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35 वर्षों से मूक-बधिर बच्चों को मुफ्त पढ़ा रहे आशियाना के डॉ. आनंद मूर्ति, पढ़ाने के साथ जगाते हैं आत्मविश्वास

Dainik Bhaskar

Sep 10, 2018, 05:06 AM IST

Patna News - पटना में आनंद मूर्ति कई बच्चों को उनके घर पर जाकर साइन लैंग्वेज से पढ़ाते हैं। श्रेया शर्मा | पटना आशियाना के डॉ....

Patna - 35 वर्षों से मूक-बधिर बच्चों को मुफ्त पढ़ा रहे आशियाना के डॉ. आनंद मूर्ति, पढ़ाने के साथ जगाते हैं आत्मविश्वास
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पटना में आनंद मूर्ति कई बच्चों को उनके घर पर जाकर साइन लैंग्वेज से पढ़ाते हैं।

श्रेया शर्मा | पटना

आशियाना के डॉ. आनंद मूर्ति 35 वर्षों से मूक-बधिर बच्चों को पढ़ा रहे हैं। अभी वे करीब 100 बच्चों को बिना फीस के साइन लैंग्वेज से शिक्षा दे रहे हैं। साथ ही मगध महिला कॉलेज के कॉमर्स विभाग में गेस्ट फैकल्टी के रूप में छात्राओं को पढ़ाते हैं।

आरबीआई और अन्य बड़ी-बड़ी नौकरियां छोड़कर डॉ. आनंद मूक-बधिर बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक भी करते हैं। वे अभी ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ डेफ के चेयरमैन हैं। सिर्फ शिक्षा ही नहीं, आर्ट और कल्चर को भी इन बच्चों के बीच प्रोमोट कर रहे हैं। इन 35 वर्षों में उन्होंने 500 से ज्यादा बच्चों को पढ़ाया है। डॉ. आनंद कहते हैं-इन बच्चों को सिर्फ पढ़ाना काफी नहीं है, उनमें आत्मविश्वास भरने की जरूरत है कि वे किसी से कम नहीं हैं। मैं वर्षों से ऐसे बच्चों को पढ़ा रहा हूं। सबसे जरूरी है कि उनमें शिक्षा को लेकर उम्मीद जगाई जाए। वे पहले बच्चों को जागरूक करते हैं, फिर उन्हें पढ़ाते हैं। कई बच्चों को वे उनके घर पर जाकर साइन लैंग्वेज से पढ़ाते हैं। जिन विषयों को आनंद नहीं पढ़ा पाते तो वे पहले उस विषय के शिक्षक को खोजते हैं। फिर शिक्षक की बातों को साइन लैंग्वेज के जरिए बच्चे को समझाते हैं।

छात्रा को क्लास खत्म होने के बाद भी पढ़ाया

मगध महिला कॉलेज के कॉमर्स विभाग की छात्रा 21 वर्षीया गुलफशा बचपन से ही मूक-बधिर है। वर्ष 2016 में जब वह कॉलेज में आई तो उसमें आत्मविश्वास का अभाव था। अभी वह थर्ड ईयर में है और अब उसमें आत्मविश्वास व चमक है। गुलफशा से बातचीत के दौरान डॉ. आनंद ने साइन लैंग्वेज के जरिए समझाया। गुलफशा ने बताया कि फर्स्ट ईयर में वह एक विषय में फेल हो गई थी। उसके बाद अचानक डॉ. मूर्ति की नजर क्लास में मायूस बैठी गुलफशा पर गई। जानने पर पता चला कि वह एक विषय में फेल हो गई है। उसके बाद उन्होंने क्लास खत्म होने के बाद कॉलेज में ही गुलफशा को पढ़ाना शुरू किया। जिसका नतीजा है कि आज वह सारे पेपर क्लियर कर तीसरे वर्ष में पहुंच गई है। इसके अलावा कॉमर्स कॉलेज और अन्य काॅलेजों के मूक-बधिर बच्चों को डॉ. मूर्ति पढ़ा रहे हैं।

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