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हर घर बिजली का सपना हुआ पूरा, 1.19 करोड़ घर हुए जगमग

3 वर्ष पहले
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राज्य में दो माह पहले ही हर घर बिजली का सपना पूरा हो गया। दिसंबर के अंत तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही बिजली कंपनी ने अक्टूबर में ही हर घर को जगमग कर दिया। इसी क्रम में एक नवंबर बिहार के इतिहास में एक स्वर्णिम दिवस के रूप में दर्ज हो गया, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की कि बिहार के सभी इच्छुक 1.19 करोड़ घरों में बिजली पहुंचा दी गई है। हर घर बिजली का गौरव प्राप्त करने वाला बिहार देश का आठवां राज्य बना।

इसके पहले दिसंबर, 2017 तक सभी 39073 गांवों के विद्युतीकरण का काम पूरा कर दिया गया था और अप्रैल, 2018 तक योजना अनुसार 106267 बसावटों के विद्युतीकरण भी पूरा कर लिया गया। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में कुल घरों की संख्या 1.78 करोड़ मानी गई है। सरकार और बिजली कंपनी ने सर्वेक्षण कराया तो बिजली का कनेक्शन लेने के इच्छुक घरों की संख्या 1.19 करोड़ थी। इसी को लक्ष्य मान कर घर घर बिजली पहुंचाने का काम शुरू हुआ और इसे पूरा करने का लक्ष्य 31 दिसंबर, 2018 तय किया गया। पर, यह लक्ष्य अक्टूबर में ही पूरा हो गया।

पीक ऑवर में चाहिए 8774 मेगावाट बिजली
सुदूर और दुर्गम पहाड़ी, जंगली इलाकों में बिजली पहुंचाने के लिए सौर ऊर्जा का सहारा लिया गया। अक्षय ऊर्जा स्रोतों से विद्युत उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए योजना के अंतर्गत 229 मेगावाट विद्युत उत्पादन का लक्ष्य था और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सभी 18 इकाइयों के माध्यम से 229 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है। बिहार ने ट्रांसमिशन-डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में भी बेहतर काम किया है। 2005 में जहां 700 मेगावाट बिजली के वितरण की जा रही थी, वहीं आज यह बढ़कर 5000 मेगावाट से ज्यादा हो चुकी है। जबकि क्षमता 10000 मेगावाट तक की हो गई है। 2018-19 में पीक ऑवर में बिजली की मांग 8774 मेगावाट की हो गई है। इसमें कृषि लोड शामिल है।

31 दिसंबर तक सिंचाई के लिए अलग फीडर
राज्य में संचरण हानि कम करने के उपायों पर भी व्यापक काम हो रहा है। वर्ष 2015-16 तक ट्रांसमिशन लॉस 40 प्रतिशत के आस पास था। वर्ष 2020-21 तक इसे घटाकर 15 प्रतिशत करने का लक्ष्य है। इसके लिए पुराने और जर्जर तारों को बदलने का काम तेजी से जारी है और 31 दिसंबर, 2019 तक सभी पुराने एवं जर्जर तारों को बदलने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी तरह 31 दिसंबर तक सिंचाई के लिए अलग फीडर बनाने का काम पूरा कर लेने का लक्ष्य रखा गया है। सिंचाई के लिए अलग फीडर बन जाने के बाद किसानों को आसानी होगी। डीजल पर उनकी निर्भरता कम होगी।

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