बिहार के कई जिलों में भूकंप के झटके, घर और दफ्तर से बाहर निकले लोग / बिहार के कई जिलों में भूकंप के झटके, घर और दफ्तर से बाहर निकले लोग

भूकंप का केंद्र असम का कोकराझार था और इसकी तीव्रता 5.4 मापी गई है

Dainikbhaskar.com

Sep 12, 2018, 10:45 AM IST
Earthquake in some districts of Bihar

पटना. राजधानी से 660 किलोमीटर दूर आए भूकंप से पटना में भी लोग डर गए। दो से तीन सेकेंड के लिए महसूस हुए कंपन से लोग घरों और दफ्तरों से बाहर निकल गए। हालांकि, रिक्टर पैमाने पर 5.5 तीव्रता होने के कारण राजधानी सहित आसपास के इलाके में अधिक परेशानी नहीं हुई।

भूकंप का केंद्र असम के कोकराझार जिले में धरती के 13.5 किलोमीटर अंदर मौजूद था। बिहार के दो जिलों में तेज झटके महसूस होने की खबर है। केंद्र से 220 किलोमीटर दूर किशनगंज और 275 किलोमीटर दूर कटिहार में मध्यम कैटेगरी के झटके महसूस किए गए हैं। मौसम विज्ञान विभाग ने जानकारी दी है कि जानमाल के नुकसान के कैटेगरी से बिहार पूरी तरह सुरक्षित रहा है।

पटना में भी दफ्तरों के बाहर आए लोग
राजधानी में अप्रैल 2015 में आए भूकंप ने लोगों को डरा दिया। नेपाल में 24 और 25 अप्रैल को 6.7 से 7.8 के बीच तीव्रता होने के कारण बिहार में भी बड़ा नुकसान हुआ था। हालांकि, पटना में जबतक लोग समझ पाते भूकंप गायब हो गया। दो से तीन सेकेंड के लिए हिली धरती ने तीन वर्ष पूर्व आए भूकंप की यादें ताजा कर दीं। लोग घर और दफ्तर छोड़ बाहर आ गए। स्कूलों में बच्चों को बाहरी ग्राउंड में निकालना पड़ा। अभिभावक समय से पूर्व बच्चों को लेने स्कूल पहुंच गए। कुछ स्कूलों में जल्दी छुट्टी की मांग भी की गई।

इस कारण आता है भूकंप
पृथ्वी के अंदर मौजूद सात प्लेट्स लगातार घूमते रहते हैं। जहां अधिक टकराते हैं, उसे फॉल्ट लाइन करते हैं। टकराने के दौरान जहां अधिक दबाव बनता है वहां प्लेट्स टूटने लगते हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने के लिए रास्ता खोजती है। इसी दौरान धरती हिलती है और ऊपरी सतहों पर कंपन महसूस होने लगता है। हिन्द महासागर के कुछ क्षेत्र भूकंप के लिहाज से काफी संवेदनशील माने जाते हैं।

तीव्रता को इस तरह समझें
0 से 1.9 तीव्रता होने पर लोगों को कंपन महसूस नहीं होती। 2 से 2.9 होने पर हल्का महसूस होता है। 3 से 3.9 होने पर सड़क पर आपके पास से बड़ी गाड़ियों के गुजरने पर महसूस होने जैसा कंपन होता है। 4 से 4.9 होने पर घरों के सामान नीचे गिर सकते हैं। 5 से 5.9 होने पर फर्नीचर हिलने लगता है। 6 से 6.9 होने पर इमारतों की नींव दरक सकती है।

ऊपरी मंजिलों को नुकसान पहुंचता है। 7 से 7.9 होने पर घर गिर सकते हैं।8 से 8.9 होने पर बड़े पुल भी गिर सकते हैं। 9 से अधिक होने पर बड़ी तबाही हो सकती है। ऐसे में मैदान में सीधा खड़ा होना भी संभव नहीं होता।

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Earthquake in some districts of Bihar
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