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स्वच्छ भारत अभियान को पूरा करने में बाधक बन रहे है रेलवे के कर्मी, रेलवे बैरियर पर नहीं हैं शौचालय का निर्माण

Patna News - खुले में शौचमक्ति के लिए काफी प्रयास किया जा रहा है। इस पर करोड़ों रुपए खर्च हो रहा है। यहां तक कि जिसके घर में...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 09:31 AM IST
Siwan News - construction of toilets is not a hindrance in completing swachh bharat abhiyan railway workers railway barriers
खुले में शौचमक्ति के लिए काफी प्रयास किया जा रहा है। इस पर करोड़ों रुपए खर्च हो रहा है। यहां तक कि जिसके घर में शौचालय नहीं है उस घर में शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है। इसके एवज में सरकार 12 हजार रुपए अनुदान देती है। केन्द्र सरकार स्वच्छ भारत मिशन अभियान भी चला रही है। लेकिन इस अभियान को सफल बनाने में केन्द्र सरकार के कर्मचारी व अफसर ही बाधक बने हुए है। इसका कारण है कि कई सरकारी दफ्तर में ही शौचालय का निर्माण नहीं हुआ है। इसमें सबसे ज्यादा रेलवे के कर्मचारी शामिल है। सीवान से मैरवा व सीवान से थावे के बीच कई ऐसे रेलवे ढाला है, जहां पर ड्यूटी करने वाले कर्मियों के लिए शौचालय का इंतजाम नहीं है। लेकिन रेलवे यहां पर शौचालय का निर्माण नहीं करा रहा है। इससे ढाला पर बैरियर ड्यूटी परकाम करने वाले गेटमैन को अगर शौचालय जाना होता है तो वे अपनी ड्यूटी को छोड़कर खेत में जाते है। सीवान स्टेशन के पूरब ढाला है। वहां पर गेट मैन की तैनाती हुई है। लेकिन वहां पर शौचालय के लिए परेशानी नहीं होती है। लेकिन सीवान कचहरी स्टेशन के उतर साइड में गेटमैन के लिए केबिन है। लेकिन वहां पर विभाग ने शौचालय का निर्माण नहीं कराया है। इसलिए ड्यूटी करने वाले गेटमैन को काफी परेशानी होती है।

शौचालय नहीं रहने से कर्मचारियों को ड्यूटी छोड़कर जाना पड़ता है खुले में

शौचालय बनाने के लिए रेलवे नहीं कर रहा कोई प्रयास

वहीं सीवान मैरवा रेलखंड के वहीं वन एसटीसी कंधवारा ढाला के पास भी शौचालय का निर्माण नहीं है। इसके अलावा अन्य कई स्थानों पर भी बिना शौचालय के गेटमैन ड्यूटी कर रहे है। इसमें खरगिस गांव स्थित गेट, 93 नम्बर गेट, 94 नम्बर सिधवल ढाला, 95 नम्बर देवापाली, 95 सी भंटापोखर ढाला पर भी शौचालय नहीं है। शौचालय नहीं होने के बाद अभी तक शौचालय बनाने के लिए रेलवे कोई प्रयास भी नहीं कर रहा है। जबकि सीवान में रेलवे निर्माण के तीन इंजीनियर पदस्थापित है। इसके अलावा इंजीनियरिंग विभाग के सबसे बड़े अफसर एईएन भी पदस्थापित है। फिर भी शौचालयों का निर्माण नहीं कराया जा रहा है। इस तरह इस ढाला पर ड्यूटी करने वाले गेटमैन के बीच भी नाराजगी है। वे अपनी शिकायत इंजीनियरिंग विभाग को बताते है। लेकिन इस पर किसी भी स्तर से सुनवाई नहीं की जाती है।

सीवान कचहरी स्टेशन पर बैरियर का केबिन जहां पर नहीं है शौचालय का इंतजाम।

गेटमैन डब्बा में पानी लेकर बाहर जाता है शौचालय

अगर शौचालय की ज़रुरत पड़ती है तो गेटमैन को डब्बा में पानी लेकर खेत में जाना पड़ता है या वे अपने आवास पर चले जाते है। इस दौरान उन्हें इस बात की चिंता सताने लगती है कि कही ट्रेन आने का समय तो नहीं हो गया है। अगर उन्हें शौचालय के लिए जाना है और ट्रेन आने का समय हो गया है तो वे अपनी ड्यूटी छोड़कर भी नहीं जा पाते है। इससे उन्हें अपने आप को असहज महसूस करना पड़ता है। इसी तरह कचहरी स्टेशन के दक्षिण साइड में भी गेटमैन की तैनाती है। लेकिन वहां पर शौचालय की बात तो दूर गेटमैन के लिए केबिन भी नहीं बना है। वहां पर एक शेड डाल दिया गया है। इससे गर्म हवा के थपेड़ो के बीच उसे अपनी ड्यूटी करनी पड़ती है। फिर भी वहां पर केबिन बनाने या शौचालय का निर्माण कराने के लिए किसी भी तरह का प्रयास नहीं किया जा रहा है।

स्टेशन पर भी नहीं है शौचालय का इंतजाम

सीवान कचहरी स्टेशन पर भी शौचालय का निर्माण नहीं कराया गया है। इससे यात्रियों के बीच नाराजगी है। स्टेशन पर एक पुराना शौचालय है। लेकिन वह खराब है। वहां पर पानी का भ इंतजाम नहीं है। साथ ही रखरखाव के अभाव में वह उपयोग भी करने लायक नहीं है। इसलिए कचहरी स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करने वाले यात्रियों को शौचालय के लिए घर जाना पड़ता है। लेकिन विभाग यहां पर शौचालय का निर्माण नहीं करा रहा है।



क्या कहते है एईएन


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