इलाज कर रहे है। अस्पताल रोड में एक महिला डॉक्टर के नर्सिंग हाेम के बाहर हुसैनगंज प्रखंड के हबिबनगर गांव की एक महिला आई थी। वह सुबह 1 बजे काफी अावाज लगा रही थी। लेकिन अंदर से कोई भी कर्मी जवाब नहीं दे रहा था। इससे वह काफी परेशान थी। यह तो महज एक उदाहरण है। लेकिन इसी तरह का नाजारा अधिकतर डॉक्टरों के क्लीनिक व नर्सिंग होम के पास देखने को मिल रहा है। एमआईए के सचिव डॉ. शरद चौधरी ने कहा कि ओपीडी मरीजों को नहीं देखना है। इसलिए डॉक्टर क्लीनिक को बंद रखे हुए है। क्लीनिक को खोलने पर मरीज अनावश्यक रूप से भीड़ कर रहे है। इंमरजेंसी मरीजों का इलाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे रोज पांच इमरजेंसी मरीजों का इलाज कर रहे है। मरीजों का घर से चलने से पहले ही उसके बारे में पूरी जानकारी ली जा रही है और यह स्पष्ट हो जा रहा है कि इमरजेंसी मरीज है तो उसे बुलाकर इलाज किया जा रहा है। शहर के सभी डॉक्टर मौजूद है। उनके यहां भी अगर वास्तव में इमरजेंसी मरीज आ रहे है तो उनका इलाज हो रहा है। इमरजेंसी की आड़ में वैसे भी मरीज आ रहे है जिनका इलाज या ऑपरेशन को टाला जा सकता है। इसलिए ऐसे मरीज का इलाज नहीं हो रहा है। इधर, हुसैनगंज प्रखंड के गड़ार पंचायत के मुखिया मनोज सिंह ने डॉक्टरों पर आराेप लगाया कि रात में इमरजेंसी मरीजों को ले जाने पर डॉक्टर इलाज नहीं कर रहे है।

प्रसव कराने आनेवाली महिलाओं के लिए की गई है अलग व्यवस्था

सदर अस्पताल के जेनरल वार्ड में भर्ती नहीं हुए एक भी मरीज

सदर अस्पताल में चार दिनों से एक भी मरीज भर्ती नहीं किए गए है। इससे जेनरल वार्ड का बेड खाली दिख रहा है। सदर अस्पताल के डॉ क्टर मरीजों का इलाज करने के बाद उसे भर्ती कर रहे है या घर भेज रहे है। इसे देखने के लिए शुक्रवार की सुबह में सदर अस्पताल का जायजा लिया गया। अस्पताल के जेनरल वार्ड में देखा गया। यहां पर हमेशा 10 से ज्यादा मरीज भर्ती रहते थे। लेकिन शुक्रवार की सुबह तक महज तीन मरीज भर्ती थे। दो मरीज एक ही परिचार के बच्चे थे। इसलिए वे एक ही बेड पर थे। उसे 9 दिन पहले भर्ती किया गया था। जबकि क मरीज कौशल्या सोमवार को भर्ती हुई है। लेकिन इसके बाद से अभी तक कोई दूसरा सामान्य रोग का भी मरीज भर्ती नहीं हुआ है। इससे लगता है कि अब डॉक्टर भी इलाज के बाद मरीजों को भर्ती करने से परहेज कर रहे है। इमरजेंसी कक्ष में डॉ. मुकेश कुमार ड्यूटी पर मौजूद थे। हालांकि इमरजेंसी कक्ष में भी मरीजों के भर्ती होने की संख्या कम थी। इमर्जेंसी कक्ष में महज चार मरीज भर्ती थे। जबकि वहां पर 12 बेड है। लॉक डाउन से पहले तक सभी बेड भरा रहता था। लेकिन अब खाली दिख रहा है। इधर,डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि वे सुबह आठ बजे ड्यूटी पर आए। उसके बाद तीन मरीजों को भर्ती किया। इधर, सदर अस्पताल के दवा वितरण काउंटर के पास भी दवा लेने वालों के लिए सामाजिक दूरी बनाए रखने को लेकर घेरा बना दिया गया है।

आईएमआईए के सचिव बोले-मरीजों से जानकारी लेने के बाद इमरजेंसी होने पर ही बुलाकर किया जा रहा है इलाज

सदर अस्पताल में कम पहुंच रही हैं महिलाएं

सदर अस्पताल के इमरजेंसी में ड्यूटी पर मौजूद डॉ. मुकेश कुमार व अन्य कर्मी।

अस्पताल रोड में बंद महिला डॉक्टर का नर्सिंग होम।

सीवान| सदर अस्पताल में प्रसव कराने अाने वाली महिलाओं की संख्या कम हो गई है। एक तरह से 60 फीसदी प्रसव में गिरावट आई है। जरुरत के अनुसार, सिजेरियन भी हो रहा है। सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. एमके अालम ने बताया कि यहां पर प्रसव पूरी तरह से सुरक्षित है। कोरोना वायरस को देखते हुए सभी तरह के एहतियात बरती जा रही है। प्रसव कराने के दौरान महिलाओं से दूरी बरती जा रही है। जरुरत पड़ने पर मास्क व ग्लोब पहन कर डॉक्टर व महिला कर्मी काम कर रही है। वार्ड में भर्ती होने की स्थिति में बेड की भी कुछ दूरी बढ़ा दी गई है। ताकि भर्ती होने पर भी कोरोना वायरस का संक्रमण नहीं हो सके। वहीं प्रसव कराने आने वाली महिलाओं के साथ उसके उसके अभिभावकों से भी अपील की जा रही है कि यहां पर देखभाल के लिए कर्मी है। इसलिए वे अनावश्यक अस्पताल में भीड़ नहीं लगाएं। वे भी सामाजिक दूरी बनाए रखें। प्रसव कराने आने वाली महिलाओं को अगर जरुरत हो रही है तो उसका सीजेरियन भी हो रहा है। फिर भी बाहर में मरीजों के अभिभावक लॉक डाउन का पालन नहीं कर रहे है और वे आपस में समीप में रह रहे है। जबकि उन्हें लॉक डाउन का पालन करते हुए सामाजिक दूरी भी बनाकर रहनी चाहिए।

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