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विकास के लिए हर साल पैसे मिले, लेकिन जानीपुर स्कूल में मूलभूत सुविधाएं भी नहीं

Patna News - सरकारी स्कूलों में विकास के लिए मिलनेवाले पैसे की बर्बादी कैसे होती है, यह देखना है तो फुलवारीशरीफ के राजकीय मध्य...

Nov 18, 2019, 09:05 AM IST
Patna News - every year money is paid for development but not even basic facilities in janipur school
सरकारी स्कूलों में विकास के लिए मिलनेवाले पैसे की बर्बादी कैसे होती है, यह देखना है तो फुलवारीशरीफ के राजकीय मध्य विद्यालय जानीपुर स्कूल का हाल देख लीजिए। स्कूल में एक ही जगह पर दो मेन गेट महज कुछ दूरी पर ही बना दिए गए। जब विकास कार्य के लिए पैसे अाए ताे पहले से मेन गेट हाेने के बावजूद बाथरूम और झाड़ के ऊपर ही एक और गेट बनवा दिया गया। जब यह गड़बड़ी स्कूल प्रबंधन की समझ में आई तो इस गेट को बंद करने के लिए आगे से दीवार बना दी गई। इसके अलावा, स्कूल के विकास के लिए बीते वित्तीय वर्ष में समग्र शिक्षा अभियान के तहत 75 हजार रुपए दिए गए थे। इससे पहले 12 हजार रुपए हर साल स्कूल काे दिए जाते रहे हैं। इसके बावजूद स्कूल बदहाल है। मूलभूत सुविधाएं नगण्य हैं।

आठवीं तक होती है पढ़ाई

इस स्कूल का निर्माण सुनिश्चित रोजगार योजना के तहत हुअा था। स्कूल में वर्ग एक से अाठ तक की पढ़ाई होती है। यहां 585 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन जब भी अधिकारी निरीक्षण करने जाते हैं तो 150 से ज्यादा बच्चे उपस्थित नहीं रहते। अधिकारियों के मुताबिक मिड-डे मील में भी गड़बड़ी की सूचना मिली थी कि यहां उपस्थित छात्रों की संख्या से अधिक बच्चों के लिए मध्याह्न भाेजन बनाया जाता है। अब अधिकारियों ने स्कूल प्रबंधन से कहा है कि उपस्थित होनेवाले बच्चों का रिकाॅर्ड रखें। जो छात्र रेगुलर नहीं आ रहे, उनके घर जाकर संपर्क करें। इसके बाद भी छात्र स्कूल नहीं अाएं तो उनका नामांकन रद्द कर दें।

45000 मिले रंगाई के लिए

स्कूल को रंग-राेगन के लिए विभाग की ओर से 45 हजार की राशि मिली। लेकिन इस पैसे से कितनी बार और कहां-कहां रंगाई हुई, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। अधिकारियों की मानें तो स्कूल के तीन कमरों को रंगने के लिए यह राशि दी गई थी। एक बार के रंगाई में ही इस राशि को खर्च कर दिया गया है।

फैली रहती है गंदगी

इस स्कूल में बच्चों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। बाथरूम और स्कूल में इतनी गंदगी है कि बच्चियों काे बाहर जाना पड़ता है। किसी भी वर्ग में बच्चों के बैठने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। उनकाे जमीन पर ही बैठकर पढ़ना पड़ता है। छत के ऊपर हाई वोल्टेज बिजली के तार खुले में है। हादसे की अाशंका हमेशा रहती है, क्याेंकि विद्यार्थी छत की रेलिंग पर जाकर बैठे रहते हैं। स्कूल के शिक्षक इन्हें रोकते-टोकते भी नहीं हैं। स्कूल की चहारदीवारी भी वर्षाें से टूटी है।

जानीपुर मध्य विद्यालय में दरी पर बैठ कर पढ़ते बच्चे और टूटी बेंच-डेस्क।

स्कूल की छत पर आसपास के लोग सुखाते हैं कपड़े

सड़क से सटे होने के कारण बाहरी छात्र अक्सर स्कूल के सामने ही हमेशा खड़े रहते हैं। आसपास बने घरों के लोग स्कूल की छत पर कपड़े सुखाते हैं। स्कूल में मिड-डे मील के समय ही कई छात्रा स्कूल की छत के रेलिंग पर बैठी दिखी। वहीं गेट के ऊपर से ही छात्र बाहर आते-जाते रहे। यह सब शिक्षकों के समाने ही होता रहता है।

अधिकारियों ने स्कूल प्रबंधन से मांगा खर्च का हिसाब

प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी गौहर अंजुम एवं संकुल समन्वयक प्रभास कुमार ने स्कूल में दो मुख्य दरवाजे, नामांकित बच्चों का रिकाॅर्ड, स्कूल में खर्च की गई राशि का हिसाब स्कूल प्रबंधन से मांगा है। इनके मुताबिक इस स्कूल में कई स्तर पर खामियां हैं। हर साल निश्चित राशि स्कूल के रख-रखाव के लिए दी जाती है। इसके बाद भी स्कूल में बेंच तक नहीं है। स्कूल प्रबंधन से लिखित में खर्च का हिसाब मांगा गया है।


शाम होते ही स्कूल में आ जाते हैं असामाजिक तत्व

स्कूल की दीवारों पर कई जगह अापत्तिजनक बातें लिखी हुई हैं। स्कूल प्रशासन की मानें तो शाम होते ही बाहरी लोग स्कूल में आते हैं। वे ही दीवारों पर इस तरह की बातें लिखते हैं और स्कूल को गंदा करते है। इन्हें रोकने के लिए स्कूल प्रशासन के पास कोई उपाय नहीं है।

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