हाजीपुर / सोनपुर मेले में माला पहनाकर और बैंड बाजे के साथ हुआ हाथियों का स्वागत



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  • कार्तिक पूर्णिमा के साथ शुरू हो रहा है एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला
  • सोनपुर मेला देखने के लिए देश-विदेश से हाजीपुर पहुंच रहे लोग

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2019, 11:57 AM IST

हाजीपुर. ऐतिहासिक गजग्राह युद्ध की भूमि सोनपुर में विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेले का रविवार को शुभारंभ हो रहा है। एशिया के सबसे बड़े पशु मेले में इस बार हाथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। हाथी जैसे ही मेला परिसर पहुंचे, फूल-माला और बैंड बाजे के साथ लोगों ने उसका इस्तकबाल किया। पिछले 2-3 सालों से सोनपुर मेले में लोगों ने हाथी लाना बंद कर दिया था। केवल बाहुबली विधायक अनंत सिंह छोटी हथिनी लेकर मेले में पहुंचते थे।

 

सोनपुर मेले में इस बार हाथियों के आकर्षण के लिए सरकार ने नई पहल की है। मेले में ज्यादा से ज्यादा हाथी पहुंचे, इसके लिए हाथी मालिकों से प्रशासन ने संपर्क किया और उन्हें आमंत्रण भेजा है। मेले में हाथी के पहुंचने के साथ ही हाथी के मालिकों का भी माला पहनाकर स्वागत किया जा रहा है। हाथियों के स्वागत के लिए जिला प्रशासन ने हाथी स्वागत समिति बनाई है।

 

समिति का नेतृत्व कर रहे राजीव कुमार ने बताया कि पशु क्रूरता नियम के चलते मेले में हाथियों का आना बंद हो गया था लेकिन नियमों का सम्मान करते हुए इस बार हाथियों को मेले में बुलाया गया है। मेले में हाथी लोगों के आकर्षण का केंद्र होते हैं। कई लोग खासकर मेले में हाथी देखने ही पहुंचते हैं। हालांकि, मेले में अभी तक सिर्फ दो ही हाथी पहुंचे हैं लेकिन प्रशासन ने 25 से ज्यादा हाथियों के आने की बात कही है।

 

हाथियों को लेकर कम होता गया क्रेज
सोनपुर मेले में हाथियों की बिक्री बंद होने के बाद कारोबारियों का क्रेज कम होता चला गया। 2007 के मेले में कारोबारी 77 हाथी लेकर मेले में पहुंचे जो 2014 में घटकर 39 हो गया। 2015 में 17,  2016 में 13 और 2017 में सिर्फ तीन हाथी मेले में दिखाई दिए। 2018 में केवल अनंत सिंह की हथिनी मेले में थी।

 

सैकड़ों साल से सोनपुर में लग रहा पशु मेला
सोनपुर में लगने वाले पशु मेले का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है। एक जमाने में यह मेला जंगी हाथियों का सबसे बड़ा केंद्र था। मौर्य वंश के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य मुगल सम्राट अकबर और 1857 के गदर के नायक वीर कुंवर सिंह ने भी से इस मेले से हाथियों की खरीदी की थी। मध्य एशिया के बड़े कारोबारी इस मेले में पशुओं की खरीद-बिक्री के लिए आया करते थे।

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