पीपीयू में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आयोग ने मांगी रिक्ति

Patna News - पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में लगातार दूसरा सत्र शिक्षकों के लगभग 40 फीसदी खाली पदों के साथ ही शुरू हुआ। 2018 में जब...

Sep 15, 2019, 06:11 AM IST
पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में लगातार दूसरा सत्र शिक्षकों के लगभग 40 फीसदी खाली पदों के साथ ही शुरू हुआ। 2018 में जब विश्वविद्यालय की शुरुआत हुई, तो मगध विवि को दो हिस्सों में बांटा गया। इसमें शिक्षकों की संख्या का भी बंटवारा हुआ और पीपीयू के हिस्से लगभग 1300 शिक्षक आए। लेकिन इसमें लगभग 500 पद खाली ही थे।

पाटलिपुत्र विवि प्रशासन ने शिक्षकों के खाली पदों से जो समस्या हो रही है, उससे उबरने के लिए पार्ट टाइम शिक्षकों की नियुक्ति करने का निर्णय लिया था। इसमें 27 विषयों में 582 शिक्षकों की नियुक्ति की योजना बनी लेकिन अबतक किसी की नियुक्ति नहीं हुई है। हालांकि पांच विषयों के लिए इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और 18 सितंबर तक दो अन्य विषयों में पार्ट टाइम शिक्षकों की नियुक्ति के लिए इंटरव्यू हो जाएंगे। इस बीच कॉलेजों में शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति करनेवाले विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने पाटलिपुत्र विवि से भी रिक्तियां मांगी हैं। इसको लेकर विवि प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। कुलपति प्रो. जीसीआर जायसवाल ने सभी कॉलेजों के प्राचार्यों को शीघ्र ही सभी रिक्त पदों की जानकारी अपडेट करने का निर्देश दिया है, जिससे विवि सेवा आयोग को आगे की प्रक्रिया के लिए भेजा जा सके।

90 शिक्षकों के ज्वाइन करने के बाद भी पद खाली

पाटलिपुत्र विवि में शिक्षकों की संख्या लगातार कम ही रही है। 2003 में शिक्षकों की नियुक्ति हुई लेकिन उसके बाद इस प्रक्रिया पर विराम लग गया। इसके बाद 2014 में बीपीएससी के जरिए शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हुई। इसके तहत पूरे राज्य में 3300 से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति होनी है। इसमें पाटलिपुत्र विवि के हिस्से 90 शिक्षक आए हैं। लेकिन इन शिक्षकों के ज्वाइन करने के बाद भी 40 फीसदी पद खाली ही हैं।

2003 में आयोग ने की थी नियुक्ति

राज्य के कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया बदलती रही है। 2017 में विवि सेवा आयोग का फिर से गठन किया गया। इससे पहले भी शिक्षकों की नियुक्ति की व्यवस्था आयोग के हाथ में थी, जिसे 10 मार्च 2007 को भंग कर दिया गया था। आयोग ने पांच चरणों में ढाई हजार शिक्षकों की नियुक्ति की। 1982, 1987 और 1992 को मिलाकर लगभग 120 शिक्षकों की नियुक्ति विभिन्न विश्वविद्यालयों में हुई। सबसे अधिक 1300 कॉलेज शिक्षकों की नियुक्ति 1996 में आयोग ने की। 2003 में विवि सेवा आयोग ने राज्य भर के विश्वविद्यालयों में 1050 शिक्षकों की नियुक्ति की। यह आयोग की अंतिम नियुक्ति थी। अब एक बार फिर राज्य सरकार ने आयोग गठित किया है, जो राज्य के विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में नियुक्ति करेगा।

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