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पुरुष मानसिकता पर तमाचा है नाटक

एक वर्ष पहले
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पुरबिया रंग महोत्सव- 2020 के अंतिम दिन ‘कुच्ची का कानून’ का मंचन प्रेमचंद रंगशाला में हुआ। यह नाटक शिवमूर्ति जी की कहानी कुच्ची का कानून का नाट्य रूपांतरण है, जिसका नाट्य रूपांतरण अविजीत चक्रवर्ती ने किया है। मेरा कहना है कि कोख देकर ब्रह्मा ने औरतों को फंसा दिया। अपनी बला उनके सिर डाल दी। अगर दुनिया की सारी औरतें अपनी कोख वापस कर दे तो क्या ब्रह्मा के वश का है कि वें अपनी दुनिया चला लें। जब मेरे पैर-हाथ, आंख, कान पर मेरा हक़ है। इन पर मेरी मर्जी चलती है, तो मेरी कोख पर किसका हक़ होगा? उस पर किस की मर्जी चलेगी?

कुछ इस तरह के संवाद के साथ महिलाओं की स्वतंत्रता और हक़ के लिए आवाज उठाती है कुच्ची। भारतीय समाज प्राचीन काल से ही पुरुषसत्तात्मक मानसिकता का अनुयायी रहा है। इसमें महिलाओं की स्वतंत्रता, उनकी अभिव्यक्ति और संवेदना को कोई खास महत्व नहीं दिया जाता रहा है। उन्हें मात्र एक वस्तु के रूप में प्रयोग करने की सामग्री समझा गया है। कुच्ची विधवा होते हुए भी बिना दूसरा विवाह किए गर्भधारण करती है, जो समाज के पुरुष मानसिकता को नागवार गुजरती है। क्या किसी एक महिला की हिम्मत से पितृसत्तात्मक मानसिकता में बदलाव आ सकता है? ऐसे ही किसी संभावनाओं की तलाश में है नाटक कुच्ची का कानून। पुरबिया रंग महोत्सव 2020 तीसरे दिन यानि 07 मार्च 2020 को प्रेमचंद रंगशाला के बाहरी परिसर मे अभिषेक राज ड्रामेबाज एवं समूह द्वारा रंग संगीत ‘कबीरनामा’, अंकित कुमार के निर्देशन ने नुक्कड़ नाटक ‘हड़प्पा हाउस’ और सनत कुमार के निर्देशन मे नुक्कड़ नाटक ‘सम्मान करो’ का प्रदर्शन हुआ।

जीवन की विसंगतियों को मंच पर किया साकार

कालिदास रंगालय

प्रेमचंद रंगशाला

बनबारी- मृत्युंजय प्रसाद

रामेशर- मो. जफर आलम

बलई बाबा- शुभ्रो भट्टाचार्य

धनई बाबा- रोशन कुमार

कुच्ची- उज्जवला गांगुली

रामेशर बहू- श्रीरणा चक्रवर्ती

अईया- राजमणि सिंह, पूजा कुमारी

कुट्टी- श्रीजीता तिवारी

दलाल- आशीष रंजन

बितानु- राहुल रंजन

लक्ष्मण चौधरी- सत्या प्रकाश

समधी- अरविंद जी

ठकुराइन- श्रीजीता तिवारी

हनुमान- नंदकिशोर नंदू

ग्रामीण- राजमणि सिंह, सत्य प्रकाश, चिन्टु, शिखा, पूजा

मंच पर

सिटी रिपोर्टर |‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस- 2020’ की पूर्व संध्या पर संस्था ‘बायार’ की ओर से शनिवार काे मनोज मानव लिखित, निर्देशित एवं अभिनीत एकल प्रस्तुति ‘मैं तमाशा’ का कालिदास रंगालय में मंचन हुआ। वहीं बिस्तार की ओर से ‘होली’ शीर्षक पर नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन भी हुआ। इस अवसर पर ‘संघर्ष से सम्मान तक’ शीर्षक स्मारिका के प्रथम अंक का विमोचन भी किया गया और अमृता अल्पेश सोनी को स्व. सीता देवी सिंह ‘मातृ-सम्मान’ से सम्मानित किया गया। नाटक में मंच के माध्यम से विभिन्न चरित्रों को जीते हुए अभिनेता मनोज मानव ने बताया कि इस देश में सबकुछ है, अगर नहीं है तो औरत या औरत की तरह दिखने वाली किसी भी चीज़ की इज्ज़त, उसकी सुरक्षा, उसकी स्वतंत्रता। अभिनेता कहता है कि माइ लॉर्ड! हमारी हिफाजत बची नहीं और मुझे मेरी मौत मरने कि इजाजत भी नहीं है, तो कलेजा मुंह के बल आ जाता है। वहीं जब वो धिक्कारता है कि कहां हैं, वह जिन्हें अपने मनुष्य होने पर बड़ा गर्व है, तो सर शर्म से वाकई झुक जाता है।
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