दिल्ली हादसा / मानो गैस चैंबर में कैद कर दिए गए, एक एक कर बिहार के 30 लोगों ने भी दम तोड़ा

दिल्ली: फैक्ट्री में आग लगने से अब तक 43 लोगों की मौत हो चुकी है। दमकलकर्मी बिल्डिंग की जांच कर रहे हैं। दिल्ली: फैक्ट्री में आग लगने से अब तक 43 लोगों की मौत हो चुकी है। दमकलकर्मी बिल्डिंग की जांच कर रहे हैं।
बचावकार्य के लिए एनडीआरएफ की टीम भी घटना स्थल पर पहुंच चुकी है। बचावकार्य के लिए एनडीआरएफ की टीम भी घटना स्थल पर पहुंच चुकी है।
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दिल्ली: फैक्ट्री में आग लगने से अब तक 43 लोगों की मौत हो चुकी है। दमकलकर्मी बिल्डिंग की जांच कर रहे हैं।दिल्ली: फैक्ट्री में आग लगने से अब तक 43 लोगों की मौत हो चुकी है। दमकलकर्मी बिल्डिंग की जांच कर रहे हैं।
बचावकार्य के लिए एनडीआरएफ की टीम भी घटना स्थल पर पहुंच चुकी है।बचावकार्य के लिए एनडीआरएफ की टीम भी घटना स्थल पर पहुंच चुकी है।

  • दिल्ली के अनाज मंडी इलाके में रविवार तड़के फैक्ट्री में आग लगने से 43 लोगों की मौत हो गई
  • समस्तीपुर के 10 और सहरसा के छः लोगों की मौत, सीतामढ़ी के पांच की गई जान
  • फैक्ट्री में काम करने दरभंगा शाहिद ने बताया कि इमारत में छोटे-छोटे कमरों में 10-12 लोग सोते थे

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2019, 08:43 AM IST

नई दिल्ली. दिल्ली में 22 साल बाद उपहार अग्निकांड के वीभत्स दृश्य ताजा हो गए। यहां अनाज मंडी इलाके में रविवार सुबह 5 बजे बैग बनाने वाली चार मंजिला अवैध फैक्ट्री में आग लग गई। आग और प्लास्टिक के धुंए की वजह से 43 मजदूरों की मौत हो गई। मृतकों में 30 बिहार के हैं। इनमें समस्तीपुर के 10, सहरसा के 6, सीतामढ़ी के 5, मुजफ्फरपुर के 3, मधुबनी के 1, बेगूसराय के 1, अररिया के 2, दरभंगा के 2 लोग शामिल हैं। अररिया के दोनों सगे भाई थे। जबकि दरभंगा के दोनों मृतक साला-बहनोई थे। 

बिहार के 12 घायल भी हुए हैं। मृतकों में तीन बच्चे भी हैं। 5 जिंदा जल गए। 38 लोगों की मौत दम घुटने से हुई। 62 लोग बचा लिए गए। मजदूर सामने मौत देख रहे थे लेकिन भागने का कोई रास्ता नहीं था। आग दूसरी मंजिल से लगनी शुरू हुई और कुछ देर में ऊपर की मंजिलों तक फैल गई। पूरी बिल्डिंग में आग का गुबार भर गया। पहली मंजिल पर रहने वाले लोग जान बचाकर भागने में सफल रहे। हादसे के वक्त बिल्डिंग में 100 से अधिक लोग मौजूद थे। 

ये लोग पूरे दिन काम करते थे और फिर यहीं सो जाते थे। एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडर आदित्य प्रताप सिंह ने बताया कि अधिकांश लोगों की मौत आग के कारण कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस फैलने से हुई। समूची बिल्डिंग में धुएं के साथ यह गैस फैल गई और लोगों का दम घुट गया। फैक्ट्री मालिक रेहान और मैनेजर फुरकान को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मृतकों में बिहार के

नाम पता
गुड्डू हरिपुर, समस्तीपुर
मो. सदरे हरिपुर, समस्तीपुर
मो. साजिद हरिपुर, समस्तीपुर
मो. अकबर हरिपुर, समस्तीपुर
जो जो हरिपुर, समस्तीपुर
गनवा हरिपुर, समस्तीपुर
महबूब सींगिया, समस्तीपुर
अतातुल सींगिया, समस्तीपुर
भूबिया बेलाही, समस्तीपुर
साजिद हरिहर, समस्तीपुर
फजल नरियार, सहरसा
सजिम नरियार, सहरसा
अफजल नरियार, सहरसा
मो. सज्जार नरियार, सहरसा
ग्यासुद्दीन नरियार, सहरसा
अफसार नवहट्‌टा, सहरसा
दुलारे बुधनगरा, सीतामढ़ी
अब्बास बुधनगरा, सीतामढ़ी
गुलाब बुधनगरा, सीतामढ़ी
एनुल सिटकी, सीतामढ़ी
सनाउल्लाह बोखरा, सीतामढ़ी
नवीन कुमार वरीजाना, बेगूसराय
मो. साजिद उफरोली, मुजफ्फरपुर
राजू उफरोली, मुजफ्फरपुर
बबलू मुजफ्फरपुर
शाकिर मलमल, मधुबनी
जाहिद हेगुआ, अररिया
अयूब हेगुआ, अररिया
अखलाक दरभंगा शहर
आदिल दरभंगा शहर

बिहार के 12 घायल

गुलरेज दरभंगा
परवेज दरभंगा
मुकीम मधुबनी
मो. परवेज मधुबनी
मुबारक सहरसा
मुस्तफा सीतामढ़ी
आसिफ अररिया
मो. असलम समस्तीपुर
मो. साहिबजान समस्तीपुर
मो. मन्नान समस्तीपुर
मो. मेहताब समस्तीपुर
मो. सुफियान समस्तीपुर

प्रत्यक्षदर्शी मो. शाहिद ने बताया- जो ऊपर थे वे ऊपर ही रह गए

हादसे में दरभंगा जिले के बवारा बुदरू गांव के रहने वाले मो. शाहिद बाल-बाल बच गए। वह इमारत में ही थे। उन्होंने बताया- मैं सोया हुआ था। सुबह करीब पौने पांच बजे एक व्यक्ति कमरे में आया और सबको जगाकर बोला की नीचे आग लग गई। हम लोग उठे और नीचे देखने गए। इतने में आग फैल गई। हम दोबारा ऊपर नहीं आ पाए। जो ऊपर थे वो ऊपर ही रह गए और जो नीचे थे वे नीचे रह गए। दोबारा अंदर जाने का कोई मौका नहीं मिला।

मुजफ्फरपुर के रहने वाले अलाउद्दीन। उन्होंने बताया कि उनके परिजन मुस्तफा भी हादसे में झुलस गए।

"कमरे में धुआं था, खिड़की खोल कर ली सांस"
मुजफ्फरपुर के रहने वाले मो. मुस्तफा भी हादसे में झुलस गए। उनके परिजन अलाउद्दीन ने बताया कि जैसे ही अनाज मंडी में आग की खबर मिली। उन्होंने तुरंत मुस्तफा को फोन किया। वह उस वक्त एंबुलेंस में थे। मुस्तफा ने मुझे बताया कि रात में 3 बजे तक फिल्म देखने के बाद वह सो गए। सुबह 4.30 बजे गर्मी की वजह से नींद खुली। गेट खोला तो बाहर धुआं ही धुआं था। बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं नजर आ रहा था। धुएं के कारण सांस नहीं ले पा रहे थे। भागकर एक कोने वाले कमरे में गए और खिड़की खोली तो जान में जान आई। 30 मिनट बाद कोई आया और खींचकर बाहर निकाला।

दोस्त को किया आिखरी फोन- मैं अब खत्म होने वाला हूं, मेरे परिवार का ख्याल रखना...
धुएं से घिरे मुशर्रफ नाम के युवक ने जिंदगी के अंतिम क्षणों में अपने दोस्त मोनू से साढ़े तीन मिनट तक फोन पर बात की। बातचीत के प्रमुख अंश...

मुशर्रफ: हैलो मोनू, भैया आज मैं खत्म होने वाला हंू। करोलबाग आ जाना। सांस भी नहीं ली जा रही।
मोनू: आग कैसे लग गई?

मुशर्रफ: पता नहीं। अब कुछ नहीं हो सकता है। मेरे घर का ध्यान रखना।

मोनू: फायर ब्रिगेड को फोन करो
मुशर्रफ: कुछ नहीं हो रहा। मेरे घर में एकदम से मत बताना। पहले बड़ों को बताना (कराहते हुए या अल्लाह...)।
मोनू: हैलो, हैलो...(दूसरी ओर से उल्टी करने की आवाज आई)। तुझे कुछ नहीं होगा मेरे भाई, कूद जा।
मुशर्रफ: रास्ता नहीं है। अब तो गए भैया।
मोनू: बाहर छज्जे की ओर जा।
मुशर्रफ: भाई, जैसे चाहे मेरा घर चलाना। बच्चों और सब घरवालों को संभालकर रखना...(फोन कट गया।)

सबसे बड़ा कारण
छोटी सी इमारत में 100 से ज्यादा लोग सो रहे थे। फैक्ट्री का गेट संकरा था। ऐसे में सभी फंस गए। संकरी गलियों में दोनों साइड में सामान रखा था। हादसे के बाद मदद को एंबुलेंस भी तेजी से भीतर न जा सकीं।

सबसे बड़ी चूक...
फायर अधिकारी ने बताया कि उन्हें केवल अाग लगने की सूचना दी गई थी। कॉल करने वाले ने यह नहीं बताया था कि इमारत में कई लोग भी फंसे हैं। ऐसे में सिर्फ आग बुझाने की तैयारी से पहुंचे न कि लोगों को बचाने की।

लापरवाही की इंतहा
इमारत में चल रही फैक्ट्री पूरी तरह से अवैध थी। उसके पास किसी भी तरह की परमिशन नहीं थी। जिस अनाजमंडी इलाके में हादसा हुआ वहां इस तरह की कई फैक्ट्रियां धड़ल्ले से चल रही हैं।

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